छठ महापर्व 8 नवंबर से: वाराणसी में गाद और मलबे से पटे घाट, गंदगी साफ करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
गंगा का जलस्तर घटने के बाद से वाराणसी के विभिन्न घाटों पर दलदल जैसी स्थिति बनी हुई है। लिहाजा, इस बार श्रद्धालुओं को अघ्र्य देने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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चार दिवसीय सूर्य उपासना और आरोग्य सौभाग्य व सर्व सुख प्रदाता छठ व्रत आठ नवंबर से 11 नवंबर तक मनाया जाएगा। छठ पूजा में अब मात्र दो से तीन दिन ही बाकी रह गए हैं, मगर वाराणसी में प्रशासनिक स्तर पर तैयारी नाकाफी दिख रही है। घाटों की स्थिति अपनी दुर्दशा बयां कर रही है। गंगा का पानी घटने के बाद घाटों पर गाद और मलबा पड़ा है।
अधिकारियों के मुताबिक, घाटों की सफाई का काम पहले ही समाप्त हो गया होता, लेकिन जलस्तर बढ़ने के कारण बाधा पैदा हो गई थी। ऐसे में छठ समेत आगामी दिनों में घाटों पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक आयोजन को सफलता पूर्वक संपन्न कराने के लिए घाट की सफाई नगर निगम प्रशासन के लिए चुनौती बन गई है।
अस्सी समेत विभिन्न घाटों पर गाद और मलबे ने छठ व्रतियों को चिंता में डाल दिया है। हालांकि कई घाटों पर साफ-सफाई का काम चल रहा है। लेकिन चार दिवसीय सूर्य उपासना के पहले दिन आठ नवंबर तक काम पूरा हो पाएगा या नहीं, इस पर अभी संशय है। हस साल छठ के मौके पर वाराणसी के घाटों पर भारी भीड़ उमड़ती है। 84 घाटों पर भक्त जुटते हैं। समय से घाटों को गाद मुक्त नहीं किया गया तो लोगों को समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
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8 नवंबर को तुलसी घाट पर नाग नथैया लीला
गंगा का जलस्तर घटने के बाद घाट किनारे गंगा द्वारा बहाकर लाई गाद और मलबा एकत्र होने से स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्सी घाट से लेकर भदैनी घाट तक मलबा पड़ा हुआ है। दीपावली के बाद 8 नवंबर को तुलसी घाट पर नाग नथैया लीला का आयोजन होगा।
गंगा के जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी ने आयोजकों को चिंता में डाल दिया था, लेकिन गिरावट के बाद तैयारियों ने गति पकड़ ली है। आयोजन के सिलसिले में गत दिवस पुलिस कमिश्नरेट की ओर से अधिकारियों ने आयोजन स्थल का जायजा लिया और संकट मोचन महंत से जानकारी ली। महंत ने बताया कि मेला धूमधाम से होगा, तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। नाग नथैया के बाद घाटों पर सूर्य उपासना का पर्व डाला छठ मनाया जाएगा।
छठ पर्व का पुण्यकाल
ज्योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार इस बार चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व आठ नवंबर सोमवार से प्रारंभ होकर 11 नवंबर गुरुवार तक चलेगा। कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सात नवंबर रविवार को शाम 4:23 से आठ नवंबर सोमवार को दिन में 1:17 तक, आठ नवंबर सोमवार को व्रत का प्रथम नियम संयम।
- कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि आठ नवंबर सोमवार को दिन में 1:17 से नौ नवंबर मंगलवार को दिन में 10:36 तक नौ नवंबर मंगलवार को द्वितीय संयम एक समय खरना।
- कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि नौ नवंबर मंगलवार को दिन में 10:36 से 10 नवंबर बुधवार को प्रात: 8:26 तक 10 नवंबर बुधवार को व्रत के तृतीय संयम के अंतर्गत सायं काल अस्ताचल सूर्य देव को प्रथम अर्घ्य दिया जाएगा।
- कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 10 नवंबर बुधवार को 8:26 से 11 नवंबर गुरुवार को सुबह 6:50 तक रहेगा 11 नवंबर गुरुवार को 11 नवंबर गुरुवार को चतुर्थी एवं अंतिम संयम के अंतर्गत प्रात: काल उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देकर छठ व्रत का पारण किया जाएगा।