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डॉ. रीना को छत से गिराया गया या खुद गिरी, बताएगी रिपोर्ट
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वाराणसी। टैगोर टाउन की डॉ. रीना सिंह अपने घर की छत से खुद नीचे गिरी थीं या उन्हें किसी ने गिराया था, इस राज से जल्द पर्दा उठेगा। बुधवार को लखनऊ और रामनगर की विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम ने मेडिकोलीगल एक्सपर्ट के साथ डॉ. रीना की मौत के दृश्य का एक पुतले के माध्यम से नाट्य रूपांतरण किया। एफएसएल टीम ने पुलिस से डॉ. रीना के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट और वीडियो रिकार्डिंग भी मांगी है। संभावना जताई गई है कि 15 दिन में विशेषज्ञों की टीम पुलिस को रिपोर्ट सौंप देगी। उधर, डॉ. आलोक का सुराग नहीं लग सका है और उनकी तलाश में पुलिस की छापेमारी जारी है।
कैंट थाना अंतर्गत टैगोर टाउन निवासी डॉ. आलोक सिंह की पत्नी डॉ. रीना की बीती दो जुलाई को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। उनके पिता रंगनाथ सिंह की तहरीर पर कैंट थाने में डॉ. आलोक और उनके मां-बाप के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। डॉ. गयासुद्दीन खान के नेतृत्व में आई लखनऊ और रामनगर एफएसएल की तीन सदस्यीय टीम ने बेंजामिन पाउडर की मदद से डॉ. रीना के घर के गेट के समीप जहां वह गिरी थी, वहां से उनके खून के सैंपल एकत्र किए। बेंजामिन पाउडर रामनगर की टीम द्वारा नहीं लाने पर लखनऊ की टीम ने नाराजगी जताई। इस दौरान डॉ. आलोक के घर के कचरे के ढेर में शराब की बोतलें भी मिलीं। एफएसएल टीम के निरीक्षण के दौरान रंगनाथ सिंह भी मौजूद थे।
उठाकर और लेटी हुई अवस्था में पुतला फेंका तो गिरा गेट के भीतर
एफएसएल की टीम ने डॉ. रीना की मौत के दृश्य के नाट्य रूपांतरण के लिए भूसा भर कर पुतला तैयार किया। इसके बाद डॉ. रीना के घर की छत की रेलिंग से पुतले को सीधा खड़ा कर नीचे गिराया तो वह गेट से टकराते हुए वहीं गिरा जहां डॉ. रीना दो जुलाई की सुबह गिरी पड़ी मिली थी। इसके बाद पुतले को लेटी हुई अवस्था में हाथ से उठा कर छत से नीचे गिराया गया, तब भी वह गेट से टकराते हुए भीतर ही गिरा। तीसरी बार पुतले को दौड़कर तेजी से छत से फेंका गया तो वह गेट के बाहर जा गिरा। हालांकि इससे डॉ. रीना की मौत के संबंध में क्या निष्कर्ष निकला, इस बारे में टीम ने कुछ भी बताने से साफ इंकार कर दिया।
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कैंट थाना अंतर्गत टैगोर टाउन निवासी डॉ. आलोक सिंह की पत्नी डॉ. रीना की बीती दो जुलाई को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। उनके पिता रंगनाथ सिंह की तहरीर पर कैंट थाने में डॉ. आलोक और उनके मां-बाप के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है। डॉ. गयासुद्दीन खान के नेतृत्व में आई लखनऊ और रामनगर एफएसएल की तीन सदस्यीय टीम ने बेंजामिन पाउडर की मदद से डॉ. रीना के घर के गेट के समीप जहां वह गिरी थी, वहां से उनके खून के सैंपल एकत्र किए। बेंजामिन पाउडर रामनगर की टीम द्वारा नहीं लाने पर लखनऊ की टीम ने नाराजगी जताई। इस दौरान डॉ. आलोक के घर के कचरे के ढेर में शराब की बोतलें भी मिलीं। एफएसएल टीम के निरीक्षण के दौरान रंगनाथ सिंह भी मौजूद थे।
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उठाकर और लेटी हुई अवस्था में पुतला फेंका तो गिरा गेट के भीतर
एफएसएल की टीम ने डॉ. रीना की मौत के दृश्य के नाट्य रूपांतरण के लिए भूसा भर कर पुतला तैयार किया। इसके बाद डॉ. रीना के घर की छत की रेलिंग से पुतले को सीधा खड़ा कर नीचे गिराया तो वह गेट से टकराते हुए वहीं गिरा जहां डॉ. रीना दो जुलाई की सुबह गिरी पड़ी मिली थी। इसके बाद पुतले को लेटी हुई अवस्था में हाथ से उठा कर छत से नीचे गिराया गया, तब भी वह गेट से टकराते हुए भीतर ही गिरा। तीसरी बार पुतले को दौड़कर तेजी से छत से फेंका गया तो वह गेट के बाहर जा गिरा। हालांकि इससे डॉ. रीना की मौत के संबंध में क्या निष्कर्ष निकला, इस बारे में टीम ने कुछ भी बताने से साफ इंकार कर दिया।
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