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BHU में गलत सर्जरी का मामला: टीम में थे 10 सदस्य, कोई नहीं कर सका महिला मरीज की पहचान; उठ रहे सवाल

Thu, 16 Apr 2026 05:59 AM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Aman Vishwakarma Updated Thu, 16 Apr 2026 05:59 AM IST
सार

Varanasi News: बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में महिला की गलत सर्जरी करने का मामला गरमाने लगा है। जिला प्रशासन ने इस केस की पूरी जानकारी मांगी है। इसके बाद डॉक्टरों की कार्यशैली पर अब सवाल उठने लगे हैं।

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Case of Botched Surgery at BHU Team Comprised 10 Members None Could Identify Female Patient
ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीजों को इसी तरह का बैंड लगाया जाता है। - फोटो : संवाद

विस्तार

IMS BHU: आईएमएस बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में ऑर्थोपेडिक्स विभाग की जिस टीम ने महिला की गलत सर्जरी की और उसकी मौत हो गई। उसमें एक दो नहीं बल्कि 10 लोग (6 डॉक्टर, 4 पैरामेडिकल स्टाफ) शामिल थे, लेकिन आश्चर्य की बात तो यह है कि कोई भी महिला की पहचान नहीं कर सका। 

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सर्जरी से पहले की अगर सभी प्रक्रिया सही ढंग से पूरी करवाई गई होती तो शायद यह गलती नहीं होती। सर्जरी भी उसी महिला की होती, जिसे ऑर्थोपेडिक्स विभाग में भर्ती किया गया था। टीम ने न्यूरो सर्जरी में भर्ती महिला के स्पाइन कॉर्ड ट्यूमर की जगह उसके जांघ की सर्जरी कर दी। कुछ दिन बाद उसकी मौत हो गई।

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बलिया निवासी थी महिला

ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो सर्जरी विभाग में प्रो. अनुराग साहू के अंडर में भर्ती बलिया निवासी राधिका देवी (71) का 7 मार्च को ऑपरेशन होना था। उनको स्पाइन कॉर्ड टयूमर था। इसलिए उसको ऑपरेशन थिएटर के प्रीऑपरेटिव रूम (ऑपरेशन थिएटर के बाहर का कमरा) में ले जाया गया। राधिका देवी (82) नाम की एक अन्य महिला आर्थोपेडिक्स विभाग में प्रो.अमित रस्तोगी के अंडर में भर्ती थी। 

गलत सर्जरी करने का जहां तक मामला है तो 7 मार्च को प्रो. अमित रस्तोगी की अगुवाई टीम ने न्यूरोसर्जरी वाली राधिका देवी के जांघ की सर्जरी कर दी थी, तब पता चला कि यह राधिका देवी उनकी मरीज यानी आर्थोवाली नहीं बल्कि न्यूरोसर्जरी वाली है। 

आनन फानन में उसका इलाज कर बाहर निकाला गया। अब सवाल यह है कि सर्जरी टीम में प्रो. अमित रस्तोगी के साथ तीन कंसल्टेंट और आर्थोपेडिक्स विभाग के दो रेजिडेंट, एनेस्थीसिया से एक सीनियर रेजिडेंट के साथ ही चार अन्य नर्सिंग/पैरामेडिकल स्टाफ भी रहे। किसी ने भी महिला की पहचान नहीं की और सर्जरी शुरू कर दिया। उधर बुधवार को लापरवाही का मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने बीएचयू प्रशासन से पूरे मामले की जानकारी मांगी है।

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क्या है किसी मरीज के सर्जरी करने की प्रक्रिया

  • जिस वार्ड में डॉक्टर के अंडर में मरीज भर्ती रहता है, वहां से ऑपरेशन की डेट तय होती है। इसके बाद ऑपरेशन करने वाली टीम बनती है।
  • संबंधित मरीज की सर्जरी से पहले बीपी, पल्स, ब्लड, एक्सरे सहित अन्य जरूरी जांच कराई जाती है।
  • अगर रिपोर्ट सामान्य रहती है तो वार्ड से उसको ओटी में लाया जाता है। यहां भी उसकी तत्काल बीपी आदि की जांच होती है।
  • फाइनल तौर पर ओटी में जाने के बाद जरूरत के हिसाब से एनीस्थीसिया भी देना पड़ता है।
  • कंसल्टेंट के निर्देशन में मरीज की सर्जरी शुरू होती है। इस दौरान रेजिडेंट, नर्सिंग, पैरामेडिकल स्टाफ भी रहते हैं।
  • ऑपरेशन के बाद कुछ समय तक महिला को पोस्टऑपरेटिव वार्ड(ऑपरेशन के तुरंत बाद कोई समस्या न हो, इसलिए यहां रखा जाता है) में रखा जाता है।
  • ऑपरेशन के बाद जांच के बाद सब कुछ सामान्य रहता है तो डॉक्टर के निर्देश पर मरीज को संबंधित वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है।
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मरीजों के हाथ में रहता है बैंड, इसमें रहती है पूरी जानकारी
ट्रॉमा सेंटर में जो भी मरीज भर्ती होते हैं, उनके बारे में पूरी जानकारी मिल सके, इसके लिए मरीज के हाथ में भर्ती होने के समय ही बैंड पहनाया जाता है। इसमें ट्रामा सेंटर में भर्ती होने के दौरान मिलने वाला नंबर अंकित होता है। साथ ही मरीज का नाम, वह पुरुष है या महिला, उम्र, भर्ती होने की तारीख और समय भी प्रिंट रहता है। 

इसके अलावा संबंधित मरीज को देखने वाले डॉक्टर का नाम भी इसी पर दर्ज रहता है। इसके अलावा मरीज किसी वार्ड/ विभाग में किस बेड पर भर्ती है, इसका भी विवरण रहता है। अब सवाल यह है कि लंबे समय से चली आ रही इस व्यवस्था का अगर सर्जरी करने वाली 10 सदस्यों वाली टीम में किसी ने पालन किया होता तो शायद इतनी बड़ी गड़बड़ी नहीं होती।

जांच टीम पर चर्चा तेज, सर्जरी संबंधी कागजात से सामने आ सकती है सच्चाई
बलिया निवासी जिस राधिका देवी का गलत ऑपरेशन किया गया और उसकी मौत हो गई। उनके पोते के शिकायत पर आईएमएस बीएचयू निदेशक प्रो.एसएन संखवार की ओर से जो कमेटी गठित की गई, उसको लेकर खूब चर्चा हो रही है। इसमें पहले तो प्रो. अमित रस्तोगी को कमेटी का चेयरमैन बनाया गया जब पता चला कि प्रो. रस्तोगी के निर्देशन में काम करने वाली टीम ने ही गलत सर्जरी की तो आनन फानन में निदेशक ने प्रो. रस्तोगी को हटाकर प्रो. अजीत को चेयरमैन बना दिया है। 

इधर बुधवार को ट्रॉमा सेंटर का मामला सामने आने के बाद बीएचयू कैंपस में अब गलत सर्जरी मामले में जांच कमेटी के नए सिरे से गठन सहित तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। मामला इतना गंभीर है कि सर्जरी संबंधी कागजात से सच्चाई सामने आ जाएगी। इस बात की भी चर्चा जोरों पर रही अगर सही कागजात पर जांच हुई तो घटना में बड़ी कार्रवाई भी हो सकती है।

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