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कोर्ट परिसर में आतंकी आरोपियों के साथ कौन थे चार लोग-COMPACT
Updated Sat, 07 Oct 2017 12:39 AM IST
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जौनपुर। श्रमजीवी एक्सप्रेस बम विस्फोट मामले में शुक्रवार को आतंकी आरोपी हिलाल उर्फ हिलालुद्दीन तथा नफीकुल विश्वास को जिला कारागार से कड़ी सुरक्षा के बीच लाकर एङीजे प्रथम एमपी सिंह की अदालत में पेश किया गया। पीठासीन अधिकारी के अवकाश पर रहने के कारण सुनवाई के लिए अगली तिथि 26 अक्तूबर मुकर्रर की गई है। कोर्ट में पेशी के दौरान दोनों आतंकी आरोपियों से मिलने आईं बुर्काधारी दो महिलाएं और दो युवकों की संदिग्ध गतिविधियां दीवानी न्यायालय परिसर में चर्चा रही। मिलने आए चारों लोगों को कोई रोकने टोकने वाला नहीं था और न ही उनके पास मौजूद बैग की जांच की गई। दोनों आरोपी आतंकियों के तार बांग्लादेश से जुड़े हैं।
28 जुलाई 2005 की शाम करीब सवा पांच बजे पटना से दिल्ली जा रही श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन की साधारण बोगी में हरपालगंज रेलवे स्टेशन के हरिहरपुर रेलवे क्रासिंग पर बम धमाका हुआ था। इसमें 12 यात्रियों की मौत हो गई थी और 14 गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मामले में दोनों आतंकी आरोपियों हिलाल उर्फ हिलालुद्दीन तथा नफीकुल विश्वास को शुक्रवार को पेश किया गया। इनके साथ बुर्का पहने दो महिलाएं एवं दो युवक कोर्ट में पेशी से लेकर दीवानी न्यायालय परिसर में पूरे समय मौजूद रहे। इनकी संदिग्ध गतिविधियों की जांच करने के लिए वहां कोई सक्षम अधिकारी मौजूद नहीं था। ये चारों न तो इस मामले में गवाह हैं और न ही कोर्ट ने उन्हें तलब किया था।
गौरतलब है कि इससे पहले आतंकी आरोपियों की पेशी के दौरान कोर्ट परिसर में सीओ से लेकर इंस्पेक्टर और खुफिया विभाग के लोगों की ड्यूटी लगती थी लेकिन शुक्रवार को किसी का पता नहीं था। संदिग्ध युवकों के हाथों में जो बैग थे उसकी जांच नहीं किया जाना सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहा है। वैसे इसी मामले में आतंकी आरोपी मोहम्मद आलम गीर उर्फ रोनी और ओबैर्दुरहमान उर्फ बाबू भाई को कोर्ट पहले ही दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुना चुकी है। एडीजीसी क्रिमिनल विजय यादव का कहना है कि दो महिलाएं एवं दो संदिग्ध युवक कोर्ट परिसर में देखे गए थे। उनके हाथों में बैग थे और गतिविधियां संदिग्ध थी। यह न तो इस मामले में गवाह थे न ही उन्हें कोर्ट में तलब किया गया था। एसपी केके चौधरी ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। इस संबंध में किसी ने कोई सूचना भी नहीं दी है। पुलिस अधीक्षक केके चौधरी ने बताया कि इस संबंध में उनको किसी ने कोई सूचना नहीं दी है।
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28 जुलाई 2005 की शाम करीब सवा पांच बजे पटना से दिल्ली जा रही श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन की साधारण बोगी में हरपालगंज रेलवे स्टेशन के हरिहरपुर रेलवे क्रासिंग पर बम धमाका हुआ था। इसमें 12 यात्रियों की मौत हो गई थी और 14 गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मामले में दोनों आतंकी आरोपियों हिलाल उर्फ हिलालुद्दीन तथा नफीकुल विश्वास को शुक्रवार को पेश किया गया। इनके साथ बुर्का पहने दो महिलाएं एवं दो युवक कोर्ट में पेशी से लेकर दीवानी न्यायालय परिसर में पूरे समय मौजूद रहे। इनकी संदिग्ध गतिविधियों की जांच करने के लिए वहां कोई सक्षम अधिकारी मौजूद नहीं था। ये चारों न तो इस मामले में गवाह हैं और न ही कोर्ट ने उन्हें तलब किया था।
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गौरतलब है कि इससे पहले आतंकी आरोपियों की पेशी के दौरान कोर्ट परिसर में सीओ से लेकर इंस्पेक्टर और खुफिया विभाग के लोगों की ड्यूटी लगती थी लेकिन शुक्रवार को किसी का पता नहीं था। संदिग्ध युवकों के हाथों में जो बैग थे उसकी जांच नहीं किया जाना सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहा है। वैसे इसी मामले में आतंकी आरोपी मोहम्मद आलम गीर उर्फ रोनी और ओबैर्दुरहमान उर्फ बाबू भाई को कोर्ट पहले ही दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुना चुकी है। एडीजीसी क्रिमिनल विजय यादव का कहना है कि दो महिलाएं एवं दो संदिग्ध युवक कोर्ट परिसर में देखे गए थे। उनके हाथों में बैग थे और गतिविधियां संदिग्ध थी। यह न तो इस मामले में गवाह थे न ही उन्हें कोर्ट में तलब किया गया था। एसपी केके चौधरी ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। इस संबंध में किसी ने कोई सूचना भी नहीं दी है। पुलिस अधीक्षक केके चौधरी ने बताया कि इस संबंध में उनको किसी ने कोई सूचना नहीं दी है।
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