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Varanasi: तीन दिन की नवजात को लावारिस फेंकने में मुकदमा, 163 साल में दूसरी बार ऐसा हुआ

Mon, 16 Oct 2023 10:01 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 16 Oct 2023 10:01 AM IST
सार

बीएचयू अस्पताल में बीते शनिवार की सुबह निष्ठुर मां-बाप ने जिगर के टुकड़े को टिनशेड के नीचे कुर्सी पर रखा और चलते बने। वह तीन घंटे तक पड़ी रही। सफाई कर्मी शहनाज की निगाह पड़ी तो उसने मासूम को कलेजे से लगा लिया। पुलिस ने अब इस मामले में मुकदमा दर्ज किया है।

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Case registered against three day old newborn thrown in bhu hospital this happened for second time in 163 y
बीएचयू अस्पताल परिसर में मिली थी नवजात - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीएचयू अस्पताल परिसर में बाल रोग विभाग के सामने लावारिस हाल में मिली नवजात के मामले में रविवार की देर रात लंका थाने की पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। कमिश्नरेट पुलिस के मुताबिक 163 वर्ष पुराने कानून ( आईपीसी की धारा 317, जो कि अंग्रेजों के जमाने 1860 में बना था) के तहत वाराणसी में यह दूसरा मुकदमा दर्ज हुआ है। 13 वर्ष पहले शीतला घाट पर बच्ची लावारिस हाल में मिली थी, तब पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके बलिया के आरोपी दंपती को दबोचा था। अब दूसरा मुकदमा दर्ज किया गया है।

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बीएचयू अस्पताल परिसर में बाल रोग विभाग के सामने टिनशेड के नीचे कुर्सी पर शनिवार की सुबह लावारिस बच्ची मिली थी। महिला सफाई कर्मी शहनाज की नजर बच्ची पड़ी तो उसने प्रॉक्टोरियल बोर्ड को सूचना दी। बच्ची को बाल रोग विभाग में भर्ती कराया गया। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की सूचना पर लंका थाने की पुलिस आई, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो सका कि बच्ची को छोड़कर कौन गया था।

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नवजात को पीलिया निमोनिया से ग्रसित

लावारिस मिली बच्ची की हालत में सुधार है। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची को निमोनिया और पीलिया  की शिकायत है। पीडियाट्रिक इंन्सेटिव केयर यूनिट(पीआईसीयू) में भर्ती है। चार दिन और इलाज चलेगा। बीएचयू प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम और पुलिस ने रविवार को सीसी कैमरे भी खंगाले हैं, लेकिन बच्ची को फेंकने वालों का सुराग नहीं लग सका।

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ये भी पढ़ें: अफसोस है बिटिया; बीएचयू में तीन दिन की बच्ची को फेंका, घंटों तक लावारिस पड़ी रही, सफाई कर्मी ने कलेजे से लगाया

जहां बच्ची को रखा गया था, वहां भी कैमरा नहीं लगा है। इधर, बच्ची की तस्वीर अमर उजाला में छपने के बाद रविवार को कई लोग अस्पताल पहुंचे और बच्ची को गोद लेने की इच्छा जताई। चीफ प्रॉक्टर प्रो. शिवप्रकाश सिंह ने बताया कि कानूनी प्रावधान के हिसाब से ही बच्ची को गोद लिया जा सकता है। बच्ची को बचाने वाली शहनाज को सम्मानित किया जाएगा। चीफ प्रॉक्टर प्रो. शिवप्रकाश सिंह ने बताया कि शहनाज ने जो काम किया है, वह सराहनीय है। उन्हें जल्द ही सम्मानित किया जाएगा।

खंगाले जा रहे सीसी फुटेज

Case registered against three day old newborn thrown in bhu hospital this happened for second time in 163 y
सर सुंदरलाल अस्पताल , बीएचयू - फोटो : फाइल

लंका थानाध्यक्ष अश्वनी पांडेय ने बताया कि 12 वर्ष से कम आयु के शिशु का परित्याग करते हुए उसे किसी स्थान पर छोड़ देना भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में दंडनीय अपराध माना गया है। बीएचयू अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर की तहरीर के आधार पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके जांच की जा रही है। आईपीसी की जिस धारा में मुकदमा दर्ज हुआ है, उसमें माता-पिता या फिर किसी अन्य को सात वर्ष की सजा मिलने का प्रावधान है। अब पुलिस बच्ची को लावारिस हाल में छोड़कर जाने वालों का पता लगा रही है। सीसी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से समाज में एक अच्छा संदेश जाएगा और इस तरह के अमानवीय कृत्य करने वाले एक बार गंभीरता से जरूर सोचेंगे।

तीसरी बेटी हुई तो घाट पर फेंका, जेल गए माता-पिता

वर्ष 2010 में शीतला घाट के पास बम विस्फोट हुआ था। तब 15 माह की बच्ची गौरी लावारिस हाल में मिली थी। पुलिस को शक था कि बच्ची को छोड़ने वालों ने ही विस्फोट किया था। बाद में गौरी की मां गीता और पिता नीलेश पांडेय उर्फ टुनटुन पकड़े गए। जांच से पता चला कि तीसरी बच्ची पैदा होने के बाद नीलेश उसे घाट पर फेंक गया था। पुलिस ने आईपीसी की धारा 317 और बाल संरक्षण अधिनियम की धारा 23 के तहत मुकदमा दर्ज करके दोनों को जेल भेजा था।

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