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कोरोना से युद्ध लड़ते रहे स्वास्थ्य योद्धा, वैक्सीन की बाट जोह रहा साल

Sat, 26 Dec 2020 01:44 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 26 Dec 2020 01:44 AM IST
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corona
वाराणसी। साल 2020 पूरे देशवासियों के लिए कष्टदायी रहा। मार्च से ही कोरोना का संक्रमण ऐसा फैला कि अभी तक इससे उबरपाना मुश्किल लगता है। आम आदमी तो कोरोना से जंग लड़ ही रहा था, लेकिन सबसे अहम भूमिका स्वास्थ्य विभाग की रही। डॉक्टर हो या पैरामेडिकल स्टॉफ सबने अपनी जिम्मेदारियों की निर्वहन बखूबी किया और अब भी कर रहे हैं। हालांकि कोरोना से जंग में सफलता के लिए अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों की टीम भी जूझती रही। कोरोना की जंग लड़ते लड़ते एडिशनल सीएमओ डॉ. जंगबहादुर के साथ ही होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी को भी जंग हारनी पड़ी।
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21 मार्च को मिला पहला कोरोना मरीज
जिले में कोरोना का पहला मरीज 21 मार्च को संक्रमित हुआ। इसके बाद से ही स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया। दूसरा मरीज भी 28 मार्च को मिला। इसके बाद न केवल स्वास्थ्य विभाग, बल्कि जिला प्रशासन भी मुस्तैद हो गया। कोविड अस्पताल बनाने के साथ ही वहां स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई। इसके बाद तो एक के बाद एक मरीजों के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया जो अब तक जारी है।
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जमातियों और परिवारीजन पर रही विशेष नजर
कोरोना संक्रमण के शुरुआती दिनों में ही जमातियों और उनके संपर्क में आए परिवारीजनों पर विशेष नजर रखी गई। दिल्ली में जमातियों के संक्रमित होने की जानकारी मिलने के बाद से ही स्थानीय स्तर पर जांच शुरू हो गई। एक के बाद एक जमाती और उनके संपर्क वालों की जांच हुई तो धीरे-धीरे संख्या 100 के पार पहुंच गई।
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मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा को 2020 में कई सुविधाएं मिलीं। इसमें कोरोना से जंग लड़ने के लिए कोरोना लैब की सौगात मिली। इसके बाद न केवल वाराणसी बल्कि आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों को जांच में सहूलियत हुई। यही नहीं यहां इमरजेंसी में आठ बेड का आईसोलेशन वार्ड भी बनाया गया। यहां अस्पताल में आने वाले संदिग्ध मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया। इसके अलावा इमरजेंसी सहित अन्य जगहों पर आने वाले मरीजों के लिए वेंटीलेटर भी मिला।
जिला महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल कबीरचौरा में गर्भवती महिलाओं, बच्चों के सेहत की जांच के लिए एमसीएच विंग का लोकार्पण भी 2020 में हुआ। इसके बाद यहां कोरोना संदिग्ध गर्भवती महिलाओं को भर्ती कर इलाज की सुविधा भी शुरू हो गई। जांच के लिए उपकरण भी आए हैं। अब नए साल में इसके सामान्य तरीके से संचालन शुरू होने की संभावना है।

कोविड अस्पताल बना सुपर स्पेशियलिटी कांपलेक्स
कोरोना से जंग लड़ने में सबसे अहम भूमिका बीएचयू सुपरस्पेशियलिटी कांपलेक्स की रही। इसको लेवल तीन का कोविड अस्पताल बनाया गया। एक ही छत के नीचे कई विभागों की ओपीडी चलाने के लिए इस कांपलेक्स को बनवाया गया था। कोरोना की जंग में सुपरस्पेशियलिटी कांपलेक्स की पूरी टीम लगी है। इसके अलावा अस्पताल में क्षेत्रीय नेत्र संस्थान का काम भी शुरू हुआ।
ये बने कोविड अस्पताल
-बीएचयू सुपर स्पेशियलिटी कांपलेक्स
-दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल
-ईएसआई हॉस्पिटल
-हेरिटेज मेडिकल कॉलेज
-राजकीय आयुर्वेद कॉलेज, चौकाघाट
-सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुर
(इसके अलावा निजी अस्पतालों में भी कोविड हॉस्पिटल बनाया गया)
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एक नजर में कोरोना का आकड़ा
जिले में पहला कोरोना मरीज 21 मार्च
जिले में कोरोना से पहली मौत 5 अप्रैल
कोरोना का पहला अस्पताल बना दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल
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