1100 किमी पैदल चलकर मां के अंतिम संस्कार में पहुंचा जवान, लॉकडाउन के बीच तेरहवीं पर उठाया एक और बड़ा कदम
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मां के निधन की खबर सुनकर 1100 किलोमीटर की यात्रा कर घर लौटने वाला छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) का जवान अपनी मां की तेरहवीं पर पांच ब्राह्मणों को भोज कराएगा। लॉकडाउन का पालन करने की वजह से ऐसा निर्णय लिया है।
मिर्जापुर जिले के चुनार कोतवाली के अंतर्गत सीखड़ गांव निवासी संतोष कुमार यादव पुत्र जयप्रकाश यादव छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सल मोर्चे पर तैनात था। उसे जब अपनी मां के निधन की जानकारी मिली तो वह अपने गांव पहुंचने के लिए निकल पड़ा। सात अप्रैल की सुबह उसने यात्रा शुरू की। सड़क, रेल और जलमार्ग से वह किसी तरह 10 अप्रैल को घर पहुंचा। संतोष यादव ने बताया कि लॉकडाउन के चलते वह मां की तेरहवी सिर्फ पांच ब्राह्रमणों को भोज कराकर मनाएगा।
तीन दिन में तय की छत्तीसगढ़ के बीजापुर से यूपी के मिर्जापुर तक की दूरी
प्रदेश के मिर्जापुर के रहने वाले छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ) के जवान संतोष यादव (30) तीन दिन में यह दूरी तय कर अपने गांव पहुंचे। 4 अप्रैल को संतोष की मां की तबीयत अचानक खराब हो गई। अगले दिन वाराणसी के एक अस्पताल में उनकी मौत हो गई। संतोष 7 अप्रैल की सुबह पैदल ही गांव के लिए निकल पड़े। संतोष ने कहा, ‘मैं मां की मौत की खबर सुनकर सिर्फ अपने गांव सीखर पहुंचना चाहता था।
छोटा भाई और एक शादीशुदा बहन दोनों मुंबई में रहते हैं और लॉकडाउन के कारण उनका गांव पहुंचना संभव नहीं था। ऐसी स्थिति में मैं अपने पिता को अकेला नहीं छोड़ सकता था।’
संतोष ने बताया, ‘मैं किसी तरह छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचना चाहता था। जगदलपुर पहुंचने के लिए बीजापुर से धान से लदे ट्रक पर लिफ्ट ली। रायपुर से करीब 200 किलोमीटर दूर कोंटागांव में एक मिनी ट्रक का मैंने दो घंटे तक इंतजार किया। वहां पुलिस को मैंने अपनी स्थिति बताई। वहां तैनात एक अधिकारी मुझे जानते थे। उन्होंने दवाई ले जाने वाले वाहन से रायपुर तक पहुंचाने में मेरी मदद की।
रायपुर से मैं रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में तैनात एक मित्र की मदद से एक मालगाड़ी में सवार हुआ। 10 अप्रैल की सुबह मैं यूपी के चुनार पहुंचा, जो मेरे गांव का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन था। इसके बाद गांव तक पहुंचने के लिए मुझे गंगा में नाव की सवारी करनी पड़ी और तीन दिन बाद घर पहुंच गया।’