खुशखबरी: अगले छह महीने में काशी को मिलेगी ये सौगात, कैबिनेट से भी मिली मंजूरी
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट से सोमवार को मंजूरी मिलने के बाद जिले में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार, पहली खेप में जिले को 50 इलेक्ट्रिक बस मिलेंगी। हालांकि पर्यावरण के अनुकूल इन बसों का संचालन शुरू होने में लगभग छह माह का समय लगेगा।
डीजल वाहनों से बढ़ते प्रदूषण की समस्या से निजात के लिए इलेक्ट्रिक बसों को पब्लिक ट्रांसपोर्ट का बेहतर विकल्प माना गया है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम लगभग डेढ़ साल से तैयारी कर रहा। इन बसों के चार्जिंग स्टेशन और वर्कशाप के लिए मिर्जामुराद क्षेत्र के गौर मधुकर शाहपुर गांव में डेढ़ एकड़ जमीन चिह्नित की गई है।
बीते दिनों जिला प्रशासन और रोडवेज के अधिकारियों ने जमीन का निरीक्षण भी किया था। शासन स्तर से 50 चार्जिंग स्टेशन और वर्कशाप बनाने की जिम्मेदारी सीएंडडीएस को सौंप कर करीब 18 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। रोडवेज अधिकारियों के अनुसार, ऊबड़खाबड़ पोखरे के आकार की जमीन को ही पाटने में लगभग एक माह का समय लगेगा। इसके बाद इस पर काम शुरू हो पाएगा।
पहली खेप में 50 इलेक्ट्रिक बस मिलेंगी। चार्जिंग स्टेशन और वर्कशाप का निर्माण कार्य पूरा होते ही बसों का संचालन शुरू करा दिया जाएगा। -स्वामी नाथ पाठक, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, सिटी ट्रांसपोर्ट
शहर में तय किए गए चार रूट
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन के लिए शहर में चार रूट तय किए गए हैं। इसके तहत बाबतपुर एयरपोर्ट से लंका, राजघाट से लंका, कैंट से लंका और रामनगर से लंका होते हुए कैंट मार्ग पर इलेक्ट्रिक बसों की आवाजाही सुनिश्चित करने की कार्ययोजना बनाई गई है।
रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार, शहर की सड़कों पर अतिक्रमण और जाम इलेक्ट्रिक बसों के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। इलेक्ट्रिक बसों के बेहतर रखरखाव के लिए सड़कों को अतिक्रमण और जाम से मुक्त रखना होगा।
ये होंगे फायदे
पर्यावरण और इससे जुड़ी भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए इलेक्ट्रिक बसों अहम साबित हो सकती हैं। इनसे वायु और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इनमें लगे मोटर से कार्बन उत्सर्जन लगभग न के बराबर होता है। एक यूनिट बिजली से चार्ज होने पर यह बस एक किलोमीटर तक चलेगी। इससे डीजल के आयात पर होने वाला खर्च घटेगा।
अन्य वाहनों के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहनों के मेंटेनेंस और रखरखाव पर कम खर्च आता है। इसे बहुत ज्यादा सर्विसिंग की जरूरत नहीं होती है। आम वाहनों के मुकाबले इलेक्ट्रिक वाहन कम वाइब्रेट करते हैं और यात्रा सुविधाजनक होती है। इलेक्ट्रिक बस में आग लगने का खतरा नहीं होगा। डिस्प्ले बोर्ड से स्टापेज की जानकारी मिलेगी। सुरक्षा के लिहाज से बस में इमरजेंसी बटन लगा होगा और यात्री सीसी कैमरे की निगरानी में रहेंगे।