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Varanasi News: व्यवस्था बेपटरी... दो बजे तक चलनी थी ओपीडी, एक बजे ही होने लगा सन्नाटा

Fri, 26 Jul 2024 06:01 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jul 2024 06:01 AM IST
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Challan of 375 minors in 20 days, parents will have to pay a fine of Rs 20 lakh
वाराणसी। बीएचयू अस्पताल में ओपीडी का समय बृृहस्पतिवार से बदल दिया गया। इसे सुबह 9 से शाम 5 की बजाय सुबह 8 से दोपहर दो बजे तक कर दिया गया। टाइमिंग बदलने के पहले दिन ही ओपीडी में व्यवस्था बेपटरी दिखी। अधिकांश जगहों पर दोपहर एक बजे ही सन्नाटे जैसा माहौल देखने को मिला। यहीं नहीं विभाग में दोपहर 12 बजे तक ही पर्चा का पंजीकरण होना था। इस वजह से बहुत से मरीज जो 12 बजे के बाद विभागों में आए, पंजीकरण नहीं करवा सके।
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बहुत से मरीजों को समय की जानकारी पहले से नहीं थी, इस वजह से वह पुराने समय के अनुसार आए। दोपहर 12 बजे तक जिन मरीजों का विभागों की ओपीडी में पंजीकरण हुआ उन्हें डॉक्टर ने देखा। जिस ओपीडी हाॅल में शाम 3 बजे तक मरीजों, परिजनों की भीड़ दिखती थी, वहां दोपहर 1 बजे मरीजों की संख्या और दिनों की तुलना में कम दिखी। सर्जरी विभाग, रेडियोथेरेपी विभाग की ओपीडी में तो दोपहर 1 बजे ही सन्नाटे जैसा माहौल हो गया था। सर्जरी विभाग में पंजीकरण काउंटर बंद हो गया था। कंसल्टेंट डॉक्टर की कुर्सी भी दोपहर 1 बजे खाली थी। इक्का-दुक्का मरीज गेट के पास बैठे थे। तीन-चार रेजिडेंट भी एक कमरे में बैठे मिले, लेकिन वो भी चाय आदि पी रहे थे।
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कर्मचारियों ने पूछने पर बताया कि डॉक्टर नहीं है, अब कल दिखाना आइएगा। इधर हृदय रोग विभाग की ओपीडी के पास ईसीजी कक्ष में भी दोपहर एक बजे कुछ मरीज ईसीजी करवाने पहुंचे तो समय बीतने की बात कहकर शुक्रवार को आने की बात कही गई। लिहाजा मरीज वापस हो गए।
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पहले पांच हजार, अब महज तीन हजार ने कटवाया पर्चा
ओपीडी का समय बदलने से पंजीकरण काउंटर पर पर्चा कटवाने वालों का ग्राफ भी अचानक गिर गया। आम दिनों में यहां करीब 5 हजार मरीजों का पर्चा कटता है, लेकिन बृहस्पतिवार को करीब 3 हजार मरीजों ने ही पर्चा कटवाया। ऐसा इसलिए कि ओपीडी का समय बदलने से दूरदराज के कई मरीज देर से आए। जिन लोगों के पास पहले से पर्चा था वो भी 12 बजे के बाद पहुंचे, लेकिन पंजीकरण न होने के नियम का हवाला देते हुए उनका ओपीडी में पंजीकरण नहीं हो सका।


मरीजों की सुविधा को देखते हुए ओपीडी का समय बदलने का फैसला अस्पताल प्रशासन ने लिया है। इससे दूरदराज से आने वाले मरीज जल्द डॉक्टर को दिखाकर घर जा सकेंगे। अगर ज्यादा समस्या होती है, तो आने वाले दिनों में इस पर पुनर्विचार भी किया जाएगा। - प्रो. एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस
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