Varanasi: सर्व सेवा संघ का निर्माण अवैध, दो दिन में भवन को गिराने का आदेश, DM बोले- जमीन पर रेलवे का अधिकार
सर्व सेवा संघ और उत्तर रेलवे के बीच जमीन के मालिकाना हक पर चल रहे विवाद में जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने सुनवाई के बाद रेलवे के हक में फैसला दिया है। सर्व सेवा संघ का निर्माण अवैध करार दिया गया है और जमीन को उत्तर रेलवे की संपत्ति मानी गई है।
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सर्व सेवा संघ और उत्तर रेलवे के बीच जमीन के मालिकाना हक पर चल रहे विवाद में जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने सुनवाई के बाद रेलवे के हक में फैसला दिया है। सर्व सेवा संघ का निर्माण अवैध करार दिया गया है और जमीन को उत्तर रेलवे की संपत्ति मानी गई है।
सर्व सेवा संघ के अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए उत्तर रेलवे प्रशासन ने 30 जून 2023 की तिथि नियत कर दी गई है। जमीन के मालिकाना हक पर चल रहे विवाद में उच्च न्यायालय के आदेश पर जिलाधिकारी वाराणसी ने इस मामले की सुनवाई की।
इसमें सर्व सेवा संघ से दो बिंदुओं पर जवाब मांगा गया कि रेलवे की ओर से इस जमीन की बिक्री के संबंध में कोई पत्राचार हुआ तो उसकी प्रति उपलब्ध कराई जाए। रेलवे की ओर से जारी अधिसूचना की प्रति भी मांगी गई। मगर, सर्व सेवा संघ की ओर से इन बिंदुओं पर कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया।
जिलाधिकारी ने अपने आदेश में एसडीएम सदर की आख्या का हवाला दिया कि खतौनी में अखिल भारतीय सर्व सेवा संघ का नाम अंकित नहीं है। जिलाधिकारी एस राजलिंगम ने अखिल भारत सर्व सेवा संघ के प्रतिनिधियों, उत्तर रेलवे वाराणसी के अधिकारियों की ओर से उपलब्ध कराए गए अभिलेख और आख्या के आधार पर जमीन पर मालिकाना हक उत्तर रेलवे का पाया है।
सर्व सेवा संघ के अवैध निर्माण को ढहाएगा रेलवे, नोटिस चस्पा
काशी स्टेशन के विस्तार के क्रम में उत्तरी छोर स्थित सर्व सेवा संघ के 25 भवनों को रेलवे ढहाएगा। मंगलवार को उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के अधिकारियों ने उन भवनों पर नोटिस चस्पा कर भवन खाली करने की चेतावनी दी है। 30 जून की सुबह नौ बजे रेलवे का बुलडोजर चिह्नित 25 अवैध निर्माणों पर चलेगा। एईएन रेलवे आकाशदीप ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर ही सर्व सेवा संघ के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलेगा।
पिछले माह किला कोहना में ढहाए गए 125 मकान
काशी स्टेशन के सुंदरीकरण और द्वितीय प्रवेश द्वार के लिए राजघाट स्थित किला कोहना में पिछले माह चार एकड़ में 125 अवैध निर्माणों को तोड़ा गया था। 125 मकान और छोटी दुकानें यहां वर्षों से काबिज थीं, जिन्हें रेलवे ने पुलिस फोर्स की मौजूदगी में ढहा दिया था।