Varanasi News: सोनभद्र के नगवां में मिले ताम्र पाषाण काल के शैलचित्र, सैकड़ों शैलाश्रय मिलने की संभावना
सोनभद्र के नगवां विकास खंड में बीएचयू की टीम को कई नए शैलचित्र मिले हैं। नौडीहा गांव में चरनभान/चंद्रभान पहाड़ी पर पांच और लक्ष्मीनिया पहाड़ी पर तीन चित्रित शैलाश्रयों की खोज की गई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सोनभद्र के नगवां विकास खंड में बीएचयू की टीम को कई नए शैलचित्र मिले हैं। नौडीहा गांव में चरनभान/चंद्रभान पहाड़ी पर पांच और लक्ष्मीनिया पहाड़ी पर तीन चित्रित शैलाश्रयों की खोज की गई है। लाल रंग से बने चित्रों में हिरण, गैंडा, वृषभ, हाथी, बंदर, जिराफ के साथ नृत्यरत मानव समूह, घुड़सवार और शिकार करते मानव को भी दिखाया गया है
बीएचयू प्राचीन इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनोद जायसवाल के निर्देशन में शोध करने वाले पोस्ट डॉक्टोरल फेलो डॉ. मुकेश कुमार को नगवां विकास खंड के पुरातात्विक सर्वेक्षण के दौरान ये प्रमाण मिले हैं। डॉ. जायसवाल ने बताया कि सोनभद्र प्रागैतिहासिक मानव की शरण स्थली है, जिसका प्रमाण प्रस्तर उपकरण एवं शैल चित्र है।
डॉ. विनोद ने बताया कि कंडाकोट, मतहवा, लेखनिया, कनच आदि चित्रित शैलाश्रय से तुलनात्मक अध्ययन के बाद माना जा सकता है कि ये शैल चित्र ताम्र पाषाण काल से लेकर ऐतिहासिक काल तक के हैं। डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि सभी चित्रित शैलाश्रय अभी तक अप्रकाशित रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पहाड़ी के लगभग सभी शैलाश्रयों में चित्र बने है। यद्यपि जंगली हिंसक जानवरों के भय के कारण लोगों का पर्याप्त सहयोग न मिल सका।
डॉ. विनोद जायसवाल का कहना है कि यदि इन पहाड़ियों का गहन सर्वेक्षण किया जाए तो सैकड़ों चित्रित शैलाश्रय मिल सकते हैं। सर्वेक्षण के क्रम में इन शैलचित्रों के अतिरिक्त मोरवा पहाड़, व्यूवा पहाड़, कोसमवा पहाड़, जहरवा पहाड़, चनईमान, बन्हो राजा, टेस्टवरिया, थुथनिमान, अकलानाल दरी, भलमनवा और डीहवार पहाड़ से भी चित्रित शैलाश्रय प्रकाश में आएं हैं।