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टॉयलेट के लिए आवाज उठाई

Fri, 13 Mar 2015 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 13 Mar 2015 02:02 AM IST
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Congress voiced toilet
वाराणसी। टॉयलेट के लिए बेटियों को इसी तरह से आवाज उठानी चाहिए। मुझे इस बात का ज्यादा दुख था कि मेरे ससुराल वालों का बेटियों की इस पीड़ा की ओर कभी ध्यान ही नहीं गया। यह कह रही हैं काशी भेलूपुर की खुशबू शर्मा, जो घर में टॉयलेट न होने के कारण अपनी ससुराल भदोही गांव चकबीरा (शुकुलपुर) छोड़कर अपने मायके आ गईं।
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उनकी प्रेरणा स्वच्छता अभियान की ब्रांड अंबेसडर विद्या बालन की विज्ञापन में सीख हो या फिर मध्य प्रदेश से सिहोर अनीता नारे, मगर यह तो तय है खुशबू की खुशबू तो फैल चुकी है। इसमें पूर्वांचल ही नहीं सभी के लिए स्वच्छता और उससे भी जरूरी सुरक्षा के लिए स्पष्ट संदेश है।
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खुशबू ने ससुराल वालों को शौचालय बनवाने के लिए पूरा वक्त दिया कि मगर ऐसा हुआ नहीं। खुशबू की शादी के तो करीब दो साल होने जा रहे हैं मगर जब गौने के बाद ससुराल पहुंचीं तो तमाम कमियों को उन्होंने नजरंदाज कर ससुराल वालों से अगर कुछ मांगा तो यही कि वे उसके लिए घर में एक टायलेट बनवा दें। खुशबू कहती हैं कि खुले में शौच करने की बात तो उसने कभी सोची भी नहीं थी।
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मुुंह अंधेरे उठना और रात का इंतजार करना उसे बेहद अखरता था। ऐसे में बाहर न जाना पड़े इसके लिए उसने खाना पीना तक छोड़ दिया, जिसका असर उसकी सेहत पर भी पड़ा। वह अक्सर बीमार रहने लगीं। खुशबू ने ससुराल वालों को टायलेट बनवाने का पूरा मौका दिया। ससुराल वालों के कहने पर ही उसने अपने घरवालों को भी ये बात नहीं बताई।

ससुराल वाले उसकी विदाई के लिए आए तो उसने टायलेट बनवाने की बात रख ससुराल जाने से मना कर दिया। ससुराल वालों का टाल मटोल चलता रहा और आखिरकार वादों और मानमनौव्वल पर गईं। जब देखा इस ओर किसी का ध्यान नहीं तो ससुराल छोड़कर मायके चली आईं। आखिरकार ससुरालियों को उसकी बात माननी पड़ी। ससुराल में अब उसके लिए शौचालय बन रहा है।

बहू ने खोली आंख, समझ आई शौचालय की बात
ज्ञानपुर। घर में शौचालय का होना कितना जरूरी है, इसका अहसास आज हमें हुआ है, बहू ने आंख खोल दी है, अब जब तक घर में शौचालय नहीं बनेगा, कोई दूसरा काम नहीं करूंगा। इसके लिए जो करना होगा करूंगा, जिसके पास जाना होगा जाऊंगा।

यह कहना है औराई विकास खंड के चकबीरा (शुकुलपुर) गांव के शर्मा बस्ती निवासी खुशबू के ससुर प्रेम सागर शर्मा का। उन्होंने कहा बहू की इस जिद पर पहले गुस्सा आया पर अब बात समझ में आ गई है।


गांव वालों के लिए भी खुशबू प्रेरणा बन चुकी है उन्होंने भी कहा कि हम भी अपने घरों में टॉयलेट बनवाने जा रहे हैं,बहुओं के साथ अब बेटियों के लिए भी इस सुविधा के बारे में हमें सोचना है।
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