{"_id":"595d2e424f1c1b216f8b461f","slug":"161499278914-varanasi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"फरमान के बाद भी नहीं रुक कर खनन","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
फरमान के बाद भी नहीं रुक कर खनन
Updated Wed, 05 Jul 2017 11:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जयप्रकाश नगर। ओवर लोड, अवैध खनन और अवैध वसूली करने वाले विभागों के प्रति चाहे प्रदेश सरकार कोई भी नियम व कानून बना लें। लेकिन अवैध खनन करने वाले आदत से बाज नहीं आ रहे है।
बैरिया तहसील क्षेत्र के भौगोलिक स्थिति के अनुसार जिले के पूर्वी छोर पर प्रदेश की अंतिम सीमा है। जहां वन विभाग, पुलिस विभाग, जिला पंचायत, मंडी समिति आदि विभागों की चौकिया स्थापित है। इसके सटे सीमा से बिहार राज्य शुरू हो जाता है। वर्षो से बिहार राज्य के कई जगहों से उत्तर प्रदेश में लाल बालू आता रहा है। भाजपा सरकार ने इस लाल बालू को नियमानुसार लाने की कवायद चालू की। ताकि प्रदेश सरकार को राजस्व का फायदा हो सकें। लेकिन राजस्व को तो फायदा नहीं हुआ। जबकि सीमा पर सभी विभागों के चौकियों पर तैनात कर्मचारियों का फायदा अवश्य हुआ।
नगरा क्षेत्र के देवढिय़ा निवासी ट्रक चालक राकेश सिंह की माने तो हम लोग वन विभाग की चौकी पर 1900 सौ रुपये के बजाय 500 रुपये देते है। जिसके बाद तैनात कर्मचारी पुरानी चालान पर ही नया दिनांक डालकर हमेें दे देते है। यही हाल पुलिस चौकी का है। जहां 500 रुपये लेकर हमारे कागजों की जांचकर कर ट्रकों को छोड़ दिया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बैरिया तहसील क्षेत्र के भौगोलिक स्थिति के अनुसार जिले के पूर्वी छोर पर प्रदेश की अंतिम सीमा है। जहां वन विभाग, पुलिस विभाग, जिला पंचायत, मंडी समिति आदि विभागों की चौकिया स्थापित है। इसके सटे सीमा से बिहार राज्य शुरू हो जाता है। वर्षो से बिहार राज्य के कई जगहों से उत्तर प्रदेश में लाल बालू आता रहा है। भाजपा सरकार ने इस लाल बालू को नियमानुसार लाने की कवायद चालू की। ताकि प्रदेश सरकार को राजस्व का फायदा हो सकें। लेकिन राजस्व को तो फायदा नहीं हुआ। जबकि सीमा पर सभी विभागों के चौकियों पर तैनात कर्मचारियों का फायदा अवश्य हुआ।
विज्ञापन
नगरा क्षेत्र के देवढिय़ा निवासी ट्रक चालक राकेश सिंह की माने तो हम लोग वन विभाग की चौकी पर 1900 सौ रुपये के बजाय 500 रुपये देते है। जिसके बाद तैनात कर्मचारी पुरानी चालान पर ही नया दिनांक डालकर हमेें दे देते है। यही हाल पुलिस चौकी का है। जहां 500 रुपये लेकर हमारे कागजों की जांचकर कर ट्रकों को छोड़ दिया जा रहा है।
विज्ञापन