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ओलंपिक में देश के लिए सोना जीतना चाहते हैं शिवपाल, भाला फेंक के लिए किया क्वालीफाई

Fri, 13 Mar 2020 02:18 PM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली
अमर उजाला नेटवर्क, चंदौली Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Fri, 13 Mar 2020 02:18 PM IST
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Chandauli Shivpal Singh has qualified in javelin throw for japan Olympics 2020
दक्षिण अफ्रिका में ओलंपिक क्वालीफाई करने के बाद कोच उवे हॉन के साथ चंदौली का शिवपाल (बाएं से दूसरे)। - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के रहने वाले शिवपाल सिंह ने ओलंपिक के लिए भाला फेंक में क्वालीफाई किया है। इससे वह बहुत ही खुश हैं। शिवपाल सिंह ने कहा कि देश के लिए खेलना और सोना जीतना उनका सपना है। गांव के बुजुर्गों, बड़ों, दोस्तों और जिले के सभी शुभचिंतकों की बदौलत उन्हें देश का मान-सम्मान बढ़ाने का मौका मिला है। दक्षिण अफ्रीका से फोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि ओलंपिक के लिए चयन अद्भुत पल है। इस खुशी को शब्दों में बयां नहीं कर सकता।

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उन्होंने बताया कि उनके पिता रामाश्रय सिंह और चाचा जगमोहन सिंह से खेलने की प्रेरणा मिली। पिता पीएसी में हैं तो चाचा नेवी में स्पोर्ट्स विंग में अधिकारी हैं। घर पर ही वह लकड़ी का भाला फेंकते थे। जिले के हिंगुतरगढ़ में सनरेज स्कूल से आठवीं की पढ़ाई करने के बाद वह चाचा के साथ दिल्ली चले गए। वहीं प्रैक्टिस शुरू की।
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इंटर तक की पढ़ाई बसंत राम नगीना इंटर कालेज धराव चंदौली से की है। ओलंपियाड के लिए चयनित शिवपाल सिंह ने कहा कि शिक्षा हो या खेल मेहनत करें, सफलता जरूर मिलेगी। आगे बढ़ने के लिए मेहनत और लगन जरूरी है। शिवपाल की इच्छा है कि उनके गांव में अत्याधुनिक स्टेडियम बने जहां गांव और आसपास के युवा प्रतिभा को निखार सकें। कहा कि स्टेडियम के अभाव में प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पाती हैं।

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पूरा परिवार जुड़ा है इसी खेल से
शिवपाल सिंह ने कहा कि उनका पूरा परिवार भाला फेंक खेल से जुड़ा है। उनके पिता और चाचा बचपन में ही घर पर भाला फेंकते थे। उनका छोटा भाई नंदकिशोर सिंह भी भाला फेंक में छह बार नेशनल जूनियर चैंपियन रह चुका है। वह भी आगे की तैयारी कर रहा है। इसी तरह चाचा के बेटे विवेक सिंह और चाणक्य सिंह इटावा के सैफई स्पोर्ट्स कॉलेज में भाला फेंक की प्रैक्टिस कर रहे हैं। 

गुरु रामप्रवेश को किया याद
ओलंपियाड के लिए चयन होने के बाद शिवपाल अपनों को भूलना नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि वह पढ़ने में कमजोर थे। कक्षा में जब सवाल पूछने की बारी आती थी तो राम प्रवेश सर कहते थे तुमसे सवाल नहीं पूछूंगा, तुम तो जवेलिन थ्रोअर बनोगे। उनकी वाणी सच हुई और उनके आशीर्वाद से कामयाबी मिली। कहा कि मेहनत का नतीजा है कि आज देश के लिए खेलने का मौका मिला है।

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