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परिवार ही मिट गया, ऐसा क्या हुआ ‘मुन्ना’ को
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वाराणसी/पिंडरा। परिवार का नामोनिशान ही मिट गया, आखिर मुन्ना को ऐसा क्या हो गया था...? रघुनाथपुर के कमला प्रसाद रुंधे गले से मंगलवार को बार-बार यही कहते रहे। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि उनके दोस्त वैज्ञानिक डॉ. श्रीप्रकाश सिंह पटेल उर्फ मुन्ना ने बच्चों और पत्नी की हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली। कमला खुद को आश्वस्त करना चाह रहे थे कि जिस श्रीप्रकाश के संबंध में समाचार प्रकाशित हुए, वह उनका दोस्त नहीं है। हालांकि कमला को मानना पड़ा कि अब उनका दोस्त और उसका परिवार इस दुनिया में नहीं है।
फूलपुर थाना अंतर्गत रघुनाथपुर की पटेल बस्ती के मूल निवासी श्रीप्रकाश के पिता राम प्रसाद उर्फ रामू पत्नी भगवानी देवी और पांच बच्चों के साथ 70 के दशक में गांव छोड़ कर बनारस में रहने लगे थे। साहूपुरी में फर्टिलाइजर कंपनी में इंजीनियर राम प्रसाद ने रघुनाथपुर छोड़ा तो फिर उनकी चार बेटियां और इकलौते बेटा श्रीप्रकाश यदाकदा ही गांव आए। इस वजह से श्रीप्रकाश के परिवार को गांव के ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं।
एक निजी स्कूल में गार्ड के तौर पर कार्यरत कमला ने बताया कि श्रीप्रकाश की पढ़ाई के दौरान वह उनसे मिलने बीएचयू जाया करते थे। श्रीप्रकाश पहले डालमिया हॉस्टल में और फिर भाभा हॉस्टल में रहे। कमला के अनुसार, उस समय वह अगरबत्ती बेचने बनारस जाया करते थे। बीएचयू में मुलाकात होने पर श्रीप्रकाश अपनी प्रेमिका के बारे में बताते थे और खाना खिलाए बगैर जाने नहीं देते थे। रात होने पर हॉस्टल में रोक लेते थे। वह पढ़ने में बहुत अच्छे, हंसमुख और संवेदनशील थे।
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‘हमारी दोस्ती कृष्ण और सुदामा जैसी थी’
कमला ने कहा- हमारी व श्रीप्रकाश की दोस्ती कृष्ण और सुदामा जैसी थी। आंखों से आंसू पोंछते हुए उन्होंने कहा कि श्रीप्रकाश अहमदाबाद में पत्नी के साथ रहते थे। वह किसी काम से अहमदाबाद गए तो श्रीप्रकाश को सूचित किया। इस पर श्रीप्रकाश बाइक लेकर स्टेशन आ गए। उनकी पत्नी मायके चली गई तो उन्हें 10 दिन अपने साथ ही रखा और अहमदाबाद घुमाया। इतनी बड़ी शख्सियत होकर भी बचपन की जान-पहचान को श्रीप्रकाश ने मान-सम्मान दिया था, ऐसा भला अब कौन करता है।
पहली बार देखा था बफे सिस्टम
गांव के सुभाष दुबे ने बताया कि श्रीप्रकाश की शादी के बाद 1988 में सनबीम स्कूल भगवानपुर के पास आयोजित समारोह में गांव के कई लोग शामिल हुए थे। सभी ने पहली बार बफे सिस्टम देखा था। बताया कि पढ़ाई के दौरान साथ पढ़ रही सोनू से श्रीप्रकाश को प्रेम हो गया था और दोनों ने विवाह कर लिया था। पिता की मौत के बाद श्रीप्रकाश एक बार गांव आए थे और पैतृक संपत्ति बेच कर चले गए थे। इसके बाद गांव के लोगों से उनका संपर्क खत्म हो गया था।
मनबढ़ की पिटाई से दुखी होकर पिता ने छोड़ा था गांव
रघुनाथपुर गांव के कुछ बुजुर्गों के अनुसार, श्रीप्रकाश के पिता राम प्रसाद नौकरी के सिलसिले में बनारस रहते थे। उस समय श्रीप्रकाश के दादा दयाराम घर पर अकेले रहते थे। गांव के ही एक मनबढ़ ने श्रीप्रकाश के दादा की पिटाई कर दी थी। सूचना पाकर राम प्रसाद बनारस से गांव आए और पुलिस को तहरीर दी। मुकदमा तो दर्ज नहीं हुआ, लेकिन पुलिस ने मनबढ़ को यह जरूर बता दिया कि राम प्रसाद शिकायत लेकर आए थे। इससे नाराज मनबढ़ नेे राम प्रसाद से भी मारपीट कर दी। इससे दुखी राम प्रसाद अपने पिता को लेकर बनारस चले गए।
अहमदाबाद में 40 हजार रुपये महीने से शुरू की थी नौकरी
ग्राम प्रधान विजय पटेल ने बताया कि श्रीप्रकाश की पहली नौकरी फार्मा कंपनी में अहमदाबाद में लगी थी। उन दिनों उनकी तनख्वाह 40 हजार रुपये महीना थी। श्रीप्रकाश और उनके परिवार ने भले गांव आना-जाना छोड़ दिया था, लेकिन बातचीत होती थी। उन्हें आगे बढ़ते देख हम सबको भी खुशी होती थी। अहमदाबाद से वह विदेश चले गए तो संपर्क टूट गया।
चार बहनों के इकलौते भाई थे श्रीप्रकाश
