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पर्यावरण राज्यमंत्री के इलाके में ही वन विभाग का गोरखधंधा!
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Wed, 07 Jun 2017 05:11 PM IST
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क्षतिग्रस्त किए गए पेड़।
- फोटो : अमर उजाला
योगी सरकार भले ही भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश बनाने का दावा करती हो लेकिन बीते तीन महीने में इस दावे का कोई असर नहीं हो पा रहा है। बलिया की प्रांतीय सीमाओं पर होने वाली तस्करी जहां बदस्तूर जारी है, वहीं पर्यावरण एवं वन राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी के इलाके में भी वन विभाग का गोरखधंधा बदस्तूर जारी है।
बिहार से आने वाले वन उपजों को रोकने के बजाए इसे काली कमाई का जरिया बना लिया गया है। इसमें स्थानीय पुलिस की जहां मौन सहमति होती है, वहीं वाणिज्य कर विभाग के अफसर भी चुप्पी साधे रहते हैं।
बलिया के कई थानों सिकंदरपुर, उभांव, बैरिया, नरहीं, बलिया कोतवाली, हल्दी, दुबहड़, दोकटी आदि की सीमाएं बिहार की सीमा से सटती हैं। यहां बैरिया व नरहीं क्षेत्र तस्करों के लिए मुफीद बना हुआ है। खासकर नरहीं थाना के भरौली गंगा पुल का रास्ता तो तस्करी के लिए कुख्यात है।
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यहां से वन उपजों की तस्करी तो नासूर बन चुकी है। बताया जाता है कि वन उपजों को रोकने व अभिवहन शुल्क वसूली के लिए वन विभाग की ओर से स्थापित चेकपोस्ट को वर्ष 2014 में तब हटा लिया गया जब पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित हो गया। लेकिन इसके बाद छोटे वाहनों से वन उपजों की तस्करी शुरु हो गई और वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इन्हें रोकने के बजाए इसे काली कमाई का जरिया बना लिया।
आलम यह है कि रोजाना छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि बिहार से लाया जाता है और वन विभाग के अधिकारी इसे रोकने बजाए अपनी ‘कृपा’ बरसाते हैं। ऐसा नहीं है इसकी जानकारी पुलिस व वाणिज्य कर विभाग को नहीं होती है। लेकिन ‘लक्ष्मी’ के सामने यह भी बेबस हैं।
आलम यह है कि शाम ढलते ही भरौली का गंगा पुल गुलजार हो जाता है और भोर तक यह धंधा धड़ल्ले से चलता है। मामले में बलिया एडीएम मनोज सिंघल ने कहा कि सरकार की स्पष्ट मंशा है कि अवैध कारोबारों पर अंकुश लगाया जाए। प्रांतीय सीमाओं पर हो रही टैक्स चोरी के मामले की जांच के लिए टीम बनाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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बिहार से आने वाले वन उपजों को रोकने के बजाए इसे काली कमाई का जरिया बना लिया गया है। इसमें स्थानीय पुलिस की जहां मौन सहमति होती है, वहीं वाणिज्य कर विभाग के अफसर भी चुप्पी साधे रहते हैं।
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बलिया के कई थानों सिकंदरपुर, उभांव, बैरिया, नरहीं, बलिया कोतवाली, हल्दी, दुबहड़, दोकटी आदि की सीमाएं बिहार की सीमा से सटती हैं। यहां बैरिया व नरहीं क्षेत्र तस्करों के लिए मुफीद बना हुआ है। खासकर नरहीं थाना के भरौली गंगा पुल का रास्ता तो तस्करी के लिए कुख्यात है।
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यहां से वन उपजों की तस्करी तो नासूर बन चुकी है। बताया जाता है कि वन उपजों को रोकने व अभिवहन शुल्क वसूली के लिए वन विभाग की ओर से स्थापित चेकपोस्ट को वर्ष 2014 में तब हटा लिया गया जब पुल पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित हो गया। लेकिन इसके बाद छोटे वाहनों से वन उपजों की तस्करी शुरु हो गई और वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी इन्हें रोकने के बजाए इसे काली कमाई का जरिया बना लिया।
आलम यह है कि रोजाना छोटे वाहनों से लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि बिहार से लाया जाता है और वन विभाग के अधिकारी इसे रोकने बजाए अपनी ‘कृपा’ बरसाते हैं। ऐसा नहीं है इसकी जानकारी पुलिस व वाणिज्य कर विभाग को नहीं होती है। लेकिन ‘लक्ष्मी’ के सामने यह भी बेबस हैं।
आलम यह है कि शाम ढलते ही भरौली का गंगा पुल गुलजार हो जाता है और भोर तक यह धंधा धड़ल्ले से चलता है। मामले में बलिया एडीएम मनोज सिंघल ने कहा कि सरकार की स्पष्ट मंशा है कि अवैध कारोबारों पर अंकुश लगाया जाए। प्रांतीय सीमाओं पर हो रही टैक्स चोरी के मामले की जांच के लिए टीम बनाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।