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फोन पर ठगी जारी, पुलिस के पास ‘तोड़’ नहीं

Fri, 06 May 2016 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 06 May 2016 01:52 AM IST
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Continue on the phone swindle, the police 'smash' not
साइबर क्राइम - फोटो : Cyber Crime
आपके बैंक एकाउंट को आधार नंबर से लिंक करना है... अपने एटीएम का नंबर और पिन बताइए नहीं तो आपका कार्ड काम करना बंद कर कर देगा। आपका एटीएम कार्ड बंद हो गया है... खोलने के लिए अपने एटीएम के ऊपर दिया नंबर और पिन बताइए। बधाई हो आपका नंबर लकी सेलेक्ट हुआ है... इनाम का पैसा डालना है.... एटीएम नंबर और पिन बताइए। बैंक कर्मी बनकर फोन के जरिए लोगों से ठगी की घटनाएं इन दिनों आम हो गई हैं। किसी न किसी थाने पर रोजाना ऐसे मामले पहुंच रहे हैं।
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फोन करने वाले का मकसद सिर्फ एटीएम नंबर और पिन हासिल करना होता है। ये सब इतनी तेजी से होता है कि लोग विश्वास करके मांगी गई जानकारी देते चले जाते हैं। कुछ ही देर में उनके खाते से रुपये निकाले जाने का संदेश आता है। ऐसे मामलों में पुलिस और साइबर सेल ठगी के शिकार लोगों की मदद और मुकदमा दर्ज करने के बजाय उन्हें टरका देती है। हालांकि वाराणसी में बीते साल की जनवरी से अब तक आईटी एक्ट के तहत 126 मामले दर्ज हुए हैं।
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वहीं, साइबर ठगी का शिकार हुए बीएचयू के भाषा विज्ञान विभाग के प्रोफेसर राजनाथ भट्ट ने पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। गुरुवार को प्रेस वार्ता कर उन्होंने अपने साथ हुई साइबर ठगी की जानकारी दी। बताया कि उन्हाेंने पुलिस से मामले की शिकायत की लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रो. भट्ट ने बताया कि एक मई को उनके मोबाइल पर एक तथाकथित एसबीआई के अधिकारी का फोन आया। उसने केवाईसी अपडेट करने के लिए आधार कार्ड और एटीएम का नंबर पूछा। वेरिफिकेशन के नाम पर मोबाइल पर आने वाला ओटीपी नंबर भी पूछ लिया। जानकारी के अभाव में उन्होंने वो नंबर भी बता दिया। थोड़ी देर बाद कई आनलाइन शॉपिंग कंपनियों के उनके खाते से भुगतान होने के मैसेज आए। तब उन्हें इसकी खबर लगी कि उनके खाते से तकरीबन 70000 रुपये की शॉपिंग की गई है। उन्होंने तत्काल संबंधित कंपनियों में फोन कर आर्डर कैंसिल करने को कहा। पहले तो उन्होंने इसका आश्वासन दिया लेकिन बाद उन्होंने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि आर्डर डिलीवर किया जा चुका है।
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