CBSE 10वीं रिजल्ट: काशी की सफलता का रेट 95%, उत्कर्ष को 99.2% और शुभांगी को 99% अंक; खिले चेहरे
CBSE Result: वाराणसी में भी सीबीएसई बोर्ड की 10वीं परीक्षा का रिजल्ट आते ही छात्र-छात्राएं अपने मोबाइल-कंप्यूटर पर अपने-अपने रोल नंबर चेक करने लगे। कई स्कूलों के टॉप-3 में सिर्फ लड़कियां ही आगे रहीं। कंप्यूटर साइंस में 100 अंक मिले तो चेहरे खिल उठे। ऑनलाइन मूल्यांकन के चलते परीक्षा के 36वें दिन ही रिजल्ट आ गया था।
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Varanasi News: पिछले साल के मुकाबले 20 दिन पहले ही सीबीएसई बोर्ड की 10वीं परीक्षा का रिजल्ट घोषित हो गया। सीबीएसई बोर्ड में 10वीं के रिजल्ट में काशी की सफलता का रेट करीब 95 फीसदी रहा। उत्कर्ष सिंह को 99.2 फीसदी और शुभांगी पांडेय को 99 फीसदी अंक मिले। वहीं ज्यादातर लड़कियों के भी अंक 97-98 फीसदी से ऊपर रहे और कई स्कूलों के टॉप-3 में सिर्फ लड़कियां ही रहीं।
जिले में 22,932 में से करीब 20 हजार से ज्यादा परीक्षार्थियों ने सफलता हासिल की है। जबकि 55 केंद्रों पर हुई परीक्षा में 10 फीसदी छात्र-छात्राएं अनुपस्थित रहे थे। काशी में सीबीएसई के 166 विद्यालयों के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं में रिजल्ट को लेकर उत्साह का माहौल रहा। कई छात्रों को कंप्यूटर साइंस सहित कई विषयों में 100 में से पूरे 100 अंक मिले। कई स्कूलों को रिजल्ट में 100 फीसदी सफलता मिली। जिन छात्रों के अंक 90 फीसदी से कम आए, उन्होंने 12वीं में बेहतर स्कोर लाने का संकल्प लिया।
परीक्षा के 36वें दिन ही बुधवार को रिजल्ट घोषित कर दिया गया। 10 मार्च को 10वीं की परीक्षा का अंतिम पेपर था। जबकि पिछले साल 18 मार्च को पेपर खत्म हुआ था और रिजल्ट 13 मई को घोषित हुआ था। इसमें कुल 56 दिन लगे थे। इस बार रिजल्ट जल्दी आने का कारण यह है कि मूल्यांकन ऑनलाइन किया गया। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया गया था। मूल्यांकन का काम पूरा होते ही नंबर स्वतः बोर्ड की साइट पर फीड होते चले गए। अब इसी तर्ज पर 12वीं के 23,546 विद्यार्थियों का रिजल्ट मई में घोषित किया जाएगा।
रिजल्ट उम्मीद से उलट हो तो घर में न करें ये दो काम : मनोचिकित्सक
सफलता प्राप्त करने वालों में कई बच्चे और उनके माता-पिता 99 फीसदी अंक न ला पाने से मायूस भी दिखे। इसको लेकर आईएमएस बीएचयू के मनोचिकित्सक डॉ. मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि स्कोर सफलता की एक कड़ी है, खराब रिजल्ट से घबराएं नहीं। वहीं परिवार के लोगों को घर में दो तरह के काम न करने, दो काम करने और एक खास सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
क्या नहीं करना है
कम अंक के लिए बच्चे को न तो ताने दें और न ही दंडित करें।
अपने बच्चे की अतार्किक ढंग से दूसरे बच्चों से तुलना न करें।
क्या करना है
बच्चे को समझाएं कि यह रिजल्ट केवल इस परीक्षा का परिणाम है, न कि उसके जीवन का।
रिजल्ट आने के बाद यदि बच्चे के व्यवहार में बड़ा बदलाव दिखे तो उसकी मानसिक स्थिति को समझने का प्रयास करें।
ये सतर्कता बरतें....
यदि बच्चे के मन में बार-बार नकारात्मक विचार या आत्महत्या के विचार आएं, तो उसे अकेला न छोड़ें और प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक से सलाह लें।