बनारस का लाल नहीं भर सका जुर्माना सालों से नेपाल की जेल में कैद, परिवार वाले भीख मांगने को मजबूर
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कमाऊ पूत की कमी से घर का क्या हाल होता है इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने कभी कभार यह देखा हो या ऐसी परिस्थिति को झेला हो। वाराणसी के पहडिय़ा इलाके के रमरेपुर निवासी महेंद्र वर्मा का परिवार भी इसी समस्या से बीते तीन सालों से जूझ रहा है। मदद की गुहार हर जिम्मेदार की चौखट पर लगा चुका है, पर कहीं से भी कोई सहारा अब तक नहीं मिला।
दरअसल, महेंद्र वर्मा अपना खुद का चार पहिया वाहन किराए पर चलाकर परिवार का भरण पोषण करते थे। इसी दौरान दिसंबर 2016 में अपनी चार पहिया वाहन पर फल लादकर नेपाल गए थे। रास्ते में महेंद्र की पिकअप से नेपाल के नवलपुर के पास हुई दुर्घटना में एक की मौत हो गई व एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया।
इस अपराध के लिए महेंद्र को चार साल की सजा हो गई। तमाम रियायतों के बाद महेंद्र की सजा तो पूरी हो गई, लेकिन जुर्माना की राशि मृतक के परिजनों को पांच लाख एवं घायल को 2.5 लाख नेपाली रुपये न चुकाने की वजह से रिहाई अटकी हुई है।
ऐसे में गृहस्थी की गाड़ी चलाने के लिए बूढ़ी मां अमरावती भीख मांगकर गुजर कर रही है, तो तो पत्नी सोनी देवी पति के दूर होने की तकलीफ में अक्सर बीमार रहती है। वह घर का एकलौता सहारा था। अभी उसके बच्चे भी नहीं हैं।
वाराणसी के युवा समाजसेवी यतीन्द्र ने पश्चिमी नेपाल के कैलाली क्षेत्र से सांसद नरादमुनी राना से भी मिलकर बात - चीत की । नेपाली सांसद द्वारा कहा गया कि नेपाल सरकार द्वारा हर संभव मदद किया जाएगा । अब इस वृद्धा मां को अपने सांसद व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से ही उम्मीद है कि ये महेंद्र वर्मा को भारत वापस लाएं और वृद्ध मां को जीते जी उसके बेटे से मिला दें । यतीन्द्र हर तरह से प्रयास कर रहें हैं कि इस वृद्धा मां का बेटा जल्द - जल्द अपने देश व अपनी मां के पास वापस आ जाए ।