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लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के फ्रंटल संगठनों में होंगे बड़े बदलाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 16 Apr 2018 10:56 AM IST
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कांग्रेस
लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में स्थानीय स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। कांग्रेस हाईकमान ने पूर्वांचल के चार जिलों सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भी तीन जिलों के फ्रंटल संगठनों में बदलाव की तैयारी कर ली है।
पूर्वांचल से वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही और मऊ में प्राथमिकता के आधार पर बड़े बदलाव होंगे। हाईकमान को मिले फीडबैक के तहत इन सभी जिलों में फ्रंटल संगठन व प्रकोष्ठ ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। बदलाव के लिए युवा और सक्रिय सदस्यों की तलाश भी शुरू कर दी गई है।
लोकसभा चुनाव में यूपी की कुल 80 संसदीय सीटों में से पूर्वांचल में 27 सीटें हैं और इनमें से एक भी सीट कांग्रेस के पास नहीं है। इतना ही नहीं अगर बात 2014 के लोकसभा चुनाव की करें तो इन सभी 27 सीटों पर ज्यादातर कांग्रेस प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा सके थे।
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लोकसभा के बाद 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को कुछ खास हासिल नहीं हो पाया। ऐसे में अब हाईकमान ने पूर्वांचल के चार जिलों के फ्रं टल संगठनों में फेरबदल करने का मन बना लिया है।
हाईकमान के रुख से प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने इलाकाई नेताओं को वाकिफ भी करा दिया है।
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पूर्वांचल से वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही और मऊ में प्राथमिकता के आधार पर बड़े बदलाव होंगे। हाईकमान को मिले फीडबैक के तहत इन सभी जिलों में फ्रंटल संगठन व प्रकोष्ठ ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। बदलाव के लिए युवा और सक्रिय सदस्यों की तलाश भी शुरू कर दी गई है।
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लोकसभा चुनाव में यूपी की कुल 80 संसदीय सीटों में से पूर्वांचल में 27 सीटें हैं और इनमें से एक भी सीट कांग्रेस के पास नहीं है। इतना ही नहीं अगर बात 2014 के लोकसभा चुनाव की करें तो इन सभी 27 सीटों पर ज्यादातर कांग्रेस प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा सके थे।
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लोकसभा के बाद 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को कुछ खास हासिल नहीं हो पाया। ऐसे में अब हाईकमान ने पूर्वांचल के चार जिलों के फ्रं टल संगठनों में फेरबदल करने का मन बना लिया है।
हाईकमान के रुख से प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर ने इलाकाई नेताओं को वाकिफ भी करा दिया है।
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कांग्रेस के ये संगठन नहीं है सक्रिय
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हाल ही में कांग्रेस के फ्रंटल संगठनों, महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस, राष्ट्रीय छात्र संगठन, सेवादल पर एक-एक कर रिपोर्ट प्रसारित की थी। यह बताया था कि ये सभी संगठन सक्रिय नहीं हैं। खास तौर पर महिला संगठन और सेवादल तो पूरी तरह से निष्क्रिय है।
दोनों ही फ्रंटल संगठनों की ओर से हाल फिलहाल कोई बड़ा आयोजन तक नहीं किया गया। पार्टी के घोषित कार्यक्रमों में भी महिला संगठन की सहभागिता नाम मात्र की ही रहती है।
उधर, सेवादल तो महज वरिष्ठ पार्टी नेताओं के आगमन या किसी नेता के निधन पर श्रद्धांजलि देने तक रह गया है। एनएसयूआई भी बहुत सक्रिय नहीं है।
दोनों ही फ्रंटल संगठनों की ओर से हाल फिलहाल कोई बड़ा आयोजन तक नहीं किया गया। पार्टी के घोषित कार्यक्रमों में भी महिला संगठन की सहभागिता नाम मात्र की ही रहती है।
उधर, सेवादल तो महज वरिष्ठ पार्टी नेताओं के आगमन या किसी नेता के निधन पर श्रद्धांजलि देने तक रह गया है। एनएसयूआई भी बहुत सक्रिय नहीं है।