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तीन सगे भाइयों सहित चार को 20-20 वर्ष की कड़ी कैद
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वाराणसी। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी की अदालत ने 13 वर्षीय किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म और देह व्यापार के लिए उसे बेचने के मामले में तीन सगे भाइयों सहित चार अभियुक्तों को 20-20 वर्ष की कड़ी कैद की सजा सुनाई। अभियुक्तों का नाम अमरेंद्र मिश्रा, कमलेश मिश्रा व अरविंद नारायन मिश्रा और गुड्डू मियां उर्फ अख्तर अली है। चारों पर 19-19 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अलावा दो अभियुक्त कमलेश मिश्रा और अरविंद नारायन मिश्रा को किशोरी को देह व्यापार के लिए बेचने के आरोप में सात-सात वर्ष के कठोर कारावास और 14-14 हजार जुर्माना की सजा सुनाई गई है।
एडीजीसी वंदना श्रीवास्तव के अनुसार वादिनी पांच जुलाई 2013 को चौबेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि कक्षा सात में पढ़ने वाली उसकी 13 वर्षीय पुत्री तीन जुलाई की दोपहर दो बजे अपने नए मकान से पुराने मकान में स्नान करने गयी थी। कुछ देर बाद नहाकर वह वापस घर जाने के लिए निकली, लेकिन रास्ते से गायब हो गयी। काफी देर तक जब उसका कहीं पता नहीं चला तो उसकी खोजबीन शुरू की गई। इस बीच वादिनी को पता चला कि उसकी बेटी को गांव निवासी सगे भाई अमरेंद्र मिश्रा, कमलेश मिश्रा व अरविंद नारायन मिश्रा और गुड्डू मियां उर्फ अख्तर अली बहला-फुसलाकर कर अपने साथ ले गए है। वह लोग उसकी बेटी के मोबाइल से अपने घर बातचीत भी कर रहे थे। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अभियुक्तों को सात अगस्त 2013 को गिरफ्तार कर किशोरी को उनके कब्जे से बरामद किया था। अदालत ने विचारण के दौरान अभियुक्तों को दोषी पाया और सजा सुनाई।
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एडीजीसी वंदना श्रीवास्तव के अनुसार वादिनी पांच जुलाई 2013 को चौबेपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि कक्षा सात में पढ़ने वाली उसकी 13 वर्षीय पुत्री तीन जुलाई की दोपहर दो बजे अपने नए मकान से पुराने मकान में स्नान करने गयी थी। कुछ देर बाद नहाकर वह वापस घर जाने के लिए निकली, लेकिन रास्ते से गायब हो गयी। काफी देर तक जब उसका कहीं पता नहीं चला तो उसकी खोजबीन शुरू की गई। इस बीच वादिनी को पता चला कि उसकी बेटी को गांव निवासी सगे भाई अमरेंद्र मिश्रा, कमलेश मिश्रा व अरविंद नारायन मिश्रा और गुड्डू मियां उर्फ अख्तर अली बहला-फुसलाकर कर अपने साथ ले गए है। वह लोग उसकी बेटी के मोबाइल से अपने घर बातचीत भी कर रहे थे। इस मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर अभियुक्तों को सात अगस्त 2013 को गिरफ्तार कर किशोरी को उनके कब्जे से बरामद किया था। अदालत ने विचारण के दौरान अभियुक्तों को दोषी पाया और सजा सुनाई।
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