{"_id":"5c9d29cdbdec2214435fbf6d","slug":"41553803725-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नाटक के क्षेत्र में हर पल बदलती हैं चुनौतियां","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
नाटक के क्षेत्र में हर पल बदलती हैं चुनौतियां
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वाराणसी। नाटक के क्षेत्र में प्रतिपल चुनौतियां बदलती हैं और उन चुनौतियों के समाधान भी बदलते हैं। यह दौर वर्चुअल रियलिटी का है। नाटक से रंगकर्मी और दर्शकों को जोड़े रखने के लिए वर्चुअल रियलिटी की बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका है। जहां तक लाभ अथवा हानि का प्रश्न है तो एक परिस्थिति में जो लाभकारी है दूसरी परिस्थिति में वही हानिकारक भी होता है। उक्त विचार अहमदाबाद के वयोवृद्ध रंगकर्मी राजेंद्र भगत ने व्यक्त किए। वह गुरुवार को सेतु सांस्कृतिक केंद्र की ओर से आयोजित 16वें राष्ट्रीय नाट्य आंदोलन के दूसरे दिन आयोजित नाट्य गोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
नाटक और सोशल मीडिया विषय पर मंथन के दौरान अध्यक्षता करते हुए डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि नाटक हमारे भीतर की आवश्यकता है जो यथार्थ से जुड़ी है। कलाकार और दर्शक दोनों यथार्थ में एक दूसरे के सामने होते हैं। ऐसा किसी अन्य विधा में नहीं होता है। संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित इलाहाबाद के अनिल रंजन भौमिक ने कहा कि देश में एक बड़ी साजिश के तहत नुक्कड़ नाट्य आंदोलन का गला घाेंट दिया गया।
वक्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि नाटकों के लिए सोशल मीडिया संजीवनी भी है और जहर भी। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका इस्तेमाल किस रूप में कर रहे हैं। विजय प्रकाश ने स्वागत, प्रतिमा सिन्हा ने संचालन और सलीम राजा ने धन्यवाद दिया। इस अवसर पर बलवंत कुमार, कुमार बर्मन, राजलक्ष्मी मिश्रा, प्रियंका मेहरोत्रा, पंखुरी सिन्हा, संघर्ष मौर्या, आशुतोष आदि ने विचार व्यक्त किए।
विज्ञापन
विज्ञापन
नाटक और सोशल मीडिया विषय पर मंथन के दौरान अध्यक्षता करते हुए डॉ. जितेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि नाटक हमारे भीतर की आवश्यकता है जो यथार्थ से जुड़ी है। कलाकार और दर्शक दोनों यथार्थ में एक दूसरे के सामने होते हैं। ऐसा किसी अन्य विधा में नहीं होता है। संगीत नाटक अकादमी से सम्मानित इलाहाबाद के अनिल रंजन भौमिक ने कहा कि देश में एक बड़ी साजिश के तहत नुक्कड़ नाट्य आंदोलन का गला घाेंट दिया गया।
विज्ञापन
वक्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि नाटकों के लिए सोशल मीडिया संजीवनी भी है और जहर भी। यह हम पर निर्भर करता है कि हम इसका इस्तेमाल किस रूप में कर रहे हैं। विजय प्रकाश ने स्वागत, प्रतिमा सिन्हा ने संचालन और सलीम राजा ने धन्यवाद दिया। इस अवसर पर बलवंत कुमार, कुमार बर्मन, राजलक्ष्मी मिश्रा, प्रियंका मेहरोत्रा, पंखुरी सिन्हा, संघर्ष मौर्या, आशुतोष आदि ने विचार व्यक्त किए।
विज्ञापन