कोरोना वैक्सीन है जरूरी: टीका लगवाने के बाद भी हुए संक्रमित, पर नहीं हुई परेशानी, जानें- वाराणसी में टीकाकरण का हाल
अब तक वाराणसी जिले में करीब 647378 लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है, जिसमें 526952 को पहली डोज और 120380 ने दूसरी डोज लगवाई है। जिले में कोरोना टीके की दोनों डोज लेकर संक्रमित होने वालों में ज्यादातर चिकित्सक, फ्रंटलाइन वर्कर्स ही रहे।
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वाराणसी में कोरोना टीकाकरण कराने के बाद भी बहुत से लोग संक्रमित हुए, लेकिन टीका न लगवाने वालों की तुलना में इसे लगवाने के बाद संक्रमित हुए लोगों को ज्यादा परेशानी नहीं हुई। इनमें अधिकांश लोग होम आईसोलेशन में ही रहे और उन्हें अस्पताल में भी नहीं जाना पड़ा। इसमें कुछ लोग टीके की पहली डोज लगवाने के बाद तो कई दोनों डोज लगवाने के बाद भी संक्रमित हो गए। लोगों ने बताया कि टीका लगवाने के बाद बस इतनी राहत हुई कि कोरोना के लक्षण आने के बाद सामान्य स्थिति में घर रहकर कोरोना की जंग को आसानी से जीत सके।
ऐसे लोगों ने भी सभी लोगों से कोरोना टीकाकरण के लिए आगे आने की अपील की है। अब तक वाराणसी जिले में करीब 647378 लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है, जिसमें 526952 को पहली डोज और 120380 ने दूसरी डोज लगवाई है। जिले में कोरोना टीके की दोनों डोज लेकर संक्रमित होने वालों में ज्यादातर चिकित्सक, फ्रंटलाइन वर्कर्स ही रहे।
बीएचयू के यूरोलॉजी विभाग के चिकित्सक प्रो. समीर त्रिवेदी ने चार फरवरी को कोरोना टीका लगवाया था, इसके बाद भी वह संक्रमित हो गए। बताया कि होम आईसोलेशन में ही रहे। टीका लगवाने का ही असर रहा कि संक्रमण का प्रभाव कम रहा और होम आईसोलेशन में रहने के दौरान ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
जिला महिला अस्पताल की एसआईसी डॉ. लिली श्रीवास्तव ने बताया कि 16 जनवरी को पहली डोज और 15 फरवरी को दूसरी डोज लेने के बाद अप्रैल के पहले सप्ताह में संक्रमित हो गई। टीका लगवाने की वजह से ही ज्यादा गंभीर स्थिति नहीं रही। होम आईसोलेशन में रहकर ही कोरोना की जंग जीत ली।
स्वास्थ्य विभाग में एडिशनल सीएमओ डॉ.एके मौर्या ने चार फरवरी पहली और 6 मार्च को टीके की दूसरी डोज लगवाई। 10 अप्रैल को संक्रमित वो हो गए। बताया कि टीका लगवाने का लाभ यह हुआ कि प्रतिरोधक क्षमता बनी रही और संक्रमण का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। होम आईसोलेशन में मैं ठीक हो गया।
इंडियन डेंटल एसोसिएशन के सचिव डॉ. अमर अनुपम ने 4 फरवरी को पहली और 10 मार्च को टीके की दूसरी डोज लगवाई थी। उन्होंने बताया कि कुछ दिन बाद वे संक्रमित हो गए। लेकिन टीके कारण ही मुझे कोई परेशानी नहीं हुई। टीका लगवाने के लिए लोगों को आगे आना चाहिए।
एक नजर में टीकाकरण
कुल टीकाकरण-6,47,378
पहली डोज-5,26,992
दूसरी डोज-1,20,386
पुरुष-3,13,257
महिला-2,13,603
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कोविशिल्ड-5,25,119
कोवैक्सीन-1,22,259
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18 से 44 साल-219980
45 से 60 साल-185517
60 साल से अधिक-121297
टीके से कोरोना की जंग जीतना होगा और आसान
कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण के लिए कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी है। साथ ही टीका लगवाने के लिए आगे आने की जरूरत है। ऐसा इसलिए क्योंकि दूसरी लहर खत्म जरूर हो गई है, लेकिन जिस तरह तीसरी लहर के आने की संभावना जताई गई है, ऐसे में अगर आप समय से टीकाकरण करा लेंगे तो आपके लिए कोरोना की जंग जीतना और आसान हो जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग भी इसके लिए लोगों को प्रेरित कर रहा है। इसके अलावा अलग-अलग सामाजिक संस्थान भी कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता की अलख जगा रहे हैं। आईएमएस बीएचयू मालीक्यूलर बायोलॉजी के प्रो. सुनीत कुमार सिंह ने बताया कि कोरोना का टीका पूरी तरह सुरक्षित है। इसको लेकर किसी तरह के संशय में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने टीकाकरण को लेकर फैली भ्रांतिंयों के बारे में बताते हुए उसका जवाब दिया है।
टीकाकरण को लेकर भ्रांतियां
भ्रांति : कोरोना का टीका लगने के बाद बुखार होता है।
जवाब-टीका चाहे कोई भी हो 24 से 48 घंटे तक हल्का बुखार आता है, इससे घबराने की जरूरत नहीं।
भ्रांति : बुखार नहीं आया, इसका मतलब टीका सही नहीं है।
जवाब-यह गलत है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का असर होता है। बहुत से लोगों को टीका लगने के बाद बुखार नहीं आता है।
भ्रांति : टीकाकरण के बाद हाथ, पैर में झनझाहट जैसा महसूस होता है।
जवाब-शरीर में जिस जगह पर वैक्सीन लगती है, वहां थोड़ा सा दर्द होता है। डरने की बात नहीं।
भ्रांति : पहले से बीमार लोगों को टीका नहीं लगवाना चाहिए।
जवाब-ऐसा बिल्कुल नहीं है। जो लोग पहले से किसी बीमारी से ग्रसित है, वो भी डॉक्टर की सलाह पर टीका लगवा सकते हैं।