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मिशन 2019: कांग्रेस का पूर्वांचल पर फोकस, काशी से ही होगा नया प्रदेश अध्यक्ष
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 18 Apr 2018 04:40 PM IST
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कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने संकेत दिए हैं कि पार्टी का अगला प्रदेश अध्यक्ष काशी से ही हो सकता है। उनका कहना है कि बनारस पूर्वांचल का केंद्र है। इसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती है। लाग-लपेट के बगैर उन्होंने यह भी कह दिया कि बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद के बिना कोई भी काम कैसे सफल हो सकता है।
अमर उजाला से फोन पर बातचीत में राज बब्बर ने कहा कि पार्टी लोकसभा चुनाव और खासतौर पर पूर्वांचल पर फोकस कर रही है। नए अध्यक्ष पद के लिए बेदाग, अनुभवी जुझारू और युवा नेता को तरजीह दी जाएगी। बनारस सर्वोच्च प्राथमिकता में है। हालांकि उन्होंने नेता का नाम नहीं बताया। इतना ही कहा- समय आने दीजिए। जल्दी ही घोषणा हो जाएगी।
नए प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए विधानसभा चुनाव के दौरान से ही तैयारी चल रही थी। इसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र, पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी तथा पूर्व मंत्री डॉ. संजय सिंह का नाम चल रहा था।
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पार्टी हाईकमान के पास यूं तो सभी दावेदारों की राजनीतिक और व्यक्तिगत जन्मकुंडली है फिर भी गोपनीय सर्वे भी कराया जा चुका है। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं से भी फीडबैक लिया गया है।
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अमर उजाला से फोन पर बातचीत में राज बब्बर ने कहा कि पार्टी लोकसभा चुनाव और खासतौर पर पूर्वांचल पर फोकस कर रही है। नए अध्यक्ष पद के लिए बेदाग, अनुभवी जुझारू और युवा नेता को तरजीह दी जाएगी। बनारस सर्वोच्च प्राथमिकता में है। हालांकि उन्होंने नेता का नाम नहीं बताया। इतना ही कहा- समय आने दीजिए। जल्दी ही घोषणा हो जाएगी।
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नए प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए विधानसभा चुनाव के दौरान से ही तैयारी चल रही थी। इसके लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, पूर्व सांसद डॉ. राजेश मिश्र, पूर्व विधायक ललितेश पति त्रिपाठी तथा पूर्व मंत्री डॉ. संजय सिंह का नाम चल रहा था।
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पार्टी हाईकमान के पास यूं तो सभी दावेदारों की राजनीतिक और व्यक्तिगत जन्मकुंडली है फिर भी गोपनीय सर्वे भी कराया जा चुका है। स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं से भी फीडबैक लिया गया है।
भाजपा काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष पद पाने की जुगाड़ में लगे कई नेता
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भाजपा काशी क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष लक्ष्मण आचार्य को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया, तब से यह पद खाली चल रहा है। इस पद पर नए चेहरों को लेकर पार्टी में तलाश शुरू हो गई है। इस दौड़ में शामिल नेताओं ने जुगाड़ लगाने का काम शुरू कर दिया है।इनमें ब्राह्मण, ठाकुर, भूमिहार और अनुसूचित जाति के चेहरे हैं। पार्टी में चुनावी समीकरण को देखा जा रहा है। ज्यादातर संभावना भूमिहार और अनुसूचित जाति के चेहरे पर जताई जा रही है।
पार्टी सूत्रों की मानें तो इसे लेकर प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व दोनों के पास लोगों ने अपनी पैरवी पहुंचानी शुरू करा दी है। पार्टी के रणनीतिकार आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए क्षेत्रीय अध्यक्ष के पद पर ऐसा चेहरा बैठाने में जुटे हैं जिसका लाभ मिल सके और विरोध भी न होने पाए। अब तक के समीकरण को देखते हुए अनुसूचित जाति, भूमिहार के कोटे से क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
जोड़ तोड़ की राजनीति करने वालों ने अपना-अपना गोल बना लिया है। काशी क्षेत्र के नेताओं को अपनी ओर मिलाने का काम भी शुरू हो गया है ताकि बैठकों और राय शुमारी में उनका नाम उछालने में मदद कर सके।
इससे क्षेत्रीय अध्यक्ष पद पर बने रहने की संभावना उनकी प्रबल हो जाएगी। क्षेत्रीय अध्यक्ष से एक पद नीचे वाले पदाधिकारी भी अपनी बिसात बिछाने में लगे हैं ताकि प्रोन्नति के नाम पर उन्हें क्षेत्रीय अध्यक्ष पद आसानी से मिल जाए।
पार्टी सूत्रों की मानें तो इसे लेकर प्रदेश नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व दोनों के पास लोगों ने अपनी पैरवी पहुंचानी शुरू करा दी है। पार्टी के रणनीतिकार आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए क्षेत्रीय अध्यक्ष के पद पर ऐसा चेहरा बैठाने में जुटे हैं जिसका लाभ मिल सके और विरोध भी न होने पाए। अब तक के समीकरण को देखते हुए अनुसूचित जाति, भूमिहार के कोटे से क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
जोड़ तोड़ की राजनीति करने वालों ने अपना-अपना गोल बना लिया है। काशी क्षेत्र के नेताओं को अपनी ओर मिलाने का काम भी शुरू हो गया है ताकि बैठकों और राय शुमारी में उनका नाम उछालने में मदद कर सके।
इससे क्षेत्रीय अध्यक्ष पद पर बने रहने की संभावना उनकी प्रबल हो जाएगी। क्षेत्रीय अध्यक्ष से एक पद नीचे वाले पदाधिकारी भी अपनी बिसात बिछाने में लगे हैं ताकि प्रोन्नति के नाम पर उन्हें क्षेत्रीय अध्यक्ष पद आसानी से मिल जाए।