अस्सी घाट पर गंगा आरती में विवाद के बाद डीएम का हस्तक्षेप, बोले- अब नगर निगम में कराना होगा पंजीकरण
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काशी में गंगा तट पर आरती कराने वालों को अब पंजीकरण करना अनिवार्य होगा। नगर निगम की ओर से हर साल स्थान का आवंटन और संस्थाओं या व्यक्तियों का पंजीकरण किया जाएगा। अस्सी घाट पर सुबह ए बनारस की गंगा आरती पर विवाद के बाद जिलाधिकारी ने हस्तक्षेप किया है। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा ने अपने आदेश में कहा है कि बिना नगर निगम की अनुमति के अब गंगा आरती नहीं हो सकेगी।
जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा है कि यह देखने में आता है कि कुछ लोग इन घाटों पर आरती को लेकर विवाद करते हैं। कुछ लोग नई आरती प्रारंभ करते हैं जिनका विरोध होता है। इसे देखते हुए नगर निगम को इसकी स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए। जितनी भी आरतियां घाटों पर होती हैं उनका पंजीकरण होना चाहिए। उन्हें एक वर्ष के लिए ही नगर निगम स्थान आवंटन करे। नवीनीकरण प्रत्येक वर्ष होना चाहिए। किसी घाट पर व्यक्ति या संस्था भविष्य में कोई भी आरती नगर निगम की अनुमति के बिना न कर सके ये सुनिश्चित करना होगा। इसी तरह एक ही संस्था या व्यक्तियों का समूह एक से अधिक घाट पर आरती न करें।
31 मार्च के बाद पंजीकृत संस्था या व्यक्ति ही कर सकेंगे आरती
जिलाधिकारी ने नगर आयुक्त को लिखे पत्र में कहा है कि 17 फरवरी की शाम तक जितनी आरतियां गंगा घाटों पर हुई थीं, उनका रिकॉर्ड बनवाया जाए। आगामी एक माह में उनका पंजीकरण कराया जाए। इसके लिए नगर निगम प्रपत्र भी तैयार करे। 31 मार्च तक यह कार्य पूर्ण किया जाए।
31 मार्च के बाद वही व्यक्ति या संस्था घाटों पर आरती कर सकेंगे जिनका नगर निगम ने पंजीकरण किया होगा। प्रत्येक वित्तीय वर्ष के लिए जो भी संस्था-व्यक्ति घाटों पर आरती को आवेदन करें या नवीनीकरण कराएं उनकी एलआईयू जांच के साथ आवश्यक कार्यवाही करते हुए निर्णय लिया जाए। पंजीकरण के समय घाट पर आरती के स्थान संग व्यक्तियों की संख्या आदि का उल्लेख भी फॉर्म में हो ताकि कोई भी व्यक्ति या संस्था आरती करने के नाम पर घाटों पर अतिक्रमण न करे।