श्रीप्रकाश चार बहनों के इकलौते थे। उनकी बड़ी बहन शकुंतला की शादी लखनऊ और सावित्री की शादी राबर्ट्सगंज में हुई है। तीसरी बहन रेखा की शादी गंगापुर और सबसे छोटी बहन आशा की शादी चितईपुर के रंजीत पटेल से हुई है। श्रीप्रकाश की बुआ की शादी हुकुलगंज में हुई थी और उनके व्यावसायिक कांप्लेक्स हैं।
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फूलपुर थाना अंतर्गत रघुनाथपुर की पटेल बस्ती के मूल निवासी श्रीप्रकाश के पिता राम प्रसाद उर्फ रामू पत्नी भगवानी देवी और पांच बच्चों के साथ 70 के दशक में गांव छोड़ कर बनारस में रहने लगे थे। साहूपुरी में फर्टिलाइजर कंपनी में इंजीनियर राम प्रसाद ने रघुनाथपुर छोड़ा तो फिर उनकी चार बेटियां और इकलौते बेटा श्रीप्रकाश यदाकदा ही गांव आए। इस वजह से श्रीप्रकाश के परिवार को गांव के ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं।
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एक निजी स्कूल में गार्ड के तौर पर कार्यरत कमला ने बताया कि श्रीप्रकाश की पढ़ाई के दौरान वह उनसे मिलने बीएचयू जाया करते थे। श्रीप्रकाश पहले डालमिया हॉस्टल में और फिर भाभा हॉस्टल में रहे। कमला के अनुसार, उस समय वह अगरबत्ती बेचने बनारस जाया करते थे। बीएचयू में मुलाकात होने पर श्रीप्रकाश अपनी प्रेमिका के बारे में बताते थे और खाना खिलाए बगैर जाने नहीं देते थे। रात होने पर हॉस्टल में रोक लेते थे। वह पढ़ने में बहुत अच्छे, हंसमुख और संवेदनशील थे।
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‘हमारी दोस्ती कृष्ण और सुदामा जैसी थी’
कमला ने कहा- हमारी व श्रीप्रकाश की दोस्ती कृष्ण और सुदामा जैसी थी। आंखों से आंसू पोंछते हुए उन्होंने कहा कि श्रीप्रकाश अहमदाबाद में पत्नी के साथ रहते थे। वह किसी काम से अहमदाबाद गए तो श्रीप्रकाश को सूचित किया। इस पर श्रीप्रकाश बाइक लेकर स्टेशन आ गए। उनकी पत्नी मायके चली गई तो उन्हें 10 दिन अपने साथ ही रखा और अहमदाबाद घुमाया। इतनी बड़ी शख्सियत होकर भी बचपन की जान-पहचान को श्रीप्रकाश ने मान-सम्मान दिया था, ऐसा भला अब कौन करता है।
पहली बार देखा था बफे सिस्टम
गांव के सुभाष दुबे ने बताया कि श्रीप्रकाश की शादी के बाद 1988 में सनबीम स्कूल भगवानपुर के पास आयोजित समारोह में गांव के कई लोग शामिल हुए थे। सभी ने पहली बार बफे सिस्टम देखा था। बताया कि पढ़ाई के दौरान साथ पढ़ रही सोनू से श्रीप्रकाश को प्रेम हो गया था और दोनों ने विवाह कर लिया था। पिता की मौत के बाद श्रीप्रकाश एक बार गांव आए थे और पैतृक संपत्ति बेच कर चले गए थे। इसके बाद गांव के लोगों से उनका संपर्क खत्म हो गया था।
मनबढ़ की पिटाई से दुखी होकर पिता ने छोड़ा था गांव
रघुनाथपुर गांव के कुछ बुजुर्गों के अनुसार, श्रीप्रकाश के पिता राम प्रसाद नौकरी के सिलसिले में बनारस रहते थे। उस समय श्रीप्रकाश के दादा दयाराम घर पर अकेले रहते थे। गांव के ही एक मनबढ़ ने श्रीप्रकाश के दादा की पिटाई कर दी थी। सूचना पाकर राम प्रसाद बनारस से गांव आए और पुलिस को तहरीर दी। मुकदमा तो दर्ज नहीं हुआ, लेकिन पुलिस ने मनबढ़ को यह जरूर बता दिया कि राम प्रसाद शिकायत लेकर आए थे। इससे नाराज मनबढ़ नेे राम प्रसाद से भी मारपीट कर दी। इससे दुखी राम प्रसाद अपने पिता को लेकर बनारस चले गए।
अहमदाबाद में 40 हजार रुपये महीने से शुरू की थी नौकरी
ग्राम प्रधान विजय पटेल ने बताया कि श्रीप्रकाश की पहली नौकरी फार्मा कंपनी में अहमदाबाद में लगी थी। उन दिनों उनकी तनख्वाह 40 हजार रुपये महीना थी। श्रीप्रकाश और उनके परिवार ने भले गांव आना-जाना छोड़ दिया था, लेकिन बातचीत होती थी। उन्हें आगे बढ़ते देख हम सबको भी खुशी होती थी। अहमदाबाद से वह विदेश चले गए तो संपर्क टूट गया।
चार बहनों के इकलौते भाई थे श्रीप्रकाश
श्रीप्रकाश चार बहनों के इकलौते थे। उनकी बड़ी बहन शकुंतला की शादी लखनऊ और सावित्री की शादी राबर्ट्सगंज में हुई है। तीसरी बहन रेखा की शादी गंगापुर और सबसे छोटी बहन आशा की शादी चितईपुर के रंजीत पटेल से हुई है। श्रीप्रकाश की बुआ की शादी हुकुलगंज में हुई थी और उनके व्यावसायिक कांप्लेक्स हैं।