डाक खातों में डाका : एजेंट और कर्मचारियों की मिलीभगत से रकम गायब करने का खेल काउंटर पर होता है
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वाराणसी के कैंट प्रधान डाकघर से सैकड़ों खातों से गायब हुई रकम पांच करोड़ से ऊपर पहुंच गई है। तो वहीं इस मामले की जांच एसआईटी को सौंपी जा सकती है। वहीं करोड़ों की रकम का गायब होना कर्मचारियों और एजेंटों की मिलभगत होना बताया जा रहा है।
विभाग में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करोड़ों की रकम कर्मचारी के मिलीभगत के बिना गायब नहीं की जा सकती है। पैसे गायब करने का खेल काउंटर पर ही होता है। साथ ही बताया कि डाक घर में पैसा जमा करने के बाद लोग जल्दी चेक नहीं करते हैं। इसी का फायदा उठाकर कर्मचारियों और एजेंटों ने उठाया है, जिससे करोड़ों रुपये गायब हुए हैं।
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खाताधराकों के खातों से पैसे निकालने का ये खेल सालों से चलता आ रहा है। साथ ही यह भी बताया कि रकम गायब कराने के सबसे खिलाड़ी काउंटर के बाबू ही होते हैं। इसी कारण खातों से पैसा कब गायब हो गया, खाताधारकों को इसकी भनक तक भी नहीं लग पाती थी। खास बात यह कि ग्राहकों की पासबुक को प्रिंटर से अपडेट नहीं किया जाता था। वैसे खातों से पैसे निकालने में एजेंटों की भी सक्रिय भूमिका मानी जा रही है।
प्रधान डाकघर के खातों से करोड़ों रुपये गायब होने का मामला जब से प्रकाश में आया है, तब से डाक विभाग के अफसर सकते में हैं। विभागीय कार्रवाई के साथ दर्जनों तहरीर पर पुलिस इसकी जांच में लगी है। सभी यह जानने में लगे हैं कि खातों से करोड़ों रुपये गायब करने का खेल कैसे हुआ और कौन-कौन इसमें शामिल है? सूत्रों की माने तो काउंटर के निलंबित हुए बाबुओं की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है।
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