Navratri Kanya Pujan: अष्टमी या नवमी..कब है कन्या पूजन, काशी के पंडितों ने बताई तिथि और शुभ मुहूर्त
नवरात्रि में अष्टïमी और नवमी विशेष दिन होते हैं। इस अवसर पर कन्या भोजन और देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए विशेष हवन व पूजन करवाया जाता है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार अष्टïमी तिथि पर देवी की पूजा करने से हर तरह की परेशानी दूर हो जाती है और दरिद्रता दूर होती है।
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चैत्र नवरात्रि का आज सातवां दिन है। कल अष्टमी है, ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल कौंध रहा है कि आखिर कन्या पूजन कब किया जाए।
नवरात्रि में अष्टïमी और नवमी विशेष दिन होते हैं। इस अवसर पर कन्या भोजन और देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए विशेष हवन व पूजन करवाया जाता है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार अष्टïमी तिथि पर देवी की पूजा करने से हर तरह की परेशानी दूर हो जाती है और दरिद्रता दूर होती है।
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ये है शुभ तिथि और शुभ मुहूर्त
इस बार पूरे नौ दिन के नवरात्रि हैं। कन्या पूजन के लिए शोभन योग 28 मार्च रात्रि 11: 36 मिनट से शुरू हो जाएगा। जो 29 मार्च दोपहर12: 13 मिनट तक रहेगा।
यदि आप महाष्टमी पर कन्या पूजन करते हैं तो 29 मार्च को 12:13 मिनट तक आप कभी भी कन्या पूजन कर सकते हैं।
ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04:42 मिनट से 05: 29 मिनट में कन्या पूजन करना विशेष फलदायी होता है।
महानवमी कन्या पूजन शुभ मुहूर्त
सर्वार्थ सिद्धि योग: 30 मार्च, प्रातः 06:14 से 31 मार्च, प्रातः 06:12 मिनट तक
काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि अष्टमी तिथि पर अनेक प्रकार के मंत्रों और विधि-विधान से पूजा करनी
चाहिए। इस दिन मां दुर्गा से सुख, समृद्धि, यश, कीर्ति, विजय, आरोग्यता की कामना करनी चाहिए। मां दुर्गा का पूजन अष्टमी व नवमी को करने से कष्ट और हर तरह के दु:ख मिट जाते हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती। यह तिथि परम कल्याणकारी, पवित्र, सुख को देने वाली और धर्म की वृद्धि करने वाली है।
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कन्या और देवी के शस्त्रों की पूजा
अष्टमी को विविध प्रकार से मां शक्ति की पूजा करें। इस दिन देवी के शस्त्रों की पूजा करनी चाहिए। इस तिथि पर विविध प्रकार से पूजा करनी
चाहिए और विशेष आहुतियों के साथ देवी की प्रसन्नता के लिए हवन करवाना चाहिए। इसके साथ ही 9 कन्याओं को देवी का स्वरूप मानते हुए भोजन करवाना चाहिए। दुर्गाष्टमी पर मां दुर्गा को विशेष प्रसाद चढ़ाना चाहिए। पूजा के बाद रात्रि को जागरण करते हुए भजन, कीर्तन, नृत्यादि उत्सव मनाना चाहिए।
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के सदस्य पंडित दीपक मालवीय ने बताया कि ज्योतिष में अष्टमी तिथि को बलवती और व्याधि नाशक तिथि कहा गया है। इसके देवता शिवजी हैं। इसे जया तिथि भी कहा जाता है। नाम के अनुसार इस तिथि में किए गए कामों में जीत मिलती है। इस तिथि में किए गए काम हमेशा पूरे होते हैं। अष्टमी तिथि में वो काम करने चाहिए जिसमें विजय प्राप्त करनी हो। वहीं श्रीकृष्ण का जन्म भी अष्टमी तिथि पर ही हुआ था।