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वाराणसी की रेकी कर बैंकाक के रास्ते अमेरिका चला जाता जावेद
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 27 Oct 2015 02:14 AM IST
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सोनौली बार्डर (गोरखपुर) पर पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक जावेद कमाल आतंकी है या आईएसआई का एजेंट, फिलहाल तय नहीं, मगर आईबी, वाराणसी एटीएस और आर्मी इंटेलीजेंस की संयुक्त जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि शुरुआती जानकारी में उसके वाराणसी पहुंचकर कुछ खास जगहों की रेकी करके तेरह नवंबर को बैंकॉक लौटने की योजना पता चली है।
बैंकाक से उसे अमेरिका जाने की भी योजना थी। इसके लिए उसने अमेरिका के कुछ लोगों से संपर्क भी किया था। वह पैसे जुटा रहा था। पूछताछ में उसने बताया कि बनारस में उसे कृषि वैज्ञानिक डॉ. शिशिर से मिलना था। मगर पता चला कि शिशिर नाम का बनारस में कोई कृषि वैज्ञानिक नहीं है।
वह काशी की रेकी क्यों करना चाहता था और उसके इरादे क्या थे, इसे लेकर खुफिया एजेंसियां अब भी उलझी हुई हैं। अदालत से उसे दस दिन के रिमांड पर लेने की तैयारी है। पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते काशी के आतंकी संगठनों के निशाने पर रहने के इनपुट पूर्व में भी मिले हैं।
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जांच एजेंसियों की मानें तो जावेद कमाल के पास से तीन पासपोर्ट बरामद हुए हैं। इसमें से दो की वैद्यता समाप्त हो चुकी है जबकि एक 2018 तक वैध है। टूरिस्ट वीजा लेकर वह पाकिस्तान से बैंकाक और फिर नेपाल पहुंचा था। भारतीय होटलों में ठहरने या लोगों से घुलने-मिलने में मदद के लिए उसे फर्जी आईडी भी उपलब्ध कराई गई थी।
उसके पास से 46 हजार थाई मुद्रा (भाट) और पांच सौ नेपाली मुद्रा बरामद की गई है। उसने यह भी बताया कि तुर्की में एक कांफ्रेंस के दौरान उसकी शिशिर से मुलाकात हुई थी। उसने वाराणसी के अन्य किसी भी व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं बताया।
चूंकि जांच में बता चला कि बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. राजेश सिंह पिछले दिनों तुर्की गए थे, इसलिए एटीएस ने उनसे भी पूछताछ की। उन्होंने तुर्की में ऐसे किसी भी शख्स मिलने या उसके बारे में जानकारी से इनकार किया है।
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बैंकाक से उसे अमेरिका जाने की भी योजना थी। इसके लिए उसने अमेरिका के कुछ लोगों से संपर्क भी किया था। वह पैसे जुटा रहा था। पूछताछ में उसने बताया कि बनारस में उसे कृषि वैज्ञानिक डॉ. शिशिर से मिलना था। मगर पता चला कि शिशिर नाम का बनारस में कोई कृषि वैज्ञानिक नहीं है।
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वह काशी की रेकी क्यों करना चाहता था और उसके इरादे क्या थे, इसे लेकर खुफिया एजेंसियां अब भी उलझी हुई हैं। अदालत से उसे दस दिन के रिमांड पर लेने की तैयारी है। पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते काशी के आतंकी संगठनों के निशाने पर रहने के इनपुट पूर्व में भी मिले हैं।
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जांच एजेंसियों की मानें तो जावेद कमाल के पास से तीन पासपोर्ट बरामद हुए हैं। इसमें से दो की वैद्यता समाप्त हो चुकी है जबकि एक 2018 तक वैध है। टूरिस्ट वीजा लेकर वह पाकिस्तान से बैंकाक और फिर नेपाल पहुंचा था। भारतीय होटलों में ठहरने या लोगों से घुलने-मिलने में मदद के लिए उसे फर्जी आईडी भी उपलब्ध कराई गई थी।
उसके पास से 46 हजार थाई मुद्रा (भाट) और पांच सौ नेपाली मुद्रा बरामद की गई है। उसने यह भी बताया कि तुर्की में एक कांफ्रेंस के दौरान उसकी शिशिर से मुलाकात हुई थी। उसने वाराणसी के अन्य किसी भी व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं बताया।
चूंकि जांच में बता चला कि बीएचयू के प्रोफेसर डॉ. राजेश सिंह पिछले दिनों तुर्की गए थे, इसलिए एटीएस ने उनसे भी पूछताछ की। उन्होंने तुर्की में ऐसे किसी भी शख्स मिलने या उसके बारे में जानकारी से इनकार किया है।