ठेकेदार आत्महत्या : तीन बार गिराई रिवॉल्वर पर, एक बार भी नहीं निकली गोली, सीन क्रिएशन से उलझी पुलिस
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पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर अंबिका सिंह के कार्यालय में ठेकेदार अवधेश चंद्र श्रीवास्तव की रिवाल्वर फर्श पर गिरी तो उसके चेंबर से कारतूस बाहर कैसे निकले...? इसकी गुत्थी उलझ गई है। शुक्रवार को रामनगर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों की मौजूदगी में रिवाल्वर को दो-तीन बार खड़े होकर और कुर्सी पर बैठ कर गिराया गया, लेकिन उसके चेंबर से कारतूस बाहर नहीं निकले। इसे लेकर पुलिस पशोपेश में पड़ गई है कि आखिरकार अवधेश की रिवाल्वर के कारतूस फर्श पर कैसे गिरे पड़े थे।
वहीं, चीफ इंजीनियर अंबिका सिंह के शहर से बाहर होने के कारण अवधेश के मौत के दृश्य का नाट्य रूपांतरण नहीं किया जा सका। इस दौरान कार्यालय के चपरासी गुड्डू वर्मा और ठेकेदारों से वैज्ञानिकों ने वारदात के संबंध में जानकारी ली और फिर वापस लौट गए।
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तय किया गया है कि जब अंबिका सिंह शहर में मौजूद रहेंगे तो रामनगर और लखनऊ विधि विज्ञान प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों को बुलाकर अवधेश की मौत के दृश्य का नाट्य रूपांतरण कराया जाएगा।
अवधेश की मौत की गुत्थी को सुलझाने के लिए दोपहर दो बजे के लगभग रामनगर विधि विज्ञान प्रयोगशाला के डिप्टी डायरेक्टर बृजेश कुमार राय, साइंटिफिक आफिसर संजय खरे और अन्य के साथ सीओ कैंट चीफ इंजीनियर के कार्यालय पहुंचे। इस संबंध में सीओ कैंट डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर के न होने की वजह से क्राइम सीन को रिक्रिएट नहीं किया जा सका। जल्द ही दोबारा वैज्ञानिकों की टीम आएगी और क्राइम सीन रिक्रिएट किया जाएगा।
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कैंट पुलिस से विवेचना सौंपी गई क्राइम ब्रांच को :
ठेकेदार अवधेश की आत्महत्या से संबंधित मुकदमे की विवेचना कैंट थाने की पुलिस से क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि विवेचना में सामने आए तथ्यों और साक्ष्य के आधार पर क्राइम ब्रांच आगे की कार्रवाई करेगी।