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जयापुर में हुए बदलावों पर जेएनयू में शोध
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Thu, 30 Jul 2015 02:22 AM IST
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वाराणसी। सांसद आदर्श ग्राम योजना से क्या वाकई देश के बदहाल गांवों की तस्वीर बदलेगी, यह जानने के लिए जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली के छात्र देश के उन गांवों की खाक छान रहे हैं, जिन्हें माननीय सांसदों ने इस योजना के तहत गोद लिया है। गोद लिए जाने के बाद गांवों में हुए बुनियादी, सामाजिक और आर्थिक बदलावों पर शोध किया जा रहा है। शोध कार्य के ही सिलसिले में जेएनयू की छात्रा रुचिका गर्ग दो दिनों से जयापुर में हैं। रुचिका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदर्श गांव में ‘महिला सशक्तिकरण’ की मौजूदा तस्वीर पर शोध करने आई हैं।
मूल रूप से बरेली की रहने वाली जेएनयू की शोध छात्रा रुचिका ने बताया कि पीएम के गोद लिए गांव जयापुर के बारे में काफी कुछ सामग्री इंटरनेट पर मौजूद है, मगर जमीनी हकीकत से रूबरू हुए बिना शोध कार्य पूरा नहीं हो सकता। दो दिनाें में उन्होंने पूरा गांव देखा। हर वर्ग और हर उम्र के लोगों से मिलीं। उनसे बात कीं। उनके जेहन में इस गांव को लेकर तस्वीर बिलकुल साफ है। जयापुर भी देश के अन्य गांवों की ही तरह है। यहां कुछ भी विशेष नहीं, सिवाय इसके कि इसे उस शख्स (नरेंद्र मोदी) ने संवारने का जिम्मा
लिया है, जिसके विकास के मॉडल का देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में डंका बज रहा है। कहा कि बुनियादी बदलाव तो दिख रहा है कि मगर महिलाएं आज भी अपने अधिकार को लेकर उतनी जागरूक नहीं जितना कि दक्षिण भारत की महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर हैं। आर्थिक पिछड़ापन आज भी यहां नजर आता है। ‘नवभारत’ नामक एनजीओ की सदस्य रुचिका कहती हैं, ‘हमारे अन्य सहयोगी भी
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अलग-अलग सांसदों के गांवों का दौरा कर रहे हैं। शोध के सिलसिले में मैं खुद भी अभी कई और गांवों का दौरा करूंगी। यह जानने का पूरा प्रयास होगा कि मोदी सरकार की सांसद आदर्श ग्राम योजना का कितना लाभ गांवों को मिल रहा है।’ बताया कि देश के प्रमुख सांसदों के गोद लिए गांव को शोधकार्य में शामिल किया गया है।
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मूल रूप से बरेली की रहने वाली जेएनयू की शोध छात्रा रुचिका ने बताया कि पीएम के गोद लिए गांव जयापुर के बारे में काफी कुछ सामग्री इंटरनेट पर मौजूद है, मगर जमीनी हकीकत से रूबरू हुए बिना शोध कार्य पूरा नहीं हो सकता। दो दिनाें में उन्होंने पूरा गांव देखा। हर वर्ग और हर उम्र के लोगों से मिलीं। उनसे बात कीं। उनके जेहन में इस गांव को लेकर तस्वीर बिलकुल साफ है। जयापुर भी देश के अन्य गांवों की ही तरह है। यहां कुछ भी विशेष नहीं, सिवाय इसके कि इसे उस शख्स (नरेंद्र मोदी) ने संवारने का जिम्मा
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लिया है, जिसके विकास के मॉडल का देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में डंका बज रहा है। कहा कि बुनियादी बदलाव तो दिख रहा है कि मगर महिलाएं आज भी अपने अधिकार को लेकर उतनी जागरूक नहीं जितना कि दक्षिण भारत की महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर हैं। आर्थिक पिछड़ापन आज भी यहां नजर आता है। ‘नवभारत’ नामक एनजीओ की सदस्य रुचिका कहती हैं, ‘हमारे अन्य सहयोगी भी
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अलग-अलग सांसदों के गांवों का दौरा कर रहे हैं। शोध के सिलसिले में मैं खुद भी अभी कई और गांवों का दौरा करूंगी। यह जानने का पूरा प्रयास होगा कि मोदी सरकार की सांसद आदर्श ग्राम योजना का कितना लाभ गांवों को मिल रहा है।’ बताया कि देश के प्रमुख सांसदों के गोद लिए गांव को शोधकार्य में शामिल किया गया है।