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बनारस एयरपोर्ट का हाल, विमान से उतरकर टैक्सी के लिए खाइए ‘धक्के’

Sun, 29 Apr 2018 03:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 29 Apr 2018 03:45 PM IST
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Cab driver arbitrarily about fare at varanasi airport
बाबतपुर एयरपोर्ट
बनारस के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद अगर आपको टैक्सी या कैब लेनी है तो कार चालकों से सावधान रहिए। शहर तक लाने के लिए मनमाना पैसा वसूला जा रहा है। अगर मामला शाम के बाद का है तो मुश्किल और बढ़ जाती है। देशी हो या विदेशी यात्री उनका जमकर शोषण किया जा रहा है।
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इसकी वजह शाम के बाद एयरपोर्ट पर कार या कैब की कमी है। या तो निर्धारित मूल्य का दो से ढाई गुना किराया वसूल किया जा रहा है या फिर एक ही कैब से तीन से चार यात्रियों को बैठाकर प्रत्येक से 500 से 600 रुपया महज कैंट रेलवे स्टेशन तक लाने के लिए ले रहे हैं। शादियों के सीजन में टैक्सी की कमी के चलते चालकों की मनमानी ज्यादा ही बढ़ गई है।
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शुक्रवार को इंडिगो के विमान से दिल्ली से डीरेका निवासी एक यात्री जब वाराणसी एयरपोर्ट पर पहुंचे तो रात के नौ बज चुके थे। एयरपोर्ट पर टैक्सी, कैब सीमित संख्या में मौजूद थे। एयरपोर्ट से शहर तक जहां कैब 600 से सात सौ रुपये लेती हैं, रात में 1100 से 1500 रुपये मांगा जाने लगा।
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मजबूरी का फायदा उठाते हुए शेयरिंग सिस्टम पर चार यात्रियों को कैंट तक लाने पर कैब संचालक तैयार हुआ। प्रत्येक से 600 रुपया लिया गया। यही हाल मुगलसराय स्टेशन का है। दिल्ली, कोलकाता, पूर्वोत्तर से आने वाली ट्रेनों के यात्रियों से दो गुना दाम लिया जाता है।

जो ऑटो डेढ़ सौ रुपये में बनारस आता है उनसे 300-350 रुपये तक लिया जाता है। कैंट रेलवे स्टेशन और मंडुवाडीह से भी रात में मनमाना पैसा लिया जाता है।

एयरपोर्ट निदेशक अनिल कुमार राय का कहना है कि कार रेंटल या प्रीपेड टैक्सी का रेट चार्ट फिक्स है। अगर उनके द्वारा मानक से अधिक पैसा लिया जाता है तो उन पर कार्रवाई होगी। प्राइवेट गाड़ियां जो धन उगाही कर रही हैं इसे रोकने का काम पुलिस का है। इसकी सूचना भी पुलिस को दी गई है मगर इस पर रोक नहीं लग रहा है।

सीओ पिंडरा सुरेंद्र नाथ के अनुसार यदि इस तरह यात्रियों के साथ किया जा रहा है तो यह गंभीर मामला है। ऐसे चालकों, एजेंसियों के खिलाफ अभियान चलाकर उचित कार्रवाई की जाएगी।

वहीं यात्रियों को ऑनलाइन व ऑनकॉल सेवा प्रदान करने वाली कंपनी ओला का सिस्टम भी डोल गया है। शाम के बाद एयरपोर्ट पहुंच रहे यात्रियों को ओला की साइट पर ढूंढ़ने से भी कैब नसीब नहीं हो रही हैं। ऐसे में वह आसानी से सिंडिकेट का शिकार हो जा रहे हैं। वहीं सूत्रों का कहना है कि ओला के वाहन शादियों की बुकिंग में हैं।

दो एजेंसियों को दी गई है जिम्मेदारी

Cab driver arbitrarily about fare at varanasi airport
विमान
लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर वर्तमान में एयरपोर्ट टैक्सी तथा प्री पेड टैक्सी की दो एजेंसियां हैं। एयरपोर्ट अथारिटी से एग्रीमेंट हुआ है इनका टर्मिनल भवन में कार्यालय भी है। इनका एयरपोर्ट से कैंट का अधिकतम किराया 780 रुपया है।

वहीं, अवैध प्राइवेट गाड़ियां, कैब की कमी और रात के समय  यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाकर जमकर धन उगाही कर रही हैं। पिछले माह महाराष्ट्र की महिला आईपीएस से भी टैक्सी ड्राइवरों ने बदसलूकी की थी और उसकी शिकायत पर स्थानीय पुलिस और सीआईएसएफ  ने उक्त टैक्सी चालकों को एयरपोर्ट से खदेड़ा भी था, लेकिन अगले ही दिन से फिर वही प्रक्रिया शुरू हो गई।

प्रीपेड टैक्सी यूनियन के पदाधिकारी सुरेंद्र पांडेय ने बताया की ऐसे टैक्सी चालकों की कोई पहचान नहीं होती और उनकी गाड़ियां भी डग्गामार होती है और रिकार्ड में दर्ज नहीं होती हैं। इनको बाहर करने के लिए हमने कई बार लिखित तथा मौखिक शिकायत एयरपोर्ट तथा जिला प्रशासन से की। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

अवैध टैक्सी से कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं जिसमें नौ माह पूर्व सऊदी से कमाकर लौटे राजेंद्र पाल की हत्या कर लूट प्रमुख है। पिछले वर्ष सितंबर माह में लंका क्षेत्र के डाफी निवासी राजेंद्र पाल की हत्या ऑटो चालक ने की थी जो इंडिगो के विमान से वाराणसी एयरपोर्ट आया था। भविष्य में भी ऐसी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है। 
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