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मेरठ से शुरू हुई चंपारण सत्याग्रह यात्रा पहुंची काशी, यात्रा का महत्व है बड़ा खास
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sat, 15 Apr 2017 09:53 PM IST
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डॉ. वंदना शिवा ने कहा - किसानों के लिए चल रहा तीसरा स्वतंत्रता आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
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पर्यावरणविद डॉ. वंदना शिवा किसानों के लिए तीसरा स्वतंत्रता आंदोलन कर रही हैं। आजादी के सौवें साल तक भारत को जैविक देश के तौर पर खड़ा करने की मुहिम के लिए उन्होंने सत्याग्रह यात्रा शुरू की है जिसका नाम उन्होंने ‘चंपारण सत्याग्रह यात्रा’ रखा है।
13 अप्रैल को मेरठ से शुरू होकर ये यात्रा शनिवार को काशी पहुंची। डॉ. वंदना शिवा का कहना है कि चंपारण सत्याग्रह के सौवें साल पर शुरू हुए इस आंदोलन का मकसद आजादी के सौवें साल 2047 तक किसानों को उनका हक दिलाना है।
शनिवार को अस्सी घाट पर डॉ. वंदना के नेतृत्व में काशीवासियों ने उनके सत्याग्रह का हिस्सा बनने का संकल्प लिया। बीएचयू पहुंचीं डॉ. वंदना शिवा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछले 20 साल से भारतीय किसानों की हालत कुछ वैसी ही हो गई है जैसी गांधी जी ने सौ साल पहले चंपारण में देखी थी।
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कहा कि किसानों को जिंदा रहना है तो उन्हें जैविक खेती करनी पड़ेगी। हमारा तीसरा स्वतंत्रता आंदोलन किसी शासन से आजादी का नहीं बल्कि जिंदा रहने का है।
‘नवधान्य’ की संस्थापक डॉ. शिवा ने चंपारण सत्याग्रह यात्रा के बारे में बताया कि मेरठ से शुरू यह यात्रा बनारस, पटना, मोतिहारी, बेतिया, छपरा, सिंगूर और नंदीग्राम पहुंचेगी। 23 अप्रैल को भुवनेश्वर में यात्रा समाप्त होगी।
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13 अप्रैल को मेरठ से शुरू होकर ये यात्रा शनिवार को काशी पहुंची। डॉ. वंदना शिवा का कहना है कि चंपारण सत्याग्रह के सौवें साल पर शुरू हुए इस आंदोलन का मकसद आजादी के सौवें साल 2047 तक किसानों को उनका हक दिलाना है।
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शनिवार को अस्सी घाट पर डॉ. वंदना के नेतृत्व में काशीवासियों ने उनके सत्याग्रह का हिस्सा बनने का संकल्प लिया। बीएचयू पहुंचीं डॉ. वंदना शिवा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पिछले 20 साल से भारतीय किसानों की हालत कुछ वैसी ही हो गई है जैसी गांधी जी ने सौ साल पहले चंपारण में देखी थी।
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कहा कि किसानों को जिंदा रहना है तो उन्हें जैविक खेती करनी पड़ेगी। हमारा तीसरा स्वतंत्रता आंदोलन किसी शासन से आजादी का नहीं बल्कि जिंदा रहने का है।
‘नवधान्य’ की संस्थापक डॉ. शिवा ने चंपारण सत्याग्रह यात्रा के बारे में बताया कि मेरठ से शुरू यह यात्रा बनारस, पटना, मोतिहारी, बेतिया, छपरा, सिंगूर और नंदीग्राम पहुंचेगी। 23 अप्रैल को भुवनेश्वर में यात्रा समाप्त होगी।
प्रकृति, संस्कृति को पुनर्जीवित करना हमारा धर्म
बीएचयू में डॉ. वंदना शिवा का व्याख्यान
- फोटो : अमर उजाला
बीएचयू सामाजिक विज्ञान संकाय के संबोधि सभागार में शनिवार को डॉ. वंदना शिवा का व्याख्यान हुआ। उन्होंने कहा कि हमने प्रकृति, संस्कृति और मानवता का बहुत नाश किया है। इन सबको पुनर्जीवित करना हमारा धर्म है। हमें जीवन और धरती के संरक्षण के लिए ज्ञान का उपयोग करना चाहिए।
कहा कि मोनसेंटो और बायर जैसी कंपनियां किसानों के बीज और अन्न पर अपना एकाधिकार कर रही हैं। इसका सभी को मिलकर विरोध करना होगा।
उन्होंने कुलपति और विद्यार्थियों से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय परिसर को पूर्ण जैविक बनाएं और स्वदेशी भोजन को बढ़ावा देने में सहयोग दें।
जब तक विदेशी कंपनियां हमारे बीज और हमारे अन्न पर कब्जा करती रहेंगी, किसानों को लूटती रहेंगी, तब तक हम सही मायने में आजाद नहीं हो सकते। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि हमें जितनी जरूरत है, प्रकृति से उतना ही लें। अगर उससे ज्यादा ले रहे हैं तो हम चोरी कर रहे हैं।
कहा कि मोनसेंटो और बायर जैसी कंपनियां किसानों के बीज और अन्न पर अपना एकाधिकार कर रही हैं। इसका सभी को मिलकर विरोध करना होगा।
उन्होंने कुलपति और विद्यार्थियों से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय परिसर को पूर्ण जैविक बनाएं और स्वदेशी भोजन को बढ़ावा देने में सहयोग दें।
जब तक विदेशी कंपनियां हमारे बीज और हमारे अन्न पर कब्जा करती रहेंगी, किसानों को लूटती रहेंगी, तब तक हम सही मायने में आजाद नहीं हो सकते। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि हमें जितनी जरूरत है, प्रकृति से उतना ही लें। अगर उससे ज्यादा ले रहे हैं तो हम चोरी कर रहे हैं।