श्रीकाशी सुमेरु पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि मणिपुर पिछले तीन महीने से जल रहा है। इसके पीछे चीन और पड़ोसी देशों की भूमिका है। पूर्व की सरकारों ने वहां की जमीनों को अफीम की खेती का केंद्र बनाया। सरकार ने अध्यादेश लाकर उस पर रोक लगाई। उसके बाद से ही वहां खून खराबा चल रहा है। हम सभी शांति पाठ के माध्यम से वहां जल्द ही अमन,चैन ,शांति की कामना करते हैं।
वह सोमवार को अस्सी स्थित सुमेरुपीठ में संतों के चिंतन शिविर को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मणिपुर हिंसा, ज्ञानवापी के साथ ही देश के विकास पर चर्चा हुई। चिंतन शिविर में संतों ने शांति पाठ किया। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया। स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि मुस्लिम पक्ष जान रहा है कि अगर एएसआई की जांच हो जाएगी तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। यह जो ज्ञानवापी है इसका उल्लेख शिवपुराण और अन्य पुराणों में आता है। मंदिर के अंदर त्रिशूल, डमरू, कमल का चित्र मिला है। मां शृंगार गौरी स्थापित हैं। उन्होंने कहा कि वह हिंदुओं का स्थान था। साढ़े तीन सौ वर्ष पूर्व उसे तोड़ा गया और अब उसका हिसाब चुकता करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि हमें न्यायालय पर भरोसा है और जल्द ही भव्य भगवान शिव का मंदिर बनकर रहेगा। विपक्षी पार्टियों के गठबंधन पर कहा कि यह सभी केरल और कश्मीर जैसे मुद्दों पर मौन हो जाते हैं। कर्नाटक के मुद्दे पर सभी 26 दल के नेता नहीं बोल रहे हैं।