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रंगदारी मामलाः पुलिस अधिकारी के इशारे पर विवेचना से हटा पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति का नाम

Tue, 20 Nov 2018 10:26 AM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी Updated Tue, 20 Nov 2018 10:26 AM IST
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Clean chit to former minister gayatri prajapati by police officer in extortion case
गायत्री प्रसाद प्रजापति
वाराणसी के दशाश्वमेध थाने में पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ दर्ज रंगदारी के मामले की विवेचना में पुलिस के एक उच्चाधिकारी के निर्देश पर लीपापोती करने की कोशिश की गई। हालांकि इसे एसएसपी ने पकड़ लिया और इंस्पेक्टर दशाश्वमेध बालकृष्ण शुक्ला को रविवार को निलंबित कर प्रकरण की विवेचना एसपी क्राइम की मॉनिटरिंग में क्राइम ब्रांच को सौंप दी।
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साथ ही, पूरे प्रकरण की जांच एसपी ग्रामीण को सौंप कर रिपोर्ट तलब की है। वहीं, एसपी सिटी और सीओ दशाश्वमेध से एसएसपी ने कहा है कि ऐसे गंभीर मामलों को सिर्फ थानेदारों के सहारे ना छोड़ा करें। बल्कि, प्रत्येक स्तर पर पर्यवेक्षण गंभीरता से किया करें।
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30 जून 2018 को दशाश्वमेध थाने में जंगमबाड़ी निवासी फर्नीचर व्यापारी की तहरीर पर लखनऊ जेल में निरुद्ध पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति के खिलाफ रंगदारी मांगे जाने सहित अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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मामला सोनभद्र जिले के बालू ठेके से जुड़े कमीशन से संबंधित है। पुलिस ने तफ्तीश के दौरान लखनऊ से गायत्री के करीबी मान सिंह रावत और अभिषेक तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। साथ ही, गायत्री को वारंट बी के जरिए अदालत से इजाजत लेकर वाराणसी लाकर पूछताछ करने की तैयारी थी।

इसी बीच इंस्पेक्टर दशाश्वमेध बालकृष्ण शुक्ला ने तत्कालीन सीओ दशाश्वमेध अभिनव यादव को विवेचना कर प्रकरण से संबंधित जो रिपोर्ट सौंपी उसमें गायत्री का कोई दोष नहीं दर्शाया। बताया जाता है कि ऐसा एक उच्चाधिकारी के इशारे पर इंस्पेक्टर दशाश्वमेध ने किया था।

उन्होंने विवेचना कर रिपोर्ट तत्कालीन सीओ दशाश्वमेध अभिनव यादव को सौंपी तो उन्होंने आपत्ति जताते हुए उसे वापस लौटा दिया। एसएसपी ने दशाश्वमेध सीओ स्नेहा तिवारी और उनकी सर्किल के थानेदारों की बैठक में इंस्पेक्टर दशाश्वमेध की गलती पकड़ कर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और प्रकरण की विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंप दी। 

बड़े अफसर से मिल कर गायत्री के बेटे ने मांगी थी मदद

रंगदारी का मुकदमा दर्ज होने के बाद गायत्री का बेटा बनारस में तैनात पुलिस के उच्चाधिकारी से मिला था। उक्त उच्चाधिकारी ने नियम-कानून का हवाला देते हुए दशाश्वमेध इंस्पेक्टर पर दबाव बनाया कि मुख्य आरोपी गायत्री का नाम विवेचना से हटा दें।

इसके लिए उच्चाधिकारी ने आरोपी गायत्री के हलफनामे और उसकी पत्नी के आवेदन पर गंभीरता से विचार करने का निर्देश भी इंस्पेक्टर को दिया, जबकि ऐसा अधिकारी करते नहीं है। इस प्रकरण में प्रदेश की जेलों से संबंधित एक अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। दोनों अफसरों के निर्देश के अनुपालन और इशारे के क्रम में ही इंस्पेक्टर दशाश्वमेध ने लिखा पढ़ी कर विवेचना से गायत्री का नाम हटाया और उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी।

मामले को लेकर एसएसपी आनंद कुलकर्णी का कहना है कि प्रथमदृष्टया दोष इंस्पेक्टर दशाश्वमेध का उजागर होने पर उन्हें निलंबित कर विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। प्रकरण की जांच एसपी ग्रामीण को सौंप कर उनसे रिपोर्ट मांगी गई है। एसपी सिटी और सीओ दशाश्वमेध को कहा गया है कि थानेदारों के क्रियाकलापों पर पैनी नजर रखें। पर्यवेक्षण में किसी भी स्तर पर चूक ना होने पाए।  
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