दीक्षांत समारोह: संस्कृत विवि के निंबार्क वेदांत टॉपर को आठ गोल्ड मेडल, गुरु को रजत; चेले को मिला स्वर्ण
दीक्षांत समारोह में जब मेधावियों को मेडल मिले तो सभी के चेहरे खिल उठे। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभी को बधाई दी। कहा कि दीक्षांत के बाद हम नई शुरुआत करते हैं। इस अनुभव को आत्मसात करने की आवश्यकता है।
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Convocation of Sampurnanand Sanskrit Vishwavidyalaya: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 43वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 36 मेधावियों को 58 स्वर्ण और रजत पदक से नवाजा। निंबार्क वेदांत में आचार्य परीक्षा टॉप करने पर अंकित सिंह को सबसे ज्यादा आठ गोल्ड मेडल मिले।
एक ने संन्यासी गुरुसिद्ध मणिकठ स्वामी जंगमबाड़ी मठ में रहकर शिक्षा ली और तीन स्वर्ण अपने नाम किए। एक गुरु को रजत पदक तो उनके चेले को मंच पर स्वर्ण पदक मिला। संबद्ध नेपाली महाविद्यालय के छात्र विशाल बंजाड़े को स्वर्ण और उसी महाविद्यालय में व्याकरण विभाग के प्रमुख डॉ. ध्रुव सापकोटा को सवाई माधोसिंह रजत पदक मिला।
अंकित को आठ और दीपक को चार स्वर्ण पदक मिले
डॉ. गंगानाथ झा, रिपन स्वर्ण, चंद्रशेखर शास्त्री बैकुंठनाथ शास्त्री स्वर्ण, नारायण शास्त्री खिस्ते स्वर्ण, संपूर्णानंद संस्कृत स्वर्ण पदक, महामंडलेश्वर पवहारी और बाल कृष्णयति महाराज स्वर्ण, पंडित महादेव और विमल कुमार पोद्दार स्वर्ण पदक दिया गया। इनके अलावा दीपक कुमार तिवारी को चार गोल्ड, अजय कुमार, मठम मणिकंठ स्वामी, विनीत कुमार तिवारी और खुशबू उपाध्याय को 3-3 पदक मेडल दिए गए। इसके बाद सन्नी कुमार, बलजीत कुमार पांडेय, श्रवण कुमार और अनन्या को दो गोल्ड मेडल मिले।
दो टॉपर को मंच पर नहीं बुलाया
शुक्ल यजुर्वेद में सबसे ज्यादा अंक पाने वाले सत्यम पांडेय और नव्य न्यास से आचार्य में सबसे ज्यादा अंक पाए आशुतोष पति त्रिपाठी को गोल्ड मेडल देने के लिए मंच पर बुलाया ही नहीं गया। काफी देर तक भटकते रहे, फिर उन्हें आम शिक्षकों ने मंच के नीचे ही थमा दिया। इससे उनमें मायूसी छा गई।
दीक्षांत खत्म होते ही झड़प
दीक्षांत खत्म होने के बाद संगीत विभाग की शिक्षिका और छात्र के बीच पुराने विवाद को लेकर एक-दूसरे से भिड़ गए। काउंसिलिंग के दौरान भी इन लोगों में झड़प हुई थी। इस दौरान अधिकारियों और प्रोफेसरों ने इनको वहां से अलग दूर किया।
मेधावियों से बातचीत
भविष्य में अध्यापक बनना है। भावी पीढि़यों में संस्कृत का प्रचार प्रसार करके अपनी संस्कृति के जड़ों को मजबूत करना है। 10वीं से ही संस्कृत साहित्य में रूचि रही है। 12वीं भी संस्कृत साहित्य से पूरी की। इसके बाद अब आगे भी इसी क्षेत्र में काम करना है। निंबार्कवेदांत विषय में बड़े स्तर पर शोध करना है। - अंकित प्रकाश सिंह, साहित्य में आचार्य के 8 स्वर्ण पदक।
यहां हर दिन लगता है कि कुछ नया मिल रहा
साहित्य विषय में सबसे ज्यादा अंक लाने पर ये उपलब्धि मिली है। इसे मैं अपने माता-पिता और गुरुजनों को समर्पित करता हूं। इस विषय में मेरा इतना रूझान है कि हर दिन लगता है कि कुछ नया मिल रहा और वास्तविक जीवन की समस्याओं का हल भी मिल रहा है। - खूशबू उपाध्याय, ज्योतिषाचार्य में गोल्ड मेडल।
संन्यास ले चुका हूं। स्वर्ण पदक की लालसा नहीं थी। गुरुजी के सानिध्य में काशी के जंगमबाड़ी मठ में रहकर शिक्षा ग्रहण की है। जगतगुरु डॉ. चंद्रशेखर शिवाचार्य महास्वामी के आशीर्वाद से यह सबकुछ पाया हूं। गुरुजी सुधाकर मिश्रा ने काफी सिखाया है। अब इसी विषय में पीएचडी करनी है और शोध कर वेदांत में कुछ अलग करना है। - मठम मणिकठ स्वामी, वेदांत आचार्य में तीन गोल्ड मेडल।
रामानुज के सभी ग्रंथों को पढ़ा
सामवेद का अध्ययन कर टॉप किया हूं। उसके अंतर्गत सभी ग्रंथों को पढ़ा और परीक्षा में अच्छे अंक मिले। अब आगे जीवन में शोध कर इस विषय पर कई उच्च स्तरीय काम किए जाएंगे। - दीपक कुमार तिवारी, सामवेदचार्य में गोल्ड मेडल।
शास्त्रीय ग्रंथों और शास्त्रों के अध्ययन से कई रहस्य सामने आते हैं। हमारी संस्कृति कितनी समृद्ध है इसका पता चलता है। - सन्नी कुमार, शंकरवेदांताचार्य में गोल्ड मेडल
देश में आयुर्वेद की स्वीकार्यता को लेकर कोई सवाल नहीं है। इस क्षेत्र का स्कोप काफी बड़ा है। इसमें बड़े स्तर पर काम कर आयुर्वेद के इस्तेमाल को व्यवहारिक बनाना होगा। - अनन्या, आयुर्वेदाचार्य में गोल्ड मेडल
जैन दर्शन को लेकर भविष्य में शोध करूंगा। हमें जैनियों की राह पर चलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। सफलता को लेकर भी कई फैसले आसानी से हो जाते हैं। - श्रवण कुमार, जैन दर्शनाचार्य में दो गोल्ड मेडल।