{"_id":"5c9e7c54bdec22140e107e99","slug":"91553890388-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानव की व्यथा दूर करती है रामकथा - गंगा सागर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानव की व्यथा दूर करती है रामकथा - गंगा सागर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। रामकथा को सुनकर जीवन में उतारने वाले का लोक और परलोक दोनों संवरता है। राम कथा मानव की हर व्यथा को दूर कर देती है। यह विचार शुक्रवार को टाउनहाल मैदान में अखिल भारतीय मानस प्रचार समिति की ओर से आयोजित दस दिवसीय मानस नवाह्न पारायण और राम कथा के पांचवें दिन पं. गंगासागर पांडेय ने दिए।
उन्होंने कहा जहां संपत्ति के लिए भाई को लात मारा जाता है, वहां रावणत्व है और जहां भाई के लिए राज्य को ठोकर मारा जाय वहां रामत्व है।
मऊ से पधारे कथावाचक रितेश रामायणी ने कहा कि व्यक्ति के जीवन के अंत में मृत्यु तब सामने दिखायी देती है जब उसे अपना किया गया सारा कर्म दिखायी देता है। जैसे दशरथ का जब प्राणांत हो रहा था तो ज्ञानमयी कौशल्या ने दशरथ से पूछा आप इतना अधीर क्यों हो रहे हैं। कथा का संचालन विश्वकांताचार्य ने किया। इससे पूर्व प्रात: महंत बालक दास के आचार्यत्व में भूदेवों ने मानस नवाह्न पारायण का संगीतमय पाठ किया।
कलश यात्रा के साथ 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ
वाराणसी। गायत्री महिला मंडल नगवां के तत्वाधान में तीन दिवसीय 24 कुंडी गायत्री महायज्ञ और पुस्तक प्रदर्शनी का शुक्रवार को भव्य कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। क लश यात्रा गायत्री शक्तिपीठ नगवां से निकल कर अस्सी घाट, अस्सी चौराहा होते हुए छोटानागपुर वाटिका पहुंची, जहां पर कलश स्थापना की गई। समारोह स्थल पर बने मंच पर माता गायत्री भारत माता और रानी लक्ष्मीबाई का रूप धारण किए अन्याय सभी के आकर्षण का केंद्र थी।इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन
सुरगंगा में गज़ल और कव्वाली की प्रस्तुति पर झूमे श्रोता
- भैंसासुर घाट पर चल रहा सुरगंगा का कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। राजघाट पर चल रहे सुर गंगा संगीत महोत्सव में शुक्रवार को गजल और कव्वाली की प्रस्तुति हुई, जिससे श्रोता झूम उठे।
गंगा पूजन के बाद पंडित देवाशीष डे के शिष्य योगेश मिश्रा ने राग जोग कौंस में छोटा ख्याल पेश किया, जिसके बोल थे जिया नहीं माने.... इसके बाद उन्होंने भजन जो तू मिटाना चाहे जीवन की तृष्णा प्रस्तुत किया। फिर कलाकार ने गजल की प्रस्तुति दी, जिससे श्रोता आनंदित हुए। प्रशांत साहनी ने एकल तबला वादन प्रस्तुत किया। उन्होंने तीन ताल में टुकड़ा उठान रेला और तिहाई इत्यादि वादन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद सरफराज हाशमी, इमरान हाशमी व शाहनवाज हाशमी ने राग देश एवं राग जौनपुरी में कव्वाली की प्रस्तुति दी। जिसके बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।
अस्सी घाट पर आयोजित घाट संध्या में शुक्रवार को कथक की प्रस्तुति हुई इसमें मुबई की कलाकार साक्षी मिश्रा व स्वस्ति झा ने गणेश वंदना, पारम्परिक कथक, तराना, ठुमरी, शिव वंदना की प्रस्तुति दी। समापन शिव तांडव से किया। इस मौके पर प्रमाण पत्र निर्मल रतनलाल वैद्य व रघु हस्सान ने दिया। संचालन देवेन्द्र मिश्र ने किया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा जहां संपत्ति के लिए भाई को लात मारा जाता है, वहां रावणत्व है और जहां भाई के लिए राज्य को ठोकर मारा जाय वहां रामत्व है।
मऊ से पधारे कथावाचक रितेश रामायणी ने कहा कि व्यक्ति के जीवन के अंत में मृत्यु तब सामने दिखायी देती है जब उसे अपना किया गया सारा कर्म दिखायी देता है। जैसे दशरथ का जब प्राणांत हो रहा था तो ज्ञानमयी कौशल्या ने दशरथ से पूछा आप इतना अधीर क्यों हो रहे हैं। कथा का संचालन विश्वकांताचार्य ने किया। इससे पूर्व प्रात: महंत बालक दास के आचार्यत्व में भूदेवों ने मानस नवाह्न पारायण का संगीतमय पाठ किया।
विज्ञापन
कलश यात्रा के साथ 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ
वाराणसी। गायत्री महिला मंडल नगवां के तत्वाधान में तीन दिवसीय 24 कुंडी गायत्री महायज्ञ और पुस्तक प्रदर्शनी का शुक्रवार को भव्य कलश यात्रा के साथ शुभारंभ हुआ। क लश यात्रा गायत्री शक्तिपीठ नगवां से निकल कर अस्सी घाट, अस्सी चौराहा होते हुए छोटानागपुर वाटिका पहुंची, जहां पर कलश स्थापना की गई। समारोह स्थल पर बने मंच पर माता गायत्री भारत माता और रानी लक्ष्मीबाई का रूप धारण किए अन्याय सभी के आकर्षण का केंद्र थी।इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
विज्ञापन
सुरगंगा में गज़ल और कव्वाली की प्रस्तुति पर झूमे श्रोता
- भैंसासुर घाट पर चल रहा सुरगंगा का कार्यक्रम
अमर उजाला ब्यूरो
वाराणसी। राजघाट पर चल रहे सुर गंगा संगीत महोत्सव में शुक्रवार को गजल और कव्वाली की प्रस्तुति हुई, जिससे श्रोता झूम उठे।
गंगा पूजन के बाद पंडित देवाशीष डे के शिष्य योगेश मिश्रा ने राग जोग कौंस में छोटा ख्याल पेश किया, जिसके बोल थे जिया नहीं माने.... इसके बाद उन्होंने भजन जो तू मिटाना चाहे जीवन की तृष्णा प्रस्तुत किया। फिर कलाकार ने गजल की प्रस्तुति दी, जिससे श्रोता आनंदित हुए। प्रशांत साहनी ने एकल तबला वादन प्रस्तुत किया। उन्होंने तीन ताल में टुकड़ा उठान रेला और तिहाई इत्यादि वादन से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद सरफराज हाशमी, इमरान हाशमी व शाहनवाज हाशमी ने राग देश एवं राग जौनपुरी में कव्वाली की प्रस्तुति दी। जिसके बाद कार्यक्रम का समापन हुआ।
अस्सी घाट पर आयोजित घाट संध्या में शुक्रवार को कथक की प्रस्तुति हुई इसमें मुबई की कलाकार साक्षी मिश्रा व स्वस्ति झा ने गणेश वंदना, पारम्परिक कथक, तराना, ठुमरी, शिव वंदना की प्रस्तुति दी। समापन शिव तांडव से किया। इस मौके पर प्रमाण पत्र निर्मल रतनलाल वैद्य व रघु हस्सान ने दिया। संचालन देवेन्द्र मिश्र ने किया।