यूपी: मुख्तार गिरोह के फरार मेराज का भांजा गिरफ्तार, दो जिलों में दर्ज हैं 21 मुकदमे
इंटरस्टेट गैंग आईएस-233 (गैंग लीडर-मुन्ना बजरंगी) के सूचीबद्ध सदस्य और इंटरस्टेट गैंग आईएस-191 के (सरगना-मऊ विधायक मुख्तार अंसारी) के सहयोगी मेराज अहमद उर्फ भाई मेराज व उससे जुड़े लोगों पर वाराणसी पुलिस तेजी से शिकंजा कस रही है। रविवार को मेराज का सहयोग करने और उसे शरण देने के आरोप में उसके भांजे नदेसर निवासी परवेज अहमद को कैंट थाने की पुलिस ने गिरफ्तार किया। गिरफ्तार परवेज कैंट थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसके खिलाफ वाराणसी और जौनपुर के अलग-अलग थानों में 21 मुकदमे दर्ज हैं।
मेराज मूल रूप से गाजीपुर जिले के करीमुद्दीनपुर थाना अंतर्गत महेन का निवासी है और वाराणसी में पहड़िया क्षेत्र की अशोक विहार कॉलोनी में रहता है। मेराज के द्वारा फर्जी दस्तावेज के आधार पर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों से कई शस्त्र लाइसेंस बनवाए गए हैं। इस संबंध में जैतपुरा और कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। शनिवार को पुलिस ने मेराज के भाई और यूपी पुलिस के सिपाही सेराज अहमद को गिरफ्तार किया था। इसके साथ ही फरार मेराज के घर पर कुर्की की नोटिस चस्पा की गई थी।
एसएसपी अमित पाठक ने बताया कि पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने मेराज और उससे संबंधित लोगों के आठ शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। इसके साथ ही छह शस्त्र जब्त कर लिए गए हैं। मेराज की तलाश में पुलिस टीमों की दबिश जारी है।
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मेराज सहित चार के खिलाफ कैंट थाने में तीन और मुकदमे दर्ज
शस्त्र लाइसेंस के पते को लेकर फर्जीवाड़ा, तथ्यों को छुपाने और नवीनीकरण के कागज में थाने की मुहर व हस्ताक्षर का मिलान न होने को लेकर कैंट थाने में मेराज और उसके तीन करीबियों के खिलाफ शनिवार की आधी रात बाद तीन मुकदमे दर्ज किए गए। कैंट थाना प्रभारी ने बताया कि मेराज के अलावा शस्त्रधारक दिलशाद अहमद, परवेज और वसीम अहमद द्वारा नदेसर के पते पर शस्त्र लाइसेंस बनवाया गया है।
शस्त्र के संबंध में जांच की गई तो शस्त्रधारक द्वारा अपना मूल पता छिपाते हुए गलत पते का प्रयोग कर फर्जी दस्तावेज के आधार पर लाइसेंस बनवाना पाया गया। एसीएम चतुर्थ कार्यालय में जाकर देखा गया तो ज्ञात हुआ कि दिलशाद अहमद सहित सभी लोगों ने अपने शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण में थाने की मुहर का प्रयोग न करते हुए फर्जी मुहर का प्रयोग किया है।
पत्रावली में लगी थाने की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर भी सही नहीं है। यह सभी आपराधिक प्रवित्ति के हैं और विभिन्न माफिया गिरोहों से इनके करीबी संबंध हैं। इसलिए मेराज सहित चारों के खिलाफ कैंट थाने में तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए।