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ग्रामीणों संग विरोध, हुआ हंगामा

Wed, 05 Feb 2020 12:21 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 05 Feb 2020 12:21 AM IST
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conflict on school
मृतक आंचल का घटना स्थल का स्कूल के परिसर में रोते बिलखते परिजन। - फोटो : MIRZAPUR
मिर्जापुर। मासूम आंचल की मौत के बाद नाराज परिजन सुबह आठ बजे विद्यालय पहुंच गए। परिजनों के साथ गांव के लोग भी कार्रवाई के लिए पहुंच गए। तभी विद्यालय की एक शिक्षामित्र के घर वाले वहां पहुंचे और आंचल के परिवार के लोगों को वहां से हटाने का दबाव बनाने लगे। शिक्षामित्र के परिजन कह रहे थे कि कार्रवाई रसोइयों पर कराई जाए, किसी अध्यापक या शिक्षामित्र के खिलाफ कार्रवाई न की जाए। इसके लिए सभी आंचल के परिजनों पर दबाव बनाने लगे। विरोध करने पर शिक्षामित्र के परिवार से पुलिस में कार्यरत एक युवक परिजनों को धमकाने लगा। इसको लेकर विवाद हो गया। दोनों पक्षों से मारपीट हो गई। कुछ लोगों ने ईंट पत्थर भी चलाए। सूचना पर पुलिस पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा कर मामला शांत कराया।
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परिजन कार्रवाई के लिए सुबह विद्यालय पहुंचे थे। इस दौरान मारपीट होने पर सीओ सुशील कुमार यादव पहुंचे। पुलिस ने भीड़ हटाने का प्रयास किया, पर ग्रामीण डटे रहे। डीएम को बुलाने की मांग पर परिजन अड़े रहे। दो घंटे बाद पुलिस ने ग्रामीणों को हटाने की कोशिश की तो आंचल के पिता भागीरथी ने साफ कह दिया कि डीएम को मौके पर बुलाइए तभी यहां से जाएंगे। जबरदस्ती की गई तो जहां बेटी की मौत हुई है, वहीं आग लगाकर जान दे देंगे। इसके बाद सीओ ने डीएम के आने की बात परिजनों को बताई। डीएम के आने पर भागीरथी इंसाफ मांगते हुए उनके पैरों में गिर गया। डीएम ने उसे उठाते हुए ढांढस बंधाया। भागीरथी ने डीएम से कहा कि रसोइयाें के साथ शिक्षामित्र भी इस घटना में बराबर के भागीदार हैं। उनको भी सजा दी जानी चाहिए। डीएम के आश्वासन पर परिजन घर गए। सीओ लालगंज सुशील कुमार यादव ने बताया कि मारपीट नहीं हुई है। विवाद के दौरान पुलिस ने मामले को शांत करा दिया।
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प्राथमिक विद्यालय रामपुर अतरी में नियुक्त सभी रसोइयों को मंगलवार दोपहर पुलिस गिरफ्तार कर ले गई। छह रसोइयों में रीता, नगीना, कलावती के पति नहीं हैं। इनके बच्चे भी नाबालिग हैं। ऐसे में इन बच्चों के खाने-पीने का संकट हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बलि का बकरा रसोइयों को बनाया जा रहा है। स्कूल में नियुक्त शिक्षामित्रों का सिर्फ वेतन रोका गया है। जबकि जिम्मेदारी स्कूल में नियुक्त अध्यापक और शिक्षामित्र सभी की है, पर प्रशासन शिक्षामित्रों को बचा रहा है। परिजनों ने भी विद्यालय के सभी लोगों को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की।
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