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इंदौर से सीखेंगे सफाई: इंदौर जैसी सफाई चाहिए पर काशी में सिर्फ एक रोड स्वीपर मशीन, इंदौर के पास 27
Wed, 30 Jul 2025 03:54 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Wed, 30 Jul 2025 03:54 PM IST
सार
Varanasi News: इंदौर जैसी सफाई के लिए वाराणसी नगर निगम का बजट करीब छह गुना बढ़ाना होगा। वहीं सफाई के लिए नगर निगम काशी के पास एक रोड स्वीपर मशीन है, जबकि इंदौर नगर निगम के पास 27 मशीनें हैं।
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काशी
- फोटो : adobe
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विस्तार
इंदौर नगर निगम की टीम काशी में सफाई का मॉडल तो तैयार करके दे देगी लेकिन यह काम आसान नहीं है। काशी को इंदौर जैसा स्वच्छ बनाना है तो वाराणसी नगर निगम को अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या दोगुनी करनी होगी। नगर निगम का बजट करीब छह गुना बढ़ाना होगा। इसके लिए वाराणसी को सालाना बजट 1463 करोड़ से करीब 8500 करोड़ के करीब पहुंचाना होगा।
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नगर निगम काशी के पास एक रोड स्वीपर मशीन है, जबकि इंदौर नगर निगम के पास 27 मशीनें हैं। एक मशीन की कीमत करीब 70 लाख के करीब है। यानी इतनी मशीनें खरीदने के लिए नगर निगम को करीब 20 करोड़ रुपये का बजट चाहिए। काशी में सड़क की सफाई पर करीब 99 करोड़ का खर्च होता है। वहीं इंदौर इस मद में 124 करोड़ रुपये खर्च करता है।
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बनारस में अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या अभी करीब 6600 है जबकि इंदौर में यह संख्या 11000 हजार है। काशी को इसकी संख्या भी दोगुनी करनी होगी। इससे नगर निगम पर हर महीने करीब 15 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार बढ़ेगा।
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अभी वाराणसी हर महीने करीब 15 करोड़ रुपये का वेतन जारी करता है। काशी गलियों का शहर है। इसलिए कर्मियों की संख्या तीन गुनी तक बढ़ानी होगी। यहां 3500 सफाई मित्र हैं जबकि इंदौर में इनकी संख्या 7000 है।
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सड़कों पर बढ़ानी होगी 20 गुना सफाई
काशी में रोजाना 44 किमी सड़कों की सफाई होती है। इसे तीन समय रोजाना करते हुए बढ़ाकर करीब 600 किमी रोजाना पर ले जाना होगा। इसके लिए 20 गुना सफाई बढ़ानी होगी। अभी नगर निगम के पास सफाई कर्मचारियों की संख्या 5000 के करीब है, जिसे बढ़ाकर करीब 20 हजार करना होगा। इसी के साथ कूड़ा कलेक्शन गाड़ियों की संख्या 200 से बढ़ाकर करीब 800 करनी होगी। इसके लिए आठ करोड़ का बजट चाहिए। यहां हाई प्रेशर जेट और अल्ट्रा मॉडर्न स्वीपर्स भी नहीं है।
सार्वजनिक शौचालयों की संख्या बढ़ानी होगी
नगर निगम की जनसंख्या के हिसाब से 400 सार्वजनिक शौचालय होने चाहिए जो कि वर्तमान में सिर्फ 50 हैं। शहर से कूड़ाघर खत्म करने होंगे और कूड़े के निस्तारण का प्लांट को शुरू करना होगा। शहर के दुकानदारों को जागरुक करना होगा और सभी दुकानदारों के यहां कूड़ादान अनिवार्य करना होगा।