UP: हरीश मिश्रा केस में कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण, जमानत पर सुनवाई के दौरान प्रपत्र न भेजने पर कोर्ट सख्त
सपा नेता हरीश मिश्रा के साथ मारपीट और गिरफ्तारी के बाद जिले की राजनीति काफी गरमा गई है। कुछ दिन पहले करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष ने भी सपाजनों को चेतावनी दी थी। उन्होंने सीपी से मुलाकात कर अपनी बात रखी थी।
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हत्या के प्रयास के मामले में समाजवादी पार्टी के नेता हरीश मिश्रा उर्फ बनारस वाले मिश्राजी की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान केस डायरी और अन्य प्रपत्र नहीं भेजने पर कोर्ट ने शनिवार को सख्त रुख अपनाया।
विशेष न्यायाधीश (एससी-एसटी एक्ट) देवकांत शुक्ला की अदालत ने आरोपी हरीश मिश्रा की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान विवेचक से केस से जुड़े आवश्यक प्रपत्र और केस डायरी नहीं भेजने पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
हरीश मिश्रा की ओर से अधिवक्ता ने विवेचक पर जान-बूझकर कोर्ट में केस डायरी और अन्य प्रपत्र न भेजने का आरोप लगाया था। इस पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए विवेचक से स्पष्टीकरण तलब करते हुए जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए अगली तिथि 21 अप्रैल नियत कर दी।
12 अप्रैल को सिगरा थाना क्षेत्र में सपा नेता हरीश मिश्रा और मां करणी के उपासकों अविनाश मिश्रा व स्वास्तिक उपाध्याय के बीच मारपीट हुई थी। हरीश ने कहा था कि करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला किया था।
दरोगा और मां-बाप पर शारीरिक शोषण के आरोप में केस दर्ज करें
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की कोर्ट ने शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने के मामले में दरोगा अभिषेक और उसके मां-बाप के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने चौबेपुर थानाध्यक्ष को निर्देशित किया है कि पीड़िता के आवेदन के परिपेक्ष्य में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना करें। चौबेपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला ने कोर्ट में आवेदन दिया। आवेदन में कहा कि उसके पति की साल 2012 में मौत हो गई थी।
दो बच्चों के साथ जीवन यापन करने लगी। 19 नवंबर 2015 रात गांव का ही अभिषेक घर में जबरदस्ती घुस आया और शारीरिक शोषण किया। विरोध करने पर उसने कहा कि वह उससे शादी करेगा। आए दिन शारीरिक संबंध स्थापित करने लगा।