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Varanasi News: बदलो पुलिसिंग का तरीका, ध्वस्त करो ठगों का नेटवर्क
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पुलिस आयुक्त ने की साइबर समीक्षा बैठक, काशी, वरुणा और गोमती जोन साइबर प्रभारी 15 दिन में देंगे रिपोर्ट
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। साइबर अपराध के नए तरीकों और आधुनिक ठगी के तौर-तरीकों पर नकेल कसने के लिए वाराणसी पुलिस अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। सोमवार देर शाम कैंप कार्यालय में साइबर क्राइम समीक्षा गोष्ठी में पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कहा कि वाराणसी की पुलिसिंग में बदलाव जरूरी है। साइबर ठगों के केवल प्यादों तक न सीमित रहकर, उनके पूरे नेटवर्क को जड़ से ध्वस्त किया जाए। हर जोन के साइबर प्रभारी को 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी संसाधनों और इंटेलिजेंस को मजबूत करना ही काफी नहीं है, बल्कि शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई और समयबद्ध निस्तारण से ही जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
पुलिस आयुक्त ने साइबर अपराध के इकोसिस्टम को तोड़ने के लिए निर्देश दिए। म्यूल एकाउंट खुलवाने और संचालित करने वालों को चिह्नित कर जेल भेजने की बात कही। अवैध रूप से सिम जारी करने वाली एजेंसियों व डीलरों और फर्जी कॉल सेंटरों पर शिकंजा कसा जाए। एटीएम से पैसे निकालने वाले गिरोह की पहचान कर वित्तीय फ्रॉड की रकम को तुरंत होल्ड कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। बैठक में पुलिस उपायुक्त (अपराध) नीतू, पुलिस उपायुक्त राजेश कुमार पांडेय, अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) नृपेंद्र रहे।
एक साल में साइबर पर अंधाधुंध वार
पुलिस आयुक्त ने मोहित अग्रवाल ने बताया कि एक साल में साइबर अपराधियों पर लगातार वार किया गया। संगठित ठगी करने वाले 58 गिरोहों का भंडाफोड़ कर 277 अपराधियों को जेल भेजा गया। ''डिजिटल अरेस्ट'' के 5 मामलों में 36 आरोपी गिरफ्तार किए गए। इनसे 1.20 करोड़ नकद, वाहन और डिजिटल उपकरण बरामद हुए। फर्जी नौकरी, निवेश और विदेशी नागरिकों को ठगने वाले 15 अवैध कॉल सेंटरों का पर्दाफाश कर 175 आरोपी दबोचे गए। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की 17 हजार शिकायतों का समाधान हुआ। पीड़ितों के 25 करोड़ खाते में होल्ड कराए गए और प्रक्रिया पूरी कर 4.5 करोड़ पीड़ितों को वापस दिलवाए गए। ठगी में उपयोग 10 हजार मोबाइल नंबर और 8262 आईएमईआई नंबरों को हमेशा के लिए ब्लॉक कराया गया। 21 मुख्य आरोपियों पर गैंगस्टर के तहत कार्रवाई हुई। ठगों के झांसे व प्रलोभन में फंसे 550 नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया और 17 चार-पहिया वाहन जब्त किए गए। वहीं, स्कूल-कॉलेजों और चौराहों पर अभियान चलाकर 25 हजार से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के उपाय बताए गए।
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माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। साइबर अपराध के नए तरीकों और आधुनिक ठगी के तौर-तरीकों पर नकेल कसने के लिए वाराणसी पुलिस अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है। सोमवार देर शाम कैंप कार्यालय में साइबर क्राइम समीक्षा गोष्ठी में पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने कहा कि वाराणसी की पुलिसिंग में बदलाव जरूरी है। साइबर ठगों के केवल प्यादों तक न सीमित रहकर, उनके पूरे नेटवर्क को जड़ से ध्वस्त किया जाए। हर जोन के साइबर प्रभारी को 15 दिन में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए। पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी संसाधनों और इंटेलिजेंस को मजबूत करना ही काफी नहीं है, बल्कि शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई और समयबद्ध निस्तारण से ही जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
पुलिस आयुक्त ने साइबर अपराध के इकोसिस्टम को तोड़ने के लिए निर्देश दिए। म्यूल एकाउंट खुलवाने और संचालित करने वालों को चिह्नित कर जेल भेजने की बात कही। अवैध रूप से सिम जारी करने वाली एजेंसियों व डीलरों और फर्जी कॉल सेंटरों पर शिकंजा कसा जाए। एटीएम से पैसे निकालने वाले गिरोह की पहचान कर वित्तीय फ्रॉड की रकम को तुरंत होल्ड कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। बैठक में पुलिस उपायुक्त (अपराध) नीतू, पुलिस उपायुक्त राजेश कुमार पांडेय, अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) नृपेंद्र रहे।
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एक साल में साइबर पर अंधाधुंध वार
पुलिस आयुक्त ने मोहित अग्रवाल ने बताया कि एक साल में साइबर अपराधियों पर लगातार वार किया गया। संगठित ठगी करने वाले 58 गिरोहों का भंडाफोड़ कर 277 अपराधियों को जेल भेजा गया। ''डिजिटल अरेस्ट'' के 5 मामलों में 36 आरोपी गिरफ्तार किए गए। इनसे 1.20 करोड़ नकद, वाहन और डिजिटल उपकरण बरामद हुए। फर्जी नौकरी, निवेश और विदेशी नागरिकों को ठगने वाले 15 अवैध कॉल सेंटरों का पर्दाफाश कर 175 आरोपी दबोचे गए। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की 17 हजार शिकायतों का समाधान हुआ। पीड़ितों के 25 करोड़ खाते में होल्ड कराए गए और प्रक्रिया पूरी कर 4.5 करोड़ पीड़ितों को वापस दिलवाए गए। ठगी में उपयोग 10 हजार मोबाइल नंबर और 8262 आईएमईआई नंबरों को हमेशा के लिए ब्लॉक कराया गया। 21 मुख्य आरोपियों पर गैंगस्टर के तहत कार्रवाई हुई। ठगों के झांसे व प्रलोभन में फंसे 550 नागरिकों को सुरक्षित बचाया गया और 17 चार-पहिया वाहन जब्त किए गए। वहीं, स्कूल-कॉलेजों और चौराहों पर अभियान चलाकर 25 हजार से अधिक लोगों को साइबर सुरक्षा के उपाय बताए गए।
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