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सीएम योगी के निर्देश के बाद बाद भी नहीं घटे गिट्टी के दाम, जानिए क्या है कारण
ब्यूरो, अमर उजाला,सोनभद्र
Updated Tue, 31 Oct 2017 01:36 PM IST
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निर्माण
- फोटो : amarujala
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भवन निर्माताओं को सस्ती गिट्टी मिलने की मंशा एक बार फिर धराशायी हो गई। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद गिट्टी बालू सस्ता उपलब्ध कराने के लिए मुख्य सचिव तक बैठक कर दिशा निर्देश जारी कर चुके हैं मगर सोनभद्र में इसका असर नहीं दिख रहा है।
चंद खनन व्यवसायियों ने सिंडिकेट बनाकर परमिट का दाम फिर से बढ़ा दिया है। तीन दिन में दस चक्का परमिट सात से बढ़कर नौ हजार और 12 चक्का ट्रक का परमिट नौ हजार से बढ़कर 12 हजार रुपये में बिक रहा है। ऐसे में गरीबों का आशियाना बनाने का सपना चकनाचूर होते नजर आ रहा है।
चुनाव के दौरान भाजपा का नारा था कि गिट्टी बालू सस्ता होगा हर गरीब का मकान पक्का होगा। लेकिन सरकार बनी तो गिट्टी बालू का दाम पहले से अधिक बढ़ गया। अमर उजाला में खुलासे के बाद शासन ने इसे संज्ञान लिया और तत्काल परमिट का दाम घटाने के निर्देश दिए।
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10 अक्तूबर को मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को हर हाल में गिट्टी बालू सस्ता उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए मगर सोनभद्र में इसका पालन नहीं हो रहा है।
बताते चलें कि डीएम पीके उपाध्याय भी क्रशर व्यवसायियों को निर्धारित मूल्य से अधिक गिट्टी बेचने पर कार्रवाई करने की बात कही थी। वहीं जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने कहा कि दाम बढ़ाने की जानकारी उन्हें नहीं है। वह मामले में सूचना लेने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।
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चंद खनन व्यवसायियों ने सिंडिकेट बनाकर परमिट का दाम फिर से बढ़ा दिया है। तीन दिन में दस चक्का परमिट सात से बढ़कर नौ हजार और 12 चक्का ट्रक का परमिट नौ हजार से बढ़कर 12 हजार रुपये में बिक रहा है। ऐसे में गरीबों का आशियाना बनाने का सपना चकनाचूर होते नजर आ रहा है।
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चुनाव के दौरान भाजपा का नारा था कि गिट्टी बालू सस्ता होगा हर गरीब का मकान पक्का होगा। लेकिन सरकार बनी तो गिट्टी बालू का दाम पहले से अधिक बढ़ गया। अमर उजाला में खुलासे के बाद शासन ने इसे संज्ञान लिया और तत्काल परमिट का दाम घटाने के निर्देश दिए।
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10 अक्तूबर को मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को हर हाल में गिट्टी बालू सस्ता उपलब्ध कराने के सख्त निर्देश दिए मगर सोनभद्र में इसका पालन नहीं हो रहा है।
बताते चलें कि डीएम पीके उपाध्याय भी क्रशर व्यवसायियों को निर्धारित मूल्य से अधिक गिट्टी बेचने पर कार्रवाई करने की बात कही थी। वहीं जिलाधिकारी पीके उपाध्याय ने कहा कि दाम बढ़ाने की जानकारी उन्हें नहीं है। वह मामले में सूचना लेने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे।
सोनभद्र में हो रहा बेलगाम अवैध खनन
बिल्ली मारकुंडी में कई खदानें पहुंचीं डेंजर जोन में
- फोटो : अमर उजाला
अवैध खनन को लेकर यूपी सरकार के तेवर भले ही सख्त हो गए हैं, मगर सोनभद्र में अवैध खनन का खेल बेलगाम जारी है। यहां खाई का रूप ले चुकी पहाड़ियों में न सिर्फ अवैध खनन हो रहा है बल्कि मजदूरों की सुरक्षा तक का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। पट्टों से हटकर हो रहे अवैध खनन को लेकर जिले के अफसर संजीदा नहीं हैं। दो खान अधिकारी होने के बाद भी अवैध खनन पर नियंत्रण नहीं लग रहा है।
बिल्ली मारकुंडी, बर्दिया सेंदुरिया और मीतापुर में 149 पत्थर की खदानें थी। इनमें से 61 खदानों की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। 14 खदानों में 22/3 में काम बंद हैं। इनमें सिर्फ सुधारात्मक काम हो सकता है। इसी तरह 30 खदानों में हाईकोर्ट के आदेश से खनन बंद है। शेष 44 लीजों में खनन हो रहा है। इनमें से दस खदानें अत्यंत गहरी हो गई हैं।
इनमें से दो टावर के नीचे और छह खतरनाक की श्रेणी में आ चुकी हैं। इन खदानों में मजदूरों के सुरक्षा का ख्याल तक नहीं है। जिले में अवैध खनन का हाल यह रहा है कि तमाम खदानें गहरी खाई बन चुकी हैं।
इसके बावजूद इन खदानों में नियम विरुद्घ खनन किया जा रहा है। नियम है कि जो खदानें अधिक गहरी हो गई हैं उनमें सीढ़ीदार मार्ग बनाया जाए। इसके बाद ही उसमें खनन किया जाए।
लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से खदानों को बगैर सीढ़ीदार बनाए खनन हो रहा है। इतना ही नहीं ऐसी खदानों में ब्लास्टिंग भी कराई जा रही है। इससे अक्सर दुुघर्टना की आशंका बनी रहती है। उधर एसडीएम सदर विशाल यादव कहते हैं कि खनन सुरक्षा निदेशालय की एनओसी के बाद ही खाई जैसी पहाड़ियों में खनन होता हैै।
फिलहाल उन्हें अवैध खनन होने की कोई सूचना नहीं है। वहीं खनन प्रभारी अशोक कुमार यादव ने कहा खनन विभाग की टीम को बिल्ली मारकुंडी की गहरी खदानों में जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट के बाद वह लोग ऐसे पट्टे धारक के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
बिल्ली मारकुंडी, बर्दिया सेंदुरिया और मीतापुर में 149 पत्थर की खदानें थी। इनमें से 61 खदानों की समय सीमा समाप्त हो चुकी है। 14 खदानों में 22/3 में काम बंद हैं। इनमें सिर्फ सुधारात्मक काम हो सकता है। इसी तरह 30 खदानों में हाईकोर्ट के आदेश से खनन बंद है। शेष 44 लीजों में खनन हो रहा है। इनमें से दस खदानें अत्यंत गहरी हो गई हैं।
इनमें से दो टावर के नीचे और छह खतरनाक की श्रेणी में आ चुकी हैं। इन खदानों में मजदूरों के सुरक्षा का ख्याल तक नहीं है। जिले में अवैध खनन का हाल यह रहा है कि तमाम खदानें गहरी खाई बन चुकी हैं।
इसके बावजूद इन खदानों में नियम विरुद्घ खनन किया जा रहा है। नियम है कि जो खदानें अधिक गहरी हो गई हैं उनमें सीढ़ीदार मार्ग बनाया जाए। इसके बाद ही उसमें खनन किया जाए।
लेकिन विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से खदानों को बगैर सीढ़ीदार बनाए खनन हो रहा है। इतना ही नहीं ऐसी खदानों में ब्लास्टिंग भी कराई जा रही है। इससे अक्सर दुुघर्टना की आशंका बनी रहती है। उधर एसडीएम सदर विशाल यादव कहते हैं कि खनन सुरक्षा निदेशालय की एनओसी के बाद ही खाई जैसी पहाड़ियों में खनन होता हैै।
फिलहाल उन्हें अवैध खनन होने की कोई सूचना नहीं है। वहीं खनन प्रभारी अशोक कुमार यादव ने कहा खनन विभाग की टीम को बिल्ली मारकुंडी की गहरी खदानों में जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट के बाद वह लोग ऐसे पट्टे धारक के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।