क्रिकेटर शिवम दूबे के पिता उन्हें रोज 500 बार गेंद फेंकते और मालिश करते, दस साल तक चला ये सिलसिला
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भारतीय टीम के वनडे टीम में शामिल भदोही जिले के मानिकपुर गांव के क्रिकेटर शिवम दूबे का जीवन भी काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। शिवम को इस मुकाम तक पहुंचाने में परिवार ने काफी समस्याएं सही, हालांकि बेटे को इस मुकाम पर पहुंचने पर पिता राजेश दूबे काफी खुश हैं।
चौरी के मानिनकपुर निवासी राजेश दूबे तीन दशक पहले मुंबई कारोबार के लिए आए और यहीं पर रहने लगे। उन्होंने जींस का कारोबार शुरू किया जो बाद में शिवम को क्रिकेटर बनाने में खत्म हो गया। आर्थिक संकट भी झेलने पड़े, लेकिन न पिता ने हिम्मत हारी और न शिवम को कोई चुनौती डगमगा पाई।
शिवम ने अपने पिता के सपने को ही जीवन का ध्येय मान लिया था। घर में ही क्रिकेट खेलने की तैयार की गई, वहीं, सुबह-शाम घंटों प्रैक्टिस होती। शिवम को कोचिंग देने का जिम्मा खुद उनके पिता ने अपने कंधों पर उठाया। बेटे के लिए खास डाइट तैयार की। ग्राउंड में उसे दौड़ना सिखाया। रात में रोज मालिश भी करते। शिवम को रोजाना 500 गेंद फेंकते, यह सिलसिला 10 साल तक चला।
10वीं तक पढ़ाई करने वाले शिवम ने अब क्रिकेट को ही सब कुछ मान लिया था। करीब 14 वर्ष की आयु में शिवम ने चंद्रकांत पंडित से कोचिंग लेना शुरू कर दिया। राजेश दूबे ने बताया कि बेटे को आगे बढ़ाने में वह अपने जींस के कारोबार को नहीं देख सके और धीरे-धीरे वह भी खत्म हो गया। माता माधुरी ने भी हर कदम पर पिता और बेटे का साथ निभाया।
शिवम बताते हैं कि पिता ने उन्हें सफल बनाने के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया। दिन-रात एक कर दिया। मैंने भी खूब संघर्ष किया है। मेरे दोस्तों ने भी मेरा हौसला बढ़ाया। शिवम के चाचा पूर्व सांसद रमेश दूबे ने कहा कि हर मैच के बाद शिवम का उत्साह बढ़ रहा है। टीम और सेलेक्टर ने उसका ध्यान दिया तो वह जिले के साथ ही देश का नाम रोशन करेगा।