Chaitra Navratri 2022: राशिवार करें जगत जननी की आराधना, जानिए नवरात्रि में बनने वाले शुभ संयोग
वाराणसी में नवरात्रि की प्रथम आराध्य देवी शैलपुत्री मंदिर के साथ ही अन्य देवालयों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी है।
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चैत्र नवरात्रि पर आज कलश स्थापना के साथ ही शक्ति की आराधना का महापर्व आरंभ हो गया। शिव की नगरी काशी में अलसुबह से ही पूजापाठ का सिलसिला जारी है। नवरात्रि की प्रथम आराध्य देवी शैलपुत्री के अलईपुरा स्थित मंदिर और कुष्मांडा माता के दरबार के साथ ही अन्य देवालयों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की कतार लगी है।
इस साल देवी आराधना पूरे नौ दिन की जाएगी क्योंकि नवरात्रि में किसी भी तिथि का क्षय नहीं हो रहा है। मौसम परिवर्तन के समय इन नौ दिनों में व्रत-उपवास करना सेहत के लिए अच्छा रहेगा। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पं. दीपक मालवीय ने बताया कि काशी में मां दुर्गा के गौरी स्वरूप के दर्शन पूजन का विधान है। इस बार महाअष्टमी नौ अप्रैल और महानवमी 10 तारीख को मनाई जाएगी।
राशिवार करें माता की आराधना
- मेष- मालपुए का भोग लगाएं
- वृष- रबड़ी का भोग लगाएं
- मिथुन- पपीते का भोग लगाएं
- कर्क- दूध का भोग लगाएं
- सिंह- अनार का भोग लगाएं
- कन्या- खीर का भोग लगाएं
- तुला- सिंघाड़े का भोग लगाएं
- वृश्चिक- सिंघाड़े का भोग लगाएं
- धनु- पान का भोग लगाएं
- मकर- नारियल का भोग लगाएं
- कुंभ- मिष्ठान्न का भोग लगाएं
- मीन- पंचमेवे का भोग लगाएं
नवरात्रि में बनने वाले ये हैं शुभ संयोग
- 03 अप्रैल - द्वितीय तिथि - सर्वार्थ सिद्धि योग
- 04 अप्रैल - तृतीय तिथि - रवियोग
- 05 अप्रैल - चतुर्थी तिथि - सवार्थ सिद्ध व रवियोग
- 06 अप्रैल - पंचमी तिथि - रवियोग व सवार्थ सिद्धि योग
- 07 अप्रैल - षष्ठी तिथि - रवियोग
- 08 अप्रैल - सप्तमी तिथि - सवार्थ सिद्धि योग
- 09 अप्रैल - अष्टमी तिथि - रवियोग
- 10 अप्रैल - राम नवमी - रवियोग व रविपुष्य योग
कन्या पूजन का महत्व
कुमारी पूजन नवरात्रि व्रत का अनिवार्य अंग है। कुमारिकाएं जगत जननी जगदंबा का प्रत्यक्ष विग्रह हैं। सामर्थ्य हो तो नौ दिन तक, अन्यथा सात, पांच, तीन या एक कन्या को देवी मानकर पूजा करके भोजन कराना चाहिए।
किस दिन नवदुर्गा को क्या करें अर्पित
- प्रतिपदा- उड़द, हल्दी, माला-फूल
- द्वितीया-तिल, शक्कर, चूड़ी, गुलाल शहद
- तृतीया-लाल वस्त्र, शहद, खीर, काजल
- चतुर्थ- दही, फल, सिंदूर, मसूर
- पंचमी-दूध, मेवा, कमलपुष्प, बिंदी
- षष्ठी-चुनरी, पताका, दूर्वा
- सप्तमी-बताशा, इत्र, फल-पुष्प
- अष्टमी-पूड़ी, पीली मिठाई, कमलगट्टा, चंदन, वस्त्र
- नवमी-खीर, सुहाग सामग्री, साबुदाना, अक्षत फल, बताशा
दुर्गासप्तशती के पाठ का फल
आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि दुर्गासप्तशती के एक पाठ से फलसिद्धि, तीन पाठ से उपद्रव शांति, पांच पाठ से सर्वशांति, सात पाठ से भय मुक्ति, नौ पाठ से यज्ञ केसमान फल, 11 पाठ से राज्य की प्राप्ति, 12 पाठ से कार्यसिद्धि, 14 पाठ से वशीकरण, 15 पाठ से सुख-संपत्ति, 16 पाठ से धन व पुत्र की प्राप्ति, 17 पाठ से राजभय व शत्रु रोग से मुक्ति, 20 पाठ से ग्रहदोष शांति और 25 पाठ से बंधन मुक्ति।