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तीन दशक का विवाद तीन घंटे में हल
संवाददाता/अमर उजाला वाराणसी
Updated Mon, 18 Jan 2016 01:56 AM IST
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लोहता। कल तक दो समुदायों के बीच तनाव और विवादों के लिए सुर्खियों में रहने वाला लोहता का हरपालपुर अब सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल बन गया है। यहां मंदिर की बाउंड्री और ताजिये के रास्ते को लेकर तीन दशक से चला आ रहा विवाद रविवार को महज तीन घंटे में सुलझ गया। आपसी खींचतान के बीच विवाद के निबटारे के लिए दोनों पक्षों के लोग पिछले हफ्ते जिला प्रशासन के अफसरों से मिले थे।
एसपी ग्रामीण डॉ. एसपी सिंह की मौजूदगी में तय हुआ कि मंदिर के तीन तरफ बाउंड्री होगी और वहीं ताजिये का रास्ता अलग चिह्नित होगा। इस पर दोनों पक्षों ने सहमति जताने के साथ भविष्य में इस मसले पर किसी तरह का गतिरोध न होने देने का भरोसा भी दिलाया। हर साल ताजिया उठने से पहले ही हरपालपुर को संवेदनशील चिह्नित कर प्रशासन उसकी निगरानी में जुट जाता था।
शांति व्यवस्था के लिए करीब 15 दिनों तक यहां फोर्स तैनात करनी पड़ती थी। पिछले मोहर्रम में भी ऐसा ही हुआ था। वजह, यहां दोनों पक्षों के बीच ताजिये के रास्ते को लेकर चला आ रहा गतिरोध था। मुस्लिम समुदाय के लोग शिव मंदिर के सामने की जगह को जुलूस का रास्ता बताते थे जबकि हिंदुओं का कहना था कि ताजिया मंदिर की जमीन से होकर ले जाया जाता है। इसे लेकर अक्सर गांव में दोनों पक्षों के बीच तनातनी की नौबत आ जा रही थी।
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हफ्ते भर पहले दोनों पक्षों ने जिला प्रशासन के अलावा एसपी ग्रामीण डॉ. एसपी सिंह के समक्ष अपना-अपना पक्ष रखा था। रविवार को सीओ सदर रामसेवक और एसओ लोहता गोपाल गुप्ता के साथ एसपी ग्रामीण हरपालपुर पहुंचे। शिव मंदिर के पास ही दोनों पक्षों को बुलाया। दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक बैठक चली। दोनों पक्षों की सहमति से तय हुआ कि मंदिर के तीनों तरफ बाउंड्री कराई जाएगी।
बाउंड्री के बाहर ताजिये का रास्ता भी चिह्नित किया गया। मौके पर ही इसका नक्शा भी बनाया गया। मंदिर समिति के लोग ही मंदिर की बाउंड्री कराएंगे। सोमवार से बाउंड्री का काम शुरू हो जाएगा। बैठक में ग्राम प्रधान हाजी असलम, हैदर महतो, अकबर महतो, मो. इकबाल, लल्लन सिंह, शिवप्रसाद सिंह आदि मौजूद थे।
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एसपी ग्रामीण डॉ. एसपी सिंह की मौजूदगी में तय हुआ कि मंदिर के तीन तरफ बाउंड्री होगी और वहीं ताजिये का रास्ता अलग चिह्नित होगा। इस पर दोनों पक्षों ने सहमति जताने के साथ भविष्य में इस मसले पर किसी तरह का गतिरोध न होने देने का भरोसा भी दिलाया। हर साल ताजिया उठने से पहले ही हरपालपुर को संवेदनशील चिह्नित कर प्रशासन उसकी निगरानी में जुट जाता था।
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शांति व्यवस्था के लिए करीब 15 दिनों तक यहां फोर्स तैनात करनी पड़ती थी। पिछले मोहर्रम में भी ऐसा ही हुआ था। वजह, यहां दोनों पक्षों के बीच ताजिये के रास्ते को लेकर चला आ रहा गतिरोध था। मुस्लिम समुदाय के लोग शिव मंदिर के सामने की जगह को जुलूस का रास्ता बताते थे जबकि हिंदुओं का कहना था कि ताजिया मंदिर की जमीन से होकर ले जाया जाता है। इसे लेकर अक्सर गांव में दोनों पक्षों के बीच तनातनी की नौबत आ जा रही थी।
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हफ्ते भर पहले दोनों पक्षों ने जिला प्रशासन के अलावा एसपी ग्रामीण डॉ. एसपी सिंह के समक्ष अपना-अपना पक्ष रखा था। रविवार को सीओ सदर रामसेवक और एसओ लोहता गोपाल गुप्ता के साथ एसपी ग्रामीण हरपालपुर पहुंचे। शिव मंदिर के पास ही दोनों पक्षों को बुलाया। दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक बैठक चली। दोनों पक्षों की सहमति से तय हुआ कि मंदिर के तीनों तरफ बाउंड्री कराई जाएगी।
बाउंड्री के बाहर ताजिये का रास्ता भी चिह्नित किया गया। मौके पर ही इसका नक्शा भी बनाया गया। मंदिर समिति के लोग ही मंदिर की बाउंड्री कराएंगे। सोमवार से बाउंड्री का काम शुरू हो जाएगा। बैठक में ग्राम प्रधान हाजी असलम, हैदर महतो, अकबर महतो, मो. इकबाल, लल्लन सिंह, शिवप्रसाद सिंह आदि मौजूद थे।