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आयुष्मान भारत योजना से बदलेगी देश की तस्वीर, सुधरेगी आमजन की सेहत

Fri, 10 Aug 2018 03:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Fri, 10 Aug 2018 03:46 PM IST
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Conference on health policy in BHU
आयुष्मान भारत गुणवत्ता सम्मेलन का उद्वघाटन करते कुलपति राकेश भट्नागर - फोटो : अमर उजाला
आयुष्मान भारत की ओर से राष्ट्रीय गुणवत्ता सम्मेलन (उत्तरी क्षेत्र) का बुधवार को उद्घाटन हुआ। इस दौरान योजना के तहत लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं सहित कई योजनाओं पर चर्चा की गई। कांफ्रेंस का उद्घाटन करने के बाद कुलपति प्रो. राकेश भटनागर ने इस योजना को सभी के लिए उपयोगी बताया।
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उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं में बेहतरी से देश की तस्वीर तो बदलेगी ही लोगों की सेहत में सुधार भी होगा। बीएचयू शताब्दी कृषि सभागार में आयोजित सम्मेलन के पहले दिन कुलपति ने कहा कि शहर और गांव में दी जाने वाली सुविधाओं की मानीटरिंग करने की जरूरत है। योजना के तहत जरूरतमंदों को मुफ्त सुविधाएं मिलेंगी, जिससे कि उन्हें इधर उधर भटकना नहीं पड़ेगा।
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क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के महासचिव आर पी सिंह ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज का समर्थन करने के साथ वित्तीय जोखिम संरक्षण, गुणवत्ता स्वास्थ्य सेवाओं की सहायता करना और सभी के लिए सुरक्षित, प्रभावी और किफायती स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच मुहैया करने में मदद करना है। इस दौरान एनएबीएच, एनएबीएल, एनएबीसीबी जैसे बोर्ड से गुणवत्तामानक की जानकारी दी। 
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स्वास्थ्य विभाग की कमियों पर भी चर्चा 

Conference on health policy in BHU
दो दिवसीय आयुष्मान भारत गुणवत्ता सम्मेलन में शामिल लोग - फोटो : अमर उजाला
यूपी में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार करना हमारे लिए एक चुनौती है, क्योंकि ज्यादा से ज्यादा 7 से 8 प्रतिशत अस्पताल ही अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार गुणवत्ता से पूर्ण है। इस योजना को यूपी में शुरू होने से यहां व्यवस्थाएं तेजी से सुधरेंगी और विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

समारोह में स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त कमियों पर भी चर्चा हुई। शाम को पहुंचे नीति आयोग के सदस्य वीके पाल की मौजूदगी में अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दूबे ने कहा कि अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक, स्टाफ की कमी है। इससे सेवा पर प्रभाव पड़ता है। इसके लिए जल्द से जल्द चयन कर सभी जरूरतें पूरी कर ली जाएंगी।

जरूरत पड़ी तो मेडिकल कॉलेजों के रिटायर्ड प्रोफेसरों को भी सेवा का मौका मिलेगा। उन्होंने बनारस के जिला, मंडलीय अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की कमी सहित अन्य समस्याओं के बारे में बताया। इस दौरान आदिल जैनुल भाई, बिजॉन मिश्रा सहित आदि मौजूद रहे।
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