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Buddha Purnima 2025: एक किमी लंबी कतार, पांच घंटे में ढाई हजार बौद्ध श्रद्धालुओं ने किए अवशेष के दर्शन

Tue, 04 Nov 2025 05:12 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 04 Nov 2025 05:12 PM IST
सार

तथागत के अस्थि अवशेष के दर्शन के लिए एक किलोमीटर लंबी कतार लगी।पांच घंटे में ढाई हजार बौद्ध श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के अस्थि कलश के दर्शन किए।  
 

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Buddha Purnima 2025 Buddhist devotees visited relics Tathagata in varanasi
दर्शन- पूजन करते बैद्ध भिक्षु - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बुद्ध पूर्णिमा से पहले ही तथागत के अस्थि कलश के दर्शन सोमवार से शुरू हो गए। पांच घंटे में ढाई हजार से अधिक बौद्ध श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के अस्थि कलश के दर्शन किए। दर्शन के लिए एक किलोमीटर लंबी कतार लगी रही। वियतनाम से लाए गए फूलों से भगवान बुद्ध की प्रतिमा का आभा मंडल सजाया गया।

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सोमवार को भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ में होने वाले विशेष आयोजन का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से बौद्ध श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। बुद्ध पूर्णिमा पर बुद्ध मंदिर में रखे पवित्र अस्थि अवशेष के दर्शन सोमवार की सुबह छह बजे से शुरू हो गए। सोमवार की भोर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंदिर के मध्य अस्थि कलश रखा गया। भोर में तीन बजे से ही बौद्ध श्रद्धालु अस्थि कलश के दर्शन के लिए कतारबद्ध होने लगे थे और बुद्ध मंदिर से लेकर सड़क तक एक किलोमीटर लंबी कतार लग गई।
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महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के महासचिव भिक्षु पी शिवली थेरो के नेतृत्व में भिक्षु आर सुमितानंद, भिक्षु नंद ने पवित्र अस्थि अवशेष को मंदिर के मध्य भाग में आमजन के लिए मंत्रोच्चार के साथ अस्थायी रूप से स्थापित किया। बौद्ध भिक्षुओं के दर्शन के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोले गए। इससे पहले वियतनाम से आए लगभग 200 बौद्ध अनुयायी, तिब्बत, श्रीलंका, म्यांमार के भिक्षुओं ने अपनी-अपनी भाषा में विशेष पूजा आराधना व पाठ किया।
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पूरे मंदिर के साथ ही भगवान बुद्ध की मूर्ति को वियतनाम से लाए गए बोट ऑर्किड, सफेद व पीले गुलदाउदी के फूलों से सजाया गया था। सुबह छह बजे से अस्थि कलश के दर्शन शुरू हुए और 11 बजे तक श्रद्धालुओं ने अस्थि कलश के दर्शन किए। पांच घंटे में ढाई हजार बौद्ध श्रद्धालुओं ने तथागत के अस्थि कलश के दर्शन कर लिए थे। शाम को मंदिर क्षेत्र में पांच हजार दीप जलाए गए।

10 साल की उम्र ही धारण कर लिया चीवर

भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश स्थली पर आने वाले श्रद्धालु और अनुयायियों का सिलसिला शुरू हो चुका है। हर किसी की अपनी कहानी है। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले सारनाथ स्थित धम्म लर्निंग सेंटर के संस्थापक भिक्षु चंदिमा थेरो 2012 में राज्य सरकार में दर्जा प्रप्त मंत्री पद पर रह चुके हैं। 10 वर्ष की उम्र में कुशीनगर में चीवर धारण कर लिया था। इसके बाद स्नातक बिहार के नालंदा महाविहार से किया और उसके बाद परास्नातक वाराणसी से। उन्होंने 2013 में धम्म लर्निंग सेंटर की स्थापना की और आज देश-विदेश में भगवान बुद्ध के उपदेशों को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।
 
इतिहास से पीएचडी हैं भिक्षु नागवंश
म्यांमार के एक बौद्ध परिवार में जन्मे बौद्ध भिक्षु नागवंश तीन भाई और दो बहनों में तीसरे स्थान पर हैं। उन्होंने महज नौ वर्ष की उम्र में ही भिक्षु जीवन को अपना लिया था और चीवर धारण कर लिया था। म्यांमार में शिक्षा दीक्षा के बाद उन्होंने इतिहास से पीएचडी की और आज भगवान बुद्ध के उपदेशों का प्रचार प्रसार कर रहे हैं।
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