{"_id":"61e5ba9b0dc6e51f61174123","slug":"complaint-on-complaint-quorum-completed-in-the-name-of-action-varanasi-news-vns6341077129","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिकायत पर शिकायत, कार्रवाई के नाम पर कोरम पूरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिकायत पर शिकायत, कार्रवाई के नाम पर कोरम पूरा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शिकायतों पर शिकायतें, लेकिन कार्रवाई के नाम पर बस कोरम पूर्ति। जी हां संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में दो साल बाद भी सुरक्षा के नाम पर घोटाला करने वाले आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। कमेटी पर कमेटी बनती रही, रिपोर्ट दर रिपोर्ट तैयार होती रही, लेकिन फाइल आगे नहीं बढ़ सकी। जांच का आलम तो यह है कि 2019 और 2020 में दो बार विश्वविद्यालय में जांच रिपोर्ट भी बनी लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सुरक्षा के लिए अनुबंधित की गई सुरक्षा एजेंसी के साथ मिलकर लाखों रुपये का घोटाला किया गया था। इसमें ऑडिट टीम और विश्वविद्यालय की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता की बात कही थी। इलाहाबाद की ऑडिट रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसी को भुगतान में अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन का मामला सामने आया था। बिना किसी सक्षम अधिकारी के सत्यापन के ही 24 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया था। यह तो केवल तीन महीने का आंकड़ा था दो साल में कितने भुगतान हुए होंगे इसकी भी जांच होनी चाहिए।
आडिट टीम को इसी कारण सभी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। 2019 में सौंपी गई ऑडिट और जांच रिपोर्ट के बाद भी विश्वविद्यालय ने ना तो दोषियों को चिन्हित किया और ना कोई कार्रवाई। इसके बाद सितंबर 2020 में भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा घोटाले में संलिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए कमेटी का गठन किया गया लेकिन जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। इसकी अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
विनयाधिकारी, सुरक्षाधिकारी, लेखानुभाग की मिली थी संलिप्तता
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रो. राम किशोर त्रिपाठी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि सुरक्षा संविदा कर्मियों के भुगतान में वित्तीय नियमों और अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन किया गया। इसमें तत्कालीन विनयाधिकारी, सुरक्षाधिकारी, लेखानुभाग और सुरक्षा एजेंसी संलिप्तता है। जानबूझ कर किए गए अनियमित भुगतान द्वारा विश्वविद्यालय को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई थी वित्तीय अनियमितता
आडिट विभाग इलाहाबाद के उपनिदेशक एसपी चौरसिया ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि विश्वविद्यालय के लेखानुभाग की ओर सेवांछित अभिलेख मूलरूप में नहीं उपलब्ध कराए गए। ऐसे में सभी भुगतान का परीक्षण संभव नहीं हो सका। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर परीक्षण में भारी वित्तीय अनियमितताएं मिलीं।
सुरक्षा एजेंसी हो चुकी है ब्लैक लिस्टेड
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने बांबे सिक्योरिटी कंसल्टेंसी एवं सर्विसेज को ब्लैक लिस्टेड किया जा चुका है। सुरक्षा एजेंसी ने 11 अप्रैल 2016 से फरवरी 2018 तक विश्वविद्यालय में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई थी। सुरक्षा एजेंसी का अनुबंध 10 अप्रैल 2017 में समाप्त होने के बाद भी एजेंसी ने फरवरी 18 तक काम किया था।
नहीं मिले थे कई महीनों के कागजात
विश्वविद्यालय के लेखानुभाग की ओर से दिसंबर 2016, सितंबर 2017, अक्तूबर 2017 और मार्च 2017 से फरवरी 2018 तक के भुगतान से संबंधित कागजात उपलब्ध ही नहीं कराए गए। इसके कारण इनकी जांच नहीं हो सकी।
विज्ञापन
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सुरक्षा के लिए अनुबंधित की गई सुरक्षा एजेंसी के साथ मिलकर लाखों रुपये का घोटाला किया गया था। इसमें ऑडिट टीम और विश्वविद्यालय की जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितता की बात कही थी। इलाहाबाद की ऑडिट रिपोर्ट में सुरक्षा एजेंसी को भुगतान में अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन का मामला सामने आया था। बिना किसी सक्षम अधिकारी के सत्यापन के ही 24 लाख रुपये से अधिक का भुगतान कर दिया गया था। यह तो केवल तीन महीने का आंकड़ा था दो साल में कितने भुगतान हुए होंगे इसकी भी जांच होनी चाहिए।
विज्ञापन
आडिट टीम को इसी कारण सभी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। 2019 में सौंपी गई ऑडिट और जांच रिपोर्ट के बाद भी विश्वविद्यालय ने ना तो दोषियों को चिन्हित किया और ना कोई कार्रवाई। इसके बाद सितंबर 2020 में भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने सुरक्षा घोटाले में संलिप्त अधिकारियों व कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए कमेटी का गठन किया गया लेकिन जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। इसकी अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
विनयाधिकारी, सुरक्षाधिकारी, लेखानुभाग की मिली थी संलिप्तता
विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रो. राम किशोर त्रिपाठी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि सुरक्षा संविदा कर्मियों के भुगतान में वित्तीय नियमों और अनुबंध की शर्तों का खुला उल्लंघन किया गया। इसमें तत्कालीन विनयाधिकारी, सुरक्षाधिकारी, लेखानुभाग और सुरक्षा एजेंसी संलिप्तता है। जानबूझ कर किए गए अनियमित भुगतान द्वारा विश्वविद्यालय को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई थी वित्तीय अनियमितता
आडिट विभाग इलाहाबाद के उपनिदेशक एसपी चौरसिया ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा था कि विश्वविद्यालय के लेखानुभाग की ओर सेवांछित अभिलेख मूलरूप में नहीं उपलब्ध कराए गए। ऐसे में सभी भुगतान का परीक्षण संभव नहीं हो सका। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर परीक्षण में भारी वित्तीय अनियमितताएं मिलीं।
सुरक्षा एजेंसी हो चुकी है ब्लैक लिस्टेड
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने बांबे सिक्योरिटी कंसल्टेंसी एवं सर्विसेज को ब्लैक लिस्टेड किया जा चुका है। सुरक्षा एजेंसी ने 11 अप्रैल 2016 से फरवरी 2018 तक विश्वविद्यालय में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाई थी। सुरक्षा एजेंसी का अनुबंध 10 अप्रैल 2017 में समाप्त होने के बाद भी एजेंसी ने फरवरी 18 तक काम किया था।
नहीं मिले थे कई महीनों के कागजात
विश्वविद्यालय के लेखानुभाग की ओर से दिसंबर 2016, सितंबर 2017, अक्तूबर 2017 और मार्च 2017 से फरवरी 2018 तक के भुगतान से संबंधित कागजात उपलब्ध ही नहीं कराए गए। इसके कारण इनकी जांच नहीं हो सकी।