गणतंत्र के पहरुए: काशी में पहली और अंतिम बार गिरफ्तार हुए थे चंद्रशेखर आजाद
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महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ क्रांतिकारियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। विद्यापीठ के ललित कला विभाग के तहखाने में क्रांतिकारियों की गुप्त बैठकें हुआ करती थीं। चंद्रशेखर आजाद ने कई बार इस तहखाने में बैठक की थी। नागरी प्रचारिणी सभा के बृजेश पांडेय ने बताया कि बनारस ने चंद्रशेखर आजाद को आजादी का दीवाना और राष्ट्रभक्त बना दिया। 1921 में मात्र 15 वर्ष के चंद्रशेखर विद्यालय में धरना देते समय अंग्रेजों द्वारा पहली और अंतिम बार पकड़े गए थे।
उनके विद्या अर्जन का काम यहां से राष्ट्र की सेवा में बदल गया। बनारस में उन्हें सबसे पहला साथ क्रांतिकारी मन्मथनाथ गुप्ता का मिला। इसके बाद आजाद ने सशस्त्र क्रांति के माध्यम से देश को आजाद कराने वाले युवकों का एक दल बना लिया।
इसमें शचीन्द्रनाथ सान्याल, बटुकेश्वर दत्त, भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक, जयदेव आदि उनके सहयोगी थे। जेल में बेंतों की मार खाने के बाद चंद्रशेखर जब लौटे थे तो ज्ञानवापी पर काशीवासियों ने उनका फूल-माला से स्वागत किया था। इसके बाद से ही चंद्रशेखर तिवारी आजाद उपनाम से विख्यात हुए।
मिला था नोटिस चिपकाने का जिम्मा
बृजेश पांडेय ने बताया कि असहयोग आंदोलन के दौरान आजाद को संपूर्णानंद जी ने कांग्रेस की एक नोटिस कोतवाली के सामने लगाने की जिम्मेदारी दी। कड़ी सुरक्षा के बीच आजाद अपनी पीठ पर नोटिस चिपकाकर निकले।
जब वह कोतवाली पहुंचे तो उसकी दीवार से सटकर खड़े हो गए और पहरा देने वाले सिपाही से हालचाल लेने लगे। कुछ देर बाद जब सिपाही आगे बढ़ गया तो आजाद भी निकल लिए। कुछ देर बार जब नोटिस पर सिपाहियों की नजर पड़ी तो हंगामा शुरू हो गया।
कोरोना काल में सीआरपीएफ के कमांडेंट की सेवा नहीं भूलेगी काशी
कोरोना काल में बीते साल लॉकडाउन लगा तो लोग अपने घरों की चहारदीवारी तक सीमित होकर रह गए। ऐसे मुश्किल समय में पहडि़या स्थित 95 बटालियन सीआरपीएफ के तत्कालीन कमांडेंट नरेंद्र पाल सिंह ने अपने जवानों के साथ जरूरतमंदों को रोजाना खाद्य सामग्री वितरित करने के साथ ही शहर के अलग-अलग इलाकों में सैनिटाइजेशन का जिम्मा भी संभाला।
इस काम में कमांडेंट नरेंद्र पाल सिंह की पत्नी रंजीता सिंह ने भी उनका पूरा साथ दिया। वे मौजूदा समय में छत्तीसगढ़ में सीआरपीएफ के जवानों का नेतृत्व कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि मां-बाप, गुरुजनों, वर्दी और इस देश से बहुत कुछ मिला है। रोजाना प्रयास यही रहता है कि देश और समाज के लिए कुछ सकारात्मक करता रहूं।