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उपराष्ट्रपति चुनाव के नामांकन में सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर पर अडिग गिरफ्तार
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वाराणसी। पार्षद से लेकर राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ चुके अधिवक्ता नरेंद्र नाथ दुबे ‘अडिग’ को धोखाधड़ी सहित अन्य आरोपों में गिरफ्तार कर मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजीव कुमार की अदालत में पेश किया गया। नई दिल्ली के ईओडब्ल्यू के उपनिरीक्षक के आवेदन पर अडिग को ट्रांजिट रिमांड पर सौंप दिया गया। अडिग को 22 अगस्त तक नई दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया जाना है। बता दें कि अडिग वर्ष 1984 से अब तक पार्षद, एमएलए, एमएलसी, सांसद, उप राष्ट्रपति और राष्ट्रपति सभी पदों का चुनाव लड़ चुके हैं।
नई दिल्ली से आए उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार के अनुसार, 2012 में संपन्न हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में अडिग की ओर से 40 सांसदों का हस्ताक्षरयुक्त नामांकन पत्र दाखिल किया गया था। इनमें से 20 सांसदों को प्रस्तावक और 20 सांसदों को समर्थक बताया गया था। आंध्रप्रदेश की सांसद पूनम प्रभाकर ने नामांकन पत्र की जांच में अपना हस्ताक्षर होने से इनकार किया। इसके बाद जांच में अन्य सांसदों के हस्ताक्षर भी फर्जी पाए गए थे। प्रकरण को लेकर सांसद पूनम प्रभाकर ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
उपनिरीक्षक ने बताया कि कैंट पुलिस के सहयोग से अडिग को वरुणा पुल स्थित उनके आवास से सोमवार की शाम गिरफ्तार किया गया। उपनिरीक्षक ने अदालत को बताया कि आरोपी को रेल मार्ग से नई दिल्ली ले जाना है, ऐसे में ट्रांजिट रिमांड दिया जाए। रिमांड मंजूर करते हुए अदालत ने आरोपी को 22 अगस्त तक न्यायालय अवधि में पटियाला हाउस कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए।
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अंतरिम जमानत के लिए गुहार लगाई, नहीं मिली सफलता
आरोपी अडिग के अधिवक्ता होने के कारण यूपी बार काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह और सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवपूजन सिंह गौतम सहित अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सीजेएम से लेकर जिला जज की कोर्ट तक अंतरिम जमानत की गुहार लगाई। हालांकि अधिवक्ताओं की दलीलें और अनुरोध काम नहीं आया।
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नई दिल्ली से आए उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार के अनुसार, 2012 में संपन्न हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में अडिग की ओर से 40 सांसदों का हस्ताक्षरयुक्त नामांकन पत्र दाखिल किया गया था। इनमें से 20 सांसदों को प्रस्तावक और 20 सांसदों को समर्थक बताया गया था। आंध्रप्रदेश की सांसद पूनम प्रभाकर ने नामांकन पत्र की जांच में अपना हस्ताक्षर होने से इनकार किया। इसके बाद जांच में अन्य सांसदों के हस्ताक्षर भी फर्जी पाए गए थे। प्रकरण को लेकर सांसद पूनम प्रभाकर ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
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उपनिरीक्षक ने बताया कि कैंट पुलिस के सहयोग से अडिग को वरुणा पुल स्थित उनके आवास से सोमवार की शाम गिरफ्तार किया गया। उपनिरीक्षक ने अदालत को बताया कि आरोपी को रेल मार्ग से नई दिल्ली ले जाना है, ऐसे में ट्रांजिट रिमांड दिया जाए। रिमांड मंजूर करते हुए अदालत ने आरोपी को 22 अगस्त तक न्यायालय अवधि में पटियाला हाउस कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए।
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अंतरिम जमानत के लिए गुहार लगाई, नहीं मिली सफलता
आरोपी अडिग के अधिवक्ता होने के कारण यूपी बार काउंसिल के चेयरमैन हरिशंकर सिंह और सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष शिवपूजन सिंह गौतम सहित अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सीजेएम से लेकर जिला जज की कोर्ट तक अंतरिम जमानत की गुहार लगाई। हालांकि अधिवक्ताओं की दलीलें और अनुरोध काम नहीं आया